Bachpan day care centre bareilly run by hwd.up.

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अक्षम सक्षम एक समान, सबको शिक्षा सबको ज्ञान!
श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित एवं मानसिक मंदित बच्चों की शिक्षा, मार्गदर्शन और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण टिप्स। आइए मिलकर दिव्यांग बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाएं। 🙏"

27/07/2026

नव-निर्मित भवन: बचपन डे-केयर सेंटर, बरेली
​यह नवनिर्मित भवन 3 से 7 वर्ष के दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास, देखरेख और प्रशिक्षण के लिए एक सुरक्षित व सर्वसुविधायुक्त स्थल है।
​इस केंद्र की प्रमुख विशेषताएँ और उद्देश्य:
​विशेष वातावरण: छोटे दिव्यांग बच्चों की शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर भवन का निर्माण किया गया है।
​सुरक्षा एवं सुगमता: परिसर में बच्चों के आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ (जैसे आवश्यक रैंप, सुरक्षित गेट और खुला प्रांगण) उपलब्ध कराई गई हैं।
​दैनिक देखरेख और प्रशिक्षण: यहाँ 3 से 7 वर्ष तक की आयु के बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार दैनिक गतिविधियों, भाषा-संकेत, और प्रारंभिक शिक्षा के लिए तैयार किया जाता है।
​सहानुभूतिपूर्ण परिवेश: बच्चों के शारीरिक और मानसिक संवर्धन के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल प्रदान हेतु सशक्त।

26/07/2026

needs # auditory training #
इस तरह की ऑडिटरी ट्रेनिंग को घर पर और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव निम्नलिखित हैं:
1. ऑडिटरी सैंडविच (Auditory Sandwich) तकनीक अपनाएं
पहले केवल सुनाएं (Listening First): बिना हाथ या इशारे से दिखाए, केवल बोलें या आवाज़ करें।
ज़रूरत पड़ने पर विजुअल सपोर्ट दें (Visual Support): अगर बच्चा न समझे, तो उसे इशारा करके या चीज़ दिखाकर समझाएं।
फिर से केवल सुनाएं (Listening Again): अंत में दोबारा केवल आवाज़ दें, ताकि बच्चा ध्वनि और वस्तु/क्रिया के बीच संबंध समझ सके।
2. शांत माहौल बनाएं (Reduce Background Noise)
ट्रेनिंग के दौरान कमरे का माहौल जितना हो सके शांत रखें। TV, पंखे/कूलर की तेज़ आवाज़, या मोबाइल का शोर कम करें। इससे बच्चे को मुख्य आवाज़ (Target Sound) पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
3. दूरी और स्थिति (Distance & Position)
शुरुआती ट्रेनिंग में बच्चे के सुनने वाले कान/डिवाइस (Hearing Aid / Cochlear Implant) के करीब बैठकर बात करें।
जैसे-जैसे बच्चा बेहतर रिस्पॉन्स देने लगे, धीरे-धीरे दूरी और बैकग्राउंड शोर बढ़ाएं।
4. साउंड एसोसिएशन और 'अकुस्टिक हाईलाइटिंग' (Acoustic Highlighting)
'लर्निंग टू लिसन' साउंड्स: आवाज़ों को खिलौनों या क्रियाओं से जोड़ें (जैसे: गाड़ी के लिए "बीप-बीप", कुत्ता के लिए "भौ-भौ", ताली के लिए "क्लैप-क्लैप")।
ध्वनि में बदलाव: महत्वपूर्ण शब्दों पर थोड़ा रुककर, ऊंचे/धीमे स्वर में या लयबद्ध (sing-song manner) तरीके से बोलें ताकि बच्चे का ध्यान खिंचे।
5. इंतज़ार करें (Wait Time)
आवाज़ देने या निर्देश देने के बाद बच्चे को प्रतिक्रिया देने के लिए 5 से 10 सेकंड का समय दें। बच्चों को आवाज़ को प्रोसेस (Process) करने में थोड़ा समय लगता है। तुरंत दोबारा आवाज़ न दें।
6. खेल-खेल में अभ्यास (Play-Based Learning)
रिंग स्टैकिंग के अलावा अन्य खेलों में भी इसे शामिल करें:
म्यूजिकल चेयर / स्टॉप-एंड-गो: आवाज़ आने पर चलना और रुकने पर ठहर जाना।
साउंड हाइड एंड सीक: किसी आवाज़ करने वाले खिलौने को छिपाकर बच्चे से ढूंढने को कहें।
ड्रॉप गेम: आवाज़ सुनते ही ब्लॉक या बॉल को बाल्टी में गिराना।

