15/04/2026
राजीव के पास एक जोंगा जीप हुआ करती थी।
निसान की जोंगा.. राजीव खुद चलाते। अक्सर परिवार के साथ.. 1985 में जब वे प्रधानमंत्री बने, तो लगभग 40 की उम्र थी। बच्चे छोटे थे, कई बार उन्हें साथ लेकर निकलते।
इस बार फैमली लेकर नैनीताल आये। पीएम शहर में हो तो कितना भौकाल होगा, सोच लीजिए। प्रदेश का पूरा पुलिस महकमा लगा था। शहर। छावनी बन गया। राजीव को अटपटा लगा। अफसरों को बुलाकर ताकीद की- इतने बजे शहर में निकलूंगा। किसी तामझाम की जरूरत नही। हमे नार्मल मूव करने दें।
"यस सर"
लेकिन सिक्युरिटी ब्लू बुक के अनुसार, प्रोटोकॉल के अनुसार जो होना है, कैसे छोड़ दें। राजीव निकले, तो देखा..शहर में चप्पे चप्पे पर पुलिस, गाड़ियां। एकदम से तमतमा गए। गुस्सा फूट पड़ा-
हू इज इंचार्ज हियर???
भन्नाये पीएम के सामने अब इंचार्ज कौन बने। डीजी, आईजी, डीआईजी सब मौजूद थे। लेकिन इंचार्ज के नाम पर जिला एसपी को भेड़ दिया गया। वे गए सैल्यूट किया। अब जो अंग्रेजी में वार्तालाप हुआ, वो यह है
-क्या मैंने साफ साफ नही कहा था कि मुझे इतनी सिक्योरिटी नही चाहिए??
- यस सर
- फिर भी आपने मेरी बात नही मानी
- यस सर
- क्या प्रधानमंत्री के आदेश की कोई कीमत नही
- सर...
IPS विक्रम सिंह बताते है, मैंने कहा-
"गाइडलाइन के अनुसार प्रोटेक्शन के लिए हमे जो करना है, वो हम कर रहे हैं। इसमें प्रोटेक्टी के भी अधिकार सीमित हैं। तो आपको अपनी सुरक्षा हटवाने का कोई अधिकार नही"
राजीव फक्क!!
"अगर आपकी ड्यूटी का मतलब, मेरा दिन खराब करना है, तो वह आपने बखूबी कर लिया है"
गुस्से में भनभनाये गाड़ी में बैठे, और उल्टे पांव वापस लौट गए। घूमने का प्लान कैसिंल।।
अफसरों में जरा भय था। जाने अब क्या होगा। आपस मे सलाह की। फिर संदेश गया कि अब सिक्युरिटी कम की जाएगी। वे घूम लें..
अफसरों ने तय किया कि सिक्युरिटी तो फुल रहे। मगर वर्दी में लोग न रहे। राजीव भी थोड़ा संयत हो चुके थे। आगे भीमताल का प्लान था। वे निकले ।
उन्होंने तो इजाजत बस इतनी दी, कि डीएम एसपी, उनके साथ, अलग एक गाड़ी में जा सकते है। इतना ही काफी था।
कई सिविल कार, मेटाडोर में सशस्त्र पुलिसवाले सादी वर्दी में बैठे। वे आगे आगे चले, लेकिन पीएम से ओझल बने रहे।
डीएम एसपी पीछे चले एक जीप में। राजीव परिवार सहित जोंगा में बैठे, और पुलिस का प्लान फेल।
जोंगा तो, ये जा, और वो जा।
उस दौर में जब एम्बेसडर और जीप ही भारतीय सड़कों पर राज करती थी। वो 60-65 की स्पीड पर खून फेंकने लगती। जोंगा 120 से अधिक तेज दौड़ने वाली रेसर कार समझ लीजिए।
तमाम सिक्युरिटी गाड़ियों के रेडियेटर फूटे, कोई गर्म होकर खड़ी हो गयी। बहरहाल जैसे-तैसे सब भीमताल पहुचे।
राजीव पहले ही पहुँच चुके थे। भुट्टा खाया, घूमे फिरे। सिक्युरिटी वाले उनके इर्द गिर्द। पर उन्हें पता नही था। जिनके पास बड़ी बंदूकें थी, कहीं भी ओट में छुपे रहे।
ट्रिप बढ़िया रहा।
वापसी के पहले राजीव नें फिर इंचार्ज को तलब किया। एसपी पहुचे। राजीव ने चाय पिलाई। और कहा
- सॉरी। यस्टरडे आई फ़ायर्ड अपऑन यू
उन्होंने एसपी साहब को फैमली बुलाने को कहा। सबके साथ फोटो खिंचाये।
राजीव के 5 साल शानदार रहे। एक कम्प्यूटर छोड़, उनकी लेगेसी पर कभी ज्यादा चर्चा हुई नही। पंचायती राज, विदेश नीति, इंदिरा आवास, जवाहर रोजगार योजना, नवोदय विद्यालय, आर्थिक खुलापन, टैक्स सुधार..
हर बॉल पे चौका छक्का। राजीव वाज ए ब्रिलिएंट एडमिनिस्ट्रेटर, एंड ए इनेक्सपीरियंसड पोलिटीशयन..
वो भारत देश के लिए एक स्वर्णिम दौर था। जिस पर जब भी लिखा बोला गया, वो शाहबानो, तुष्टिकरण, बोफोर्स के कीचड़ से सानकर, बदनीयती से लिखा गया।
पर जो उस दौर को जिये हैं, जानते हैं कि तो जिस धारा पर वो थे..
अगर एक पंचसाला और मिला होता, तो देश आज जहां है, वहां से 25 वर्ष आगे होता।
वैसा पीएम दूजा नही आया। वे होते तो देश ऐसा बंटता नही। भीतर से बिखरता नही। समेटने की काबिलियत उनमे थी।
लेकिन, उतना वक्त नही था।
अपनी सुरक्षा के प्रति बेपरवाही से उन्होंने परिवार को ही नही, इस देश के बहुसंख्य बौद्धिक, शांतिप्रिय, विकास चाहने वाले समाज को भी अनाथ छोड़ दिया।
वी ट्रूली मिस राजीव..
❤️❤️