20/06/2022
सेना के अग्निपथ योजना के विरोध और संभावित समाधान।
अग्निपथ योजना ने तो जैसे देश मे भूचाल ला दिया है। देश के युवा हिंसा, आगजनी लूट और तोड़फोड़ में लिप्त हो गए है।
युवाओं का तर्क है कि इतनी मेहनत के बाद हमे सेना की नौकरी मिलेगी और वह भी मात्र 4 वर्षों के लिए, यह कहाँ का न्याय है। जब मेरा पद, सेवा और जीवन तीनो असुरक्षित रहेगा तो हम देश की सुरक्षा कैसे करेंगे? न हमे पेंशन मिलेगी और पदमुक्त होने के बाद इस बात की क्या गारंटी है कि हमे अन्य क्षेत्रों में रोजगार मिल जाए। इसी असुरक्षित भविष्य की संभावना में युवा सड़क पर आ गए हैं और देश गंभीर संकट की स्थिति में आ गया है। राजनीतिक दल और कथित बुद्धिजीवी इस संकट पर बयानबाजी कर आग में घी डालने का काम कर रहे है। पर समाधान क्या हो, इसपर कोई चर्चा नही हो रही है।
समाधान-
सरकार को आगे आ कर इस योजना को स्पष्ट करना चाहिये कि किस प्रकार यह योजना देश हित मे है। यह देश के लिए जरूरी क्यों है।इसका उद्देश्य the best का चयन करना है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अग्निपथ योजना सेना को आधुनिक, युवा जोश से लैस बनाने के लिए है, न कि युवाओं को नौकरी देने के लिए। इस योजना को युवा व्यक्तिगत जीवन और हित से देखते हैं तो यह गलत है और विरोध का कारण बना हुआ है।
दूसरी बात यह कि यदि सरकार कह रही है कि अग्निवीरों को अन्य क्षेत्रों में प्राथमिकता दी जाएगी, तो प्राथमिकता के जगह पर समायोजन क्यों नही, इन्हें अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस में नियुक्त कर दीजिए। मामला हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
सरकार योजना लाये कि केवल अग्निवीरों को हीं क्षेत्रों में नियुक्ति दी जाएगी। यकीन मानिए की विरोध तत्काल समाप्त हो जाएगा।
तीसरी बात अग्निपथ का विरोध कर रहे युवाओं को समझना होगा कि आगजनी , हिंसा, लूट-पाट से उनका भविष्य खराब हो रहा है। जिस ट्रैन, बस को वे जला रहे हैं, क्या उन्हें इसकी जरूरत कभी नही पड़ेगी। उनके इस घटिया हरकतों की वजह से देशवासी उनके विरोधी होते जा रहे हैं। सेना के प्रति लोगों का सम्मान कम होता जा रहा है कि ये हमारी भावी सेना हैं जो देश को हीं जला रहे हैं।
इसलिये होश और जोश को बनाये रखते हुए उचित समाधान पर चर्चा हो न कि आगजनी, और हिंसा। युवाओं को समझाना और उन्हें वापस घर भेजना अभी ज्यादा जरूरी है न कि एक दूसरे पर आरोप लगाना।
विकास रंजन