20/04/2020
कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई है । यह बीमारी चीन के वुहान तक ही सीमित थी परंतु धीरे-धीरे इसने संपूर्ण विश्व को अपने आगोश में ले लिया है । यह बीमारी अब वैश्विक रुप ले चुकी है। संपूर्ण विश्व अब तक इस बीमारी से निजात नहीं पा सका है। चीन में 2002 में सार्स नामक महामारी भी इसी तरह से उत्पात मचाया था लेकिन इसमें मरने वालों की संख्या उस रफ्तार से नहीं थी जिस रफ़्तार से अभी कोरोना है। वैज्ञानिकों का मत हैं कि कोरोना महामारी भी सार्स का ही एक रुप है फर्क सिर्फ इतना हैं कि यह सार्स से भी ज्यादा भयावह एवं संक्रमित करने की इसमें तीव्र क्षमता है।
"कोरोना" नाम पड़ने का मुख्य कारण है यह रक्त में कांटे के सामान प्रतीत होता है। क्राउन अर्थात कांटा से इसका नाम कोरोना पड़ा है। नॉवेल कोरोना या कोविड-19 भी इसे कहा जाता है। कोविड का अर्थ है "कोरोना वायरस" । इस बीमारी को नॉवेल इसलिए कहा गया है जिसकाअर्थ है- नया और 19 इसलिए कहा गया क्योंकि यह 2019 में आया है ।
इस बीमारी के फैलने का सबसे बड़ा मुख्य कारण है एक संक्रमित व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आ जाना लिहाजा वह व्यक्ति सर्दी ,खांसी, बुखार से पीड़ित हो । इसमें यह जरुरी नहीं है कि खांसने एवं छीकने वाले व्यक्ति कोरोना से ही पीड़ित हो यह सामान्य खांसी भी हो सकती है । इस रोग का लक्षण मुख्य तौर पर 5-7 दिन में उभर आता है। और इसके लिए सबसे अहम बात है जाँच करने के उपरांत ही साबित हो सकेगा कि वह व्यक्ति कोरोना से पीड़ित है या नहीं। जाँच बहुत मायने रखता है। यदि जाँच में "कोरोना" की पुष्टि हो जाती है तब उस व्यक्ति को अलग -थलग रखा जाता है। यह बहुत ही भयानक रोग है जो भी इस माहमारी के संपर्क में आता है वह व्यक्ति संक्रमित हो जाता है। यदि संक्रमित व्यक्ति किसी वस्तु को स्पर्श करे और उस वस्तु को कोई स्वस्थ व्यक्ति स्पर्श कर अपने हाथ को मुंह या नाक को छू ले तो उस व्यक्ति का संक्रमण स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है और वह संक्रमित हो जाता है। शुरुआत में इस बीमारी का पता नहीं लग पाता है 5-7 दिन के बाद है लक्षण सामने आ पता है। लक्षण जैसे ही सामने आता है तो संक्रमित व्यक्ति को यथाशीघ्र अलग -थलग कर दिया जाता है।
इस बीमारी का सबसे रामबाण इलाज है व्यक्ति का व्यक्ति के संपर्क को रोका जाना यदि ज्यादा-से-ज्यादा व्यक्ति एक दूसरे के सम्पर्क में हो तो फैलने की सम्भावना अधिक होती है। घर पर रहना और अधिकाधिक हाथ धोते रहना चाहिए ताकि हाथ में जो संक्रमण हो उसका नाश हो। हाथ को मुंह पर लेने से बचना चाहिए। जिस व्यक्ति को छींके आती है तो उस व्यक्ति को मुँह पर रूमाल, टिसू पेपर एवं कोहनी का सहारा लेना चाहिए। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है।
इस बीमारी की रोकथाम हेतु एक और एक मात्र उपाय है व्यक्ति को व्यक्ति के संपर्क में आने से रोका जाना। इस महामारी की वजह से अब तक कुल 1,65,059 व्यक्तियों की मौतें विश्वभर में हो चुकी है। और कुल संक्रमित व्यक्ति 2,406,910 हो चूका है।और इसमें सबसे सकारात्मक बात यह है कि इस 617,023 माहमारी से विश्वभर में व्यक्ति स्वस्थ्य हो चुके हैं।
इस माहमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है इटली, स्पेन , जर्मनी , अमेरिका। कोरोन से सबसे ज्यादा तबाही अमेरिका में हुई है।हमारे देश भारत में उन देशों के मुकाबले कम प्रभावित है और एहतियात के तौर पर हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने समय रहते संपूर्ण देश में लोक-डाउन कर दिया अन्यथा यहां भी बहुत हीं डरावनी तस्वीरें सामने आती और मौतों की ढेर लग जाती हालांकि समय रहते इसके व्यापक प्रसार पर रोक लगाने में भारत सरकार दिन-रात प्रयत्नशील हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री जी धन्यवाद के पात्र हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन एंव संपूर्ण देश प्रधानमंत्री महोदय की बड़ाई कर चुके हैं।
पुनः मै एक बार और कहना चाहूंगा कि जितना हो सके घर पर रहें और एक दूसरे के संपर्क में आने से बचें।
सावधान रहें, सजग रहें एवं सामाजिक दुरी बना कर रखें।