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26/07/2026

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यह एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण संदेश है जो हर अभिभावक तक पहुँचना चाहिए। ऑटिज्म या संवेदी (Sensory) ज़रूरतों वाले बच्...
26/07/2026

यह एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण संदेश है जो हर अभिभावक तक पहुँचना चाहिए। ऑटिज्म या संवेदी (Sensory) ज़रूरतों वाले बच्चों में स्टिमिंग (Stimming) कोई गलत आदत या बुरा व्यवहार नहीं है, बल्कि यह उनकी भावनाओं को शांत करने, ध्यान केंद्रित करने और तनाव को नियंत्रित करने का एक स्वाभाविक तरीका है।
​अभिभावकों के लिए एक विचारशील और सम्बल देने वाला संदेश:
​प्रिय अभिभावक: आपका बच्चा खास है, उसे सही समझ और प्यार की ज़रूरत है ❤️
​यदि आपका बच्चा हाथ फड़फड़ाता है, चीज़ों को एक लाइन में लगाता है, आवाज़ें दोहराता है या बार-बार घूमता है—तो परेशान न हों। यह 'स्टिमिंग' है, और यह उनका खुद को संभालने का तरीका है।
​अभिभावकों के लिए कुछ ज़रूरी बातें:
​इसे रोकें नहीं, समझें: यदि स्टिमिंग सुरक्षित है (बच्चे को या दूसरों को कोई चोट नहीं पहुँच रही है), तो उसे जबरदस्ती रोकने की कोशिश न करें। यह उनके मन और शरीर को शांत रखने की एक ज़रूरत है।
​स्वीकार्यता (Acceptance) ही पहली चाबी है: जब आप अपने बच्चे को बिना किसी शर्त के स्वीकार करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उनका भावनात्मक विकास सही दिशा में होता है।
​संकेतों को पहचानें: बच्चा कब ज़्यादा स्टिमिंग कर रहा है? क्या वह ज़्यादा उत्साहित है, थका हुआ है या परेशान है? यह समझकर आप उसकी ज़रूरतों में बेहतर मदद कर सकते हैं।
​सहानुभूति रखें, तुलना न करें: हर बच्चा अलग होता है और उसकी यात्रा भी। अपने बच्चे की तुलना किसी अन्य बच्चे से न करें।
​याद रखें: स्टिमिंग को समझें, स्वीकार करें और समर्थन दें। आपका धैर्य और प्यार ही बच्चे के सुरक्षित भविष्य की नींव है। 🧩✨

22/07/2026

📢 RCI द्वारा D.Ed. Special Education Admission 2026 का शेड्यूल जारी! 🎓

Rehabilitation Council of India (RCI) के अंतर्गत D.Ed. Special Education सहित Diploma एवं Certificate Level Courses में प्रवेश के लिए Admission Schedule 2026 जारी कर दिया गया है।

🗓️ मुख्य तिथियाँ: ✅ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: 05 अगस्त 2026 से 24 अगस्त 2026 ✅ प्रथम मेरिट सूची: 26 अगस्त 2026 ✅ प्रथम काउंसलिंग/रिपोर्टिंग: 29 अगस्त से 03 सितंबर 2026 ✅ द्वितीय मेरिट सूची: 05 सितंबर 2026 ✅ द्वितीय काउंसलिंग/रिपोर्टिंग: 08 सितंबर से 11 सितंबर 2026 ✅ अंतिम चयनित सूची: 15 सितंबर 2026 🎓 कक्षाओं का शुभारंभ: 18 सितंबर 2026

💰 पंजीकरण शुल्क: 🔹 General/UR – ₹500 🔹 OBC/EWS/SC/ST/PwD – ₹350

⚠️ D.Ed. Special Education में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी समय रहते आवेदन करें और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें।

11/07/2026

विश्व का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय कौन से महाद्वीप में स्थित है और उसका क्या नाम है ?कमेंट में बताए।

*🛖💵🤔रिटायरमेंट के बाद भी लोग अपने पैसों को खर्च करने से क्यों डरते हैं----🛖💵🤔*हमारे देश में लाखों ऐसे बुजुर्ग हैं जिन्हो...
09/07/2026

