06/01/2026
यह गंदे पानी से हुई मौत नहीं हैँ—
यह सिस्टम द्वारा की गई हत्या हैं।
और इस हत्या के बाद
सबसे बड़ा अपराध हैँ —
इस पर चुप्पी।
आज देश के तथाकथित भाग्य विधाता
फर्जी आँकड़ों के मायाजाल में जनता को उलझाकर
विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होने का ढोल पीट रहे हैँ।
टीवी स्टूडियो में तालियाँ बज रही हैँ,
मंचों से जापान को पछाड़ने के जुमले उछाले जा रहे हैँ।
लेकिन ज़मीन पर…पीने को सिर्फ़ सीवरेज का गंदा पानी है और लाशें हैँ।
इंदौर में 15 लोग
सीवरेज का गंदा पानी पीकर मारे गए।
हज़ारों लोग बीमार हैँ।
सैकड़ों ज़िंदगियाँ ICU और श्मशान के बीच अटकी हुई हैँ।
मरने वाले कौन हैँ?
कोई मंत्री नहीं।
कोई अफसर नहीँ।
कोई नेता का बेटा नहीं।
मरने वाले हैं —
आम, गरीब, गुमनाम लोग।
और यही इस अपराध की सबसे बड़ी गारंटी है
कि जिम्मेदार कोई नहीं बनेगा।
पानी में सीवेज मिला।
शिकायतें दर्ज हुईं।
अधिकारी जानते थे।
फिर भी पानी की सप्लाई बंद नहीं हुई।
क्यों?
क्योंकि मरने वाले
सत्ता के परिवार से नहीं थे।
अगर यही ज़हर कोई आम आदमी किसी को पिला देता,
तो उस पर IPC 302 — हत्या का मुकदमा दर्ज होता।
लेकिन जब सिस्टम मारता हैँ,
तो उसे “लापरवाही” कहकर
फ़ाइल बंद कर दी जाती हैँ।
यही हैँ
नए भारत का न्याय।
यह कैसा शासन है जहाँ—
नागरिक मरता हैँ,
सिस्टम प्रेस नोट जारी करता हैँ,
नेता संवेदना जताते हैँ,
और दोषी अफसर
अगली पोस्टिंग का इंतज़ार करते हैँ।
इसे विकास कहा जा रहा हैँ।
इसे अमृतकाल कहा जा रहा हैँ।
लेकिन सच यह है कि
यह लाशों पर खड़ा किया गया आँकड़ों का महल हैँ।
जहाँ आम आदमी की जान की कीमत
दो-दो लाख रुपये तय कर दी गई हैँ—
वो भी अगर मिल जाए तो।
इस अमृतकाल में
अब न इस्तीफ़े होते हैँ,
न शर्म बची हैँ,
न जवाबदेही।
कैमरे के सामने
“घण्टा” कहकर
मामले को रफ़ा-दफ़ा कर दिया जाता हैँ।
और फिर अगली लाश का इंतज़ार होता हैँ।
विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था की हकीकत यह है कि—
देश की 40% पूँजी
सिर्फ़ 3% लोगों के पास हैँ,
जो सत्ता, सिस्टम और संसाधनों के असली मालिक हैँ।
बाकी देश?
बाकी जनता?
वो सिर्फ
5 किलो राशन की ग्राहक हैँ।
यही हैँ
फर्जी आँकड़ों, झूठे दावों
और खून से सने पोस्टरों वाला
नए भारत का अमृतकाल।
और अगर अब भी
इसे हादसा कहा जा रहा हैँ,
तो याद रखिए—
यह हादसा नहीं हैँ।
यह हत्या हैँ।
और हत्यारा सिस्टम हैँ। 🤔
#लक्ष्मी_कुशवाहा_सागर
#महिला_मोर्चा_राष्ट्रीय_अध्यक्ष
#प्रगति_मानव_कल्याण_परिषद
7489626167,7447069428