BU Jhansi Ph.D 2015

BU Jhansi Ph.D 2015 Its a groups of scholars who are engaging in Research work at Bundelkhand University. it provides updates and news for their social & academic activity.

16/06/2017

प्रिय अभ्यर्थियों

दिनाक 18.06.2017 को महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के पुण्य अवसर पर प्रातः 10.30 बजे विश्वविद्यालय के गाँधी ऑडिटोरियम मे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो का सम्मान किया जाना है।मुख्य अतिथि के रूप मे माननीय विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदयनारायण दीक्षित एवं अध्यक्ष के रूप मे माननीय कुलपतिजी कार्यक्रम मे उपस्थित रहेगें।

माननीय कुलपति जी के आदेशानुसार आप सभी शोध छात्र/छात्राओं से अनुरोध करना है कि उक्त कार्यक्रम मे प्रातः 10.30 बजे अपनी उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करें।

आभार

डॉ संदीप सिंह वर्मा
शोध सेल।

16/03/2017

While there was a pamphlet campaign to shut down the event the 16-year-old was to perform in, a top Assam cleric says there is no fatwa against it.

30/10/2016

All the RDC will be held from 7 Nov to 30 Nov
Interviews will be conducted for 2016 Phd batches !!!
Top luck !!!

09/07/2016

Result will be out soon......
Comment ur result by your confidence...

Admit cards are available now for 5 july 2016 course work final examination
25/06/2016

Admit cards are available now for 5 july 2016 course work final examination

Terror of 23 May.......is diminishing !!!
19/05/2016

Terror of 23 May.......is diminishing !!!

08/05/2016

the date of evaluation of session is about to 23 May 2016

21/04/2016
23/03/2016

एक तरफ 12 हजार अफगान .....तो दूसरी तरफ 21 सिख .......
अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है।
आपने "ग्रीक सपार्टा" और "परसियन" की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा ...... इनके ऊपर "300" जैसी फिल्म भी बनी है ....पर अगर आप "सारागढ़ी" के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई सिखलैँड मेँ हुई थी ...... बात 1897 की है .....
नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानोँ ने हमला कर दिया ...... वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे ....
इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिँघ ने बनवाया था ..... इन किलोँ के पास सारागढी मेँ एक सुरक्षा चौकी थी ....... जंहा पर 36 वीँ सिख रेजिमेँट के 21 जवान तैनात थे ..... ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे ..... 36 वीँ सिख रेजिमेँट मेँ केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे ....... ईशर सिँह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानोँ को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानोँ से जिँदा बचना नामुमकिन है .......
फिर भी इन जवानोँ ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैँड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल हो गयी ..... एक तरफ 12 हजार अफगान थे .....
तो दूसरी तरफ 21 सिख .......
यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और 600-1400 अफगान मारे गये और अफगानोँ की भारी तबाही हुयी ..... सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलोँ को बचा लिया ........ अफगानोँ की हार हुयी ..... जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी ......ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरोँ की बहादुरी को सलाम किया ..... इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया ....... जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था ......
भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था ...... UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया ...... इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी ...... पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए ...... उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है .......ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे यहा जानते तक नहीँ ........

13/03/2016

किसी भी राष्ट्र की जिंदाबाद कहना देशद्रोह नहीं होना चाहिये चाहे वह दो सौ साल पुराना शत्रू इंग्लेण्ड हो या फिर छ दशक पुयाना पाकिस्तान। जब भी किसी राष्ट्र की जिंदाबाद बोली जाती है तो उसके केन्द्र में सेना की गोलियों से छलनी लाशें नहीं होती बल्कि वह निर्दोष अवाम होती है जिसकी दूसरे राष्ट्र से कोई निजी दुश्मनी नहीं है मगर युद्ध के दौरान उसे भी पिसना पड़ता है। श्री श्री के कार्यक्रम में जो नारे लगे हैं उनका मतलब यह न निकाला जाये कि वे नारे देश के खिलाफ हैं बल्कि पाकिस्तान को यह खुला पैगाम कि दिल्ली में आज भी पाकिस्तान को जिंदाबाद कहा जा सकता है सिर्फ इसलिये कि नफरतों की ऊंची होती दीवार को हिलाया जा सके।

लड़ाई में तो जानें तक गईं हैं
मौहब्बत में कोई खतरा नहीं है।

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