27/04/2022
*कुवैत में तरावीह पढा रहे भारतीय हाफिज को कुवैती हाफिज ने क्या कहा ?*
*जरा गौर फरमाऐं*
*कुवैत* में कुछ रिहायशी घरों की तामीर का काम हो रहा था जिसमें कुछ सौ घरों को बनाने का ठेका एक भारतीय कम्पनी *NC* को मिला !
वहां काम करने वाले भारतीय मजदूरों ने अपने रिहायशी कैम्प में नमाज पढने की खातिर अपने लिए एक मस्जिद बनाली और जमाअत से नमाज पढ़ने का इन्तेजाम कर लिया...
चार पांच महीने के बाद जब रमज़ानुल मुबारक का महीना आया और वहां तरावीह पढाने की जरूरत हुई ...
वहां इन भारतीय मजदूरों में एक हाफिज ए कुरआन भी था, मगर कुवैत के कानून के अनुसार तरावीह पढाने के लिए सरकार की तरफ से हाफिज की नियुक्ति जरुरी होती है इसलिए उन्होंने एक हाफिज की दरख्वास्त दे दी !
सरकारी हाफिज साहब को आने में तीन चार दिन की देरी हो गई इसलिए भारतीय हाफिज ने तरावीह पढाना शुरू कर दिया....
जब हुकूमत की तरफ से भेजा गया हाफिज भी वहां पहुँचा और इत्तेफाक से ऐन उस वक्त पहुंचा जब भारतीय हाफिज तरावीह पढा रहा था तो वह भी तराशी में शामिल हो गया....
तरावीह खत्म हुई तो कुवैती हाफिज ने भारतीय हाफिज को अपने पास बुलाया और कहा....
*’’من اعطاک صلاحیۃ تلعب مع کتابنا قران الکریم‘‘؟*
यानी *तुम्हे किसने ये इख़्तियार दिया कि तुम हमारी किताब कुरआन से खैल खैलो ???*
*"ھل ترید تخلص المصحف فی لیلۃ الواحدہ؟؟؟"*
*क्या तुम इसे एक रात में खत्म करना चाहते थे???* भारतीय हाफिज हैरान व परैशान हो कर इघर उधर तकने लगा....
एक भारतीय जो थोड़ी बहुत अरबी भाषा जानता था उसके पास आया और उसने तरजुमा करके भारतीय हाफिज को बताया कि कुवैती हाफिज क्या पूछ रहा है ?
भारतीय हाफिज ने जवाब दिया में ने कौनसी गल्ती कर दी.....?
कुवैती हाफिज जवाब में बोला....
*’’ھل تقرون القران بھٰذا شکل مثل دراجہ الناریہ فت فت فت فت فت۔؟؟؟‘‘*
*क्या तुम लोग कुरआन को इस तरह पढते हो जैसे मोटरसाइकिल की फट फट, फट फट???*
और मुझे जरा ये तो बताओ कि तुम को तो मेरी जुबान( अरबी)) समझ नहीं आ रही तो तुमने कुरआन कैसे याद कर लिया....?
बोलो......?
क्या तुमने कुरआन में कुरआन पढने के उसूल नहीं देखे के कुरआन कैसे पढा जाता है.....?
क्या तुमने ये आयत नहीं पढी के :
*وَقُرْآناً فَرَقْنَاہُ لِتَقْرَأَہُ عَلَی النَّاسِ عَلَی مُکْثٍ وَنَزَّلْنَاہُ تَنزِیْلا* (سورہ الاسرا۔آیت106) :
*और हमने कुरआन को वक्तन फवक्तन इसलिए उतारा के तुम मोहलत के साथ इसे लोगों को पढकर सुनाओ और इसका मतलब इन्हें जहन नशीन कराओ.....*
और फिर एक आयत नही देखी तुमने ?
*’’ورتل القراٰن ترتیلاً‘‘* (سورہ المزمل۔آیت 4)
*"और कुरआन को खूब ठहर ठहर कर पढो" ,* ( सूरह मुजम्मिल आयत 4)
फिर तुम कैसे इस तरह भागम भाग चले जा रहे हो....?
तुमने कुरआन को मुक्तदियों को जहन नशीन तो कराया ही नही! तुमतो इसे एक ही रात में खत्म करने पर तुले हुए नजर आऐ.....!