*🛖💵🤔रिटायरमेंट के बाद भी लोग अपने पैसों को खर्च करने से क्यों डरते हैं----🛖💵🤔*

हमारे देश में लाखों ऐसे बुजुर्ग हैं जिन्होंने पूरी जिंदगी ईमानदारी से मेहनत की, बचत की, बच्चों को पढ़ाया, घर बनाया और करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर दी…
लेकिन दुःख की बात यह है कि रिटायरमेंट के बाद भी वे उसी डर और कमी वाली मानसिकता में जीते रहते हैं।

कई लोग 65–70 साल की उम्र में भी:
जरूरत महसूस होने पर भी AC चलाने से डरते हैं…
अच्छा इलाज टाल देते हैं…
आरामदायक यात्रा नहीं करते…
अपने शौक़ दबा देते हैं…
और खुद पर पैसा खर्च करने में अपराधबोध महसूस करते हैं।

🌿 *आखिर ऐसा क्यों होता है?*

क्योंकि 35–40 साल तक उनका पूरा जीवन “बचत” पर आधारित रहा।
उनके समय में नौकरी की सुरक्षा कम थी, महंगाई का डर था, भविष्य अनिश्चित था।
धीरे-धीरे उनका दिमाग इस तरह तैयार हो गया कि पैसा खर्च करना उन्हें ग़लत लगने लगा।

उनके अंदर एक डर बैठ गया:
अगर आगे पैसों की जरूरत पड़ गई तो ?
अगर बीमारी आ गई तो?
अगर पैसे खत्म हो गए तो?

और यही डर उन्हें जीने नहीं देता।

🌿 *रिटायरमेंट के बाद सबसे आम समस्याएँ:*

1. सिर्फ ब्याज पर जीने की मानसिकता

कई लोग करोड़ों रुपए बैंक में रखे रहते हैं लेकिन मूल रकम को छूना नहीं चाहते।
वे सिर्फ FD के ब्याज पर जिंदगी काटते रहते हैं, जबकि महंगाई धीरे-धीरे उस पैसे की ताकत कम करती रहती है।

2. इलाज को टालना

बहुत से बुजुर्ग पैसे होने के बावजूद:
घुटने का ऑपरेशन,
दांतों का इलाज,
आंखों का मोतियाबिंद,
या जरूरी टेस्ट टालते रहते हैं।

उन्हें लगता है: इतना पैसा खर्च क्यों करें?

लेकिन बाद में वही बीमारी ज्यादा बड़ी और महंगी बन जाती है।

3. खुद को तकलीफ देना

70 साल की उम्र में भी Sleeper Class में सफर करना…
गर्मी में जरूरत महसूस हो तो भी AC ना चलाना…
अच्छा खाना ना खाना…
सिर्फ पैसे बचाने के लिए खुद को कष्ट देना —
यह समझदारी नहीं, आदत बन चुकी मानसिक कैद है।

4. बच्चों के लिए सब बचाकर रखना

कई माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी ऐसे जीते हैं जैसे वे ग़रीब हों, सिर्फ इसलिए कि बच्चों के लिए ज्यादा पैसा छोड़ जाएं।

लेकिन आज के समय में ज्यादातर बच्चे खुद कमाने वाले हैं।
उन्हें माता-पिता का पैसा नहीं, उनका स्वस्थ और खुश रहना ज्यादा जरूरी लगता है।
🌿 *असली डर क्या होता है?*

असल में यह सिर्फ पैसों का डर नहीं होता।
यह “असुरक्षा” का डर होता है।

लंबी उम्र का डर
बीमारी का डर
अकेलेपन का डर
भविष्य का डर

इस डर में इंसान अपनी बची हुई अच्छी जिंदगी भी जी नहीं पाता।

🌿 *सबसे बड़ा दुःख क्या बन जाता है?*

बहुत लोग जिंदगी भर पैसा जोड़ते रहते हैं…
लेकिन जब खर्च करने और आनंद लेने का समय आता है, तब शरीर साथ नहीं देता।

फिर पीछे सिर्फ पछतावा बचता है:--
काश थोड़ा घूम लिया होता…
काश खुद पर खर्च किया होता…
काश जिंदगी को थोड़ा जी लिया होता…

कई लोग बैंक बैलेंस छोड़ जाते हैं…
लेकिन अधूरी जिंदगी भी छोड़ जाते हैं।

🌿 *अब सवाल है — क्या किया जाए?*

1.कृपया “खुशी फंड” बनाइए

हर महीने या हर साल कुछ पैसा सिर्फ खुशी के लिए अलग रखिए।

यात्रा
अच्छे कपड़े
आरामदायक जीवन
हॉबी
परिवार के साथ समय

इस पैसे को खर्च करना गलत नहीं है।

पैसा दो हिस्सों में बांटिए

➤ *Survival Fund*

जो मेडिकल और जरूरी जरूरतों के लिए सुरक्षित रहे।

➤ *Lifestyle Fund*

जो आराम और खुशी के लिए हो।

जब दिमाग को भरोसा हो जाता है कि सुरक्षा वाला पैसा अलग है, तब खर्च करने का डर कम होने लगता है।