भारतीय हाफिज साहब ने टूटी फूटी अरबी भाषा में कहा :
*’’واللہ یا شیخ انا ما عرف ایش تقول‘‘*
*आप क्या कह रहे हो जनाब में कुछ नहीं समझ पा रहा हूँ.....?*
कुवैती हाफिज ने जवाब दिया कि *जब तुम कुछ समझते ही नहीं हो तो फिर लोगों के आगे क्यों खड़े होते हो?*
*(لماذا واقف امام الناس؟‘‘)*
*انت تقراء بالسرعۃ۔...*
*"तुम बहुत तेज रफ्तारी से कुरआन पढते हो !"*
*ھدو لاک مساکین لوراک یمکن یسمعون ولاکن لا یفھمون ‘‘*
یہ جو لوگ تیرے پیچھے
" ये जो लोग तुम्हारे पीछे खड़े हैं ये सुनते होंगे, मगर समझ कुछ नही रहे होंगे...!"
कुवैती हाफिज ने कहा *अगर आईन्दा तुमने कुरआन ए पाक के साथ ये खैल खैला तो मैं तुम्हे पुलिस के हवाले कर दूंगा....!*
😳साथियों...!!!
ये तो सिर्फ एक वाकिया है.... मगर देखा जाए तो ये हमारे यहाँ घर घर की कहानी है....
अहद ए रिसालत में जब कूरआन पढा जाता था तो सुनने वालों की क्या कैफियत होती थी....
कुरआन में अल्लाह फरमाता है:
*وَاِذَا سَمِعُوۡا مَاۤ اُنۡزِلَ اِلَى الرَّسُوۡلِ تَرٰٓى اَعۡيُنَهُمۡ تَفِيۡضُ مِنَ الدَّمۡعِ مِمَّا عَرَفُوۡا مِنَ الۡحَـقِّۚ يَقُوۡلُوۡنَ رَبَّنَاۤ اٰمَنَّا فَاكۡتُبۡنَا مَعَ الشّٰهِدِيۡنَ* : ( المائدہ۔آیت 83)
अल्लाह फरमाता है : (सूरह अल माएदा आयत 83)
*"और जब ये लोग वह किताब सुनते हैं जो हमने नाजिल की अपने पैगम्बर पर तो उनकी आंखों की तरफ देखो के कैसे आंसू रवां दवां है... इसलिए कि इन्होंने हक बात पहचानली है.....*
और हमारे यहाँ जब कुरआन पढा जाता है तो सुनने वालों पर गनूदगी तारी हो रही होती है..... और वो दिल ही दिल में दुआ कर रहे होते हैं कि जल्दी से नमाज पूरी हो और हमारी जान छूटे तो हम घरों को पहुंचें....
इसकी वजह? वजह है मेरे भाईयों........
*क्योंकि हम समझते ही नहीं क्या पढा जा रहा है और क्या कहा जा रहा है !*
अल्लाह कुरआन में फरमाता है कि:
*لَوْ أَنزَلْنَا ہَذَا الْقُرْآنَ عَلَی جَبَلٍ لَّرَأَیْْتَہُ خَاشِعاً مُّتَصَدِّعاً مِّنْ خَشْیَۃِ اللَّہِ وَتِلْکَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُہَا لِلنَّاسِ لَعَلَّہُمْ یَتَفَکَّرُونَ ہ*
(سورہ الحشر... آیت 21)
*और( इस कुरआन की असर अंगेजी का ये आलम है के अगर हम (मिसाल के तौर पर) इसे किसी पहाड पर नाजिल कर देते तो तुम देखते के इसकि खिलाफ वर्जी के अहसास से इस पर लर्जा तारी हो जाता और जिम्मेदारी के खयाल से वह रैजा रैजा ( टुकड़े टुकड़े) हो जाता.....*
(सूरह अल हश्र, आयत 21)
कुरआन में इस किस्म की मिसालें इस लिए दी गई है के लोग समझें......
अक्ल व फिक्र से काम लें और सोचें कि कुरआन किन किन अजमतों का मालिक है.......
इसमें कौनसा अजीम इन्सानी फलाही निजाम पैश किया गया है......
इस पर अमल करने में कौन कौनसी कामयाबियां बयान की गई हैं....
और इसकी खिलाफ वर्जी से क्या नतीजे बरामद होंगे.... !!!
*बराए महरबानी इस सबक आमोज़ तहरीर को स्कूल कालेज व मदारिस के उस्तादों , कुरआन के क़ारियों, हाफिजों, दीनी उल्माए कराम, समाज के बाअमल रसूखदारों के साथ साथ नौजवानों, बाशऊर नागरिकों और मस्जिदों की इन्तेजामियां वालों तक जरूर पहुंचाऐं!*
*जजाकल्लाहु खैर.*