3. स्वास्थ्य पर खर्च करने में कंजूसी मत कीजिए

सबसे महंगी चीज़ अस्पताल नहीं…
बल्कि खराब स्वास्थ्य होता है।

अच्छा खाना आरामदायक नींद, जरूरी इलाज,
मानसिक शांति —
ये खर्च नहीं, निवेश हैं।

4. उम्र भर की बचत के धन को को सिर्फ बचाइए मत, इस्तेमाल भी कीजिए!

हल्की वॉक,
योग,
दोस्तों से मिलना,
परिवार के साथ समय बिताना,
नई जगह घूमना —
ये सब शरीर और मन दोनों को जीवित रखते हैं।

5. बच्चों के लिए सबसे बड़ा उपहार क्या है?

बच्चों को करोड़ों छोड़ना जरूरी नहीं…
उन्हें यह दिखाना ज्यादा जरूरी है कि:--
जीवन कैसे जिया जाता है।

एक खुश, स्वस्थ और आत्मनिर्भर माता-पिता —
यह किसी भी विरासत से बड़ा उपहार है।

🌿 *याद रखिए--*

आपने 40 साल सिर्फ पैसा जोड़ने के लिए मेहनत नहीं की थी…
आपने मेहनत की थी ताकि जीवन सम्मान और आराम से जी सकें।

✨ जरूरत है तो AC चलाइए।

✨ हर 3 - 4 महीने में अच्छी यात्रा कीजिए।
✨ अपने शौक पूरे कीजिए, जो बचपन में अधूरे रह गए थे।
✨ अच्छा स्वास्थ्यवर्धक भोजन कीजिए।
✨ खुद पर खर्च करने से डरिए मत।

क्योंकि अंत में सबसे बड़ी संपत्ति बैंक बैलेंस नहीं…
बल्कि जी हुई जिंदगी होती है।

09/07/2026

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05/07/2026

बचपन डे केयर सेंटर, जैसे संस्थानों का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर दिव्यांग बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और उनके विकास के लिए एक सहायक वातावरण तैयार करना है।
इस सेंटर के मुख्य उद्देश्यों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention): 3 से 7 वर्ष की आयु बच्चों के मस्तिष्क और कौशल विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसका उद्देश्य बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं (जैसे श्रवण बाधिता या मानसिक अक्षमता) की शीघ्र पहचान करना और उन्हें समय पर आवश्यक थेरेपी और प्रशिक्षण प्रदान करना है।
सर्वांगीण विकास: बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक, संज्ञानात्मक (Cognitive), और भावनात्मक विकास के लिए विशेष गतिविधियाँ कराना, ताकि वे अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें।
आत्मनिर्भरता की नींव: इस आयु वर्ग में बच्चों को दैनिक जीवन के छोटे-छोटे कार्य (जैसे खुद खाना, अपनी चीजों को पहचानना) सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शुरुआती प्रशिक्षण देना।
सामाजिक एकीकरण: बच्चों को एक-दूसरे के साथ खेलने और बातचीत करने के अवसर प्रदान करना, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़े और वे सामाजिक रूप से घुलने-मिलने में सक्षम हो सकें।
अभिभावकों को सहयोग: बच्चों के माता-पिता को यह सिखाना और जागरूक करना कि वे घर पर अपने बच्चे की विशेष जरूरतों का ध्यान कैसे रखें, ताकि स्कूल के प्रयासों को घर पर भी जारी रखा जा सके।
सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन: दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित दिव्यांग पुनर्वास (Rehabilitation) के मानकों को अपनाकर बच्चों को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं और अधिकारों का लाभ दिलाना।
संक्षेप में, इस सेंटर का उद्देश्य एक "सुरक्षित और समावेशी स्थान" बनाना है, जहाँ 3 से 7 वर्ष के दिव्यांग बच्चे बिना किसी भेदभाव के अपनी पूरी क्षमता का विकास कर सकें।

05/07/2026

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Address

Bachpan Day Care Centre (special School)
Bareilly
243001

Telephone

+919358422451

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