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Confess about all the mischief,tharkapa,your crush and lot more without being afraid of getting you identity revealed

23/04/2026


18/10/2025




Ek ladki hai, Department of Dairy Science aur Food Technology se hai. A*sh*mi naam.Bhai log, bas thoda saavdhaan rahiyo. Sab kuch jaankar hi aage badhiyo, samjha? Suraksh*t rahiyo, samay samay par sambhal ke chalna bura nahi hota

21/08/2025






Kl 20 August ki shaam ko ek ladki dikhi jo ki apne bhu ki hi hai par india ki nhi hai...shayad iran ya iraq ya kahin bahar se hai mohtarma...unhe maine lanka pe kai baar dekha hai....kl unhone pink color ki tshirt pehni thi ...unke baal kaale or gore chehra ekdum chaand lagti hai aap......unke sath hmesha ek ladka bhi rehta hai sawla sa ladka jo gale me headphone lagaye rehta hai....kisi ko un mohtarma ka naam pata ho to bata de ....vo hmesha dikhti hai...par naam pata karne ki himmat nhi ho paati

- vo meri friend hai vo poland se hai

21/08/2025



Female

Yar ugc net ke liye preparation kar rhi hun history se or December mera ladt attempt hoga. Agar clear kar paye to theek warna mujhe wapas ghar bula liya jayega nd i really don't want to go back..my studying was going well nd i was satisfied with my preparation but since 7-8 days i couldn't concentrate my self ,ny riutine has totally been ruined...really i could focus at the way i should. As time is coming i m going to hopeless...i couldn't understand wt should i do... even i couldn't understand at this moment that how should i back myself to that track...yar i really don't know... i think i should purchases course for jrf adda or kumarbharat....if anyone have their courses or want to sell then plz plz drop a txt there... firstly i thought i will neither purchases any course nor get terrife .i will do my best but as time is coming i totally get terrifed...help me someone or suggest me ...may be one 1 can change my thought or i could understand myself or get some relief .it will really my pleasure if u give ur valuable or couple of time to a unknown person i.e. me...

09/08/2025





मैं तुम्हें लेकर कभी परेशान नहीं हुआ...तुम्हारा छोड़कर चले जाना मेरे लिए बहुत बड़ी बात नहीं थी, या कोई सदमा जैसा नहीं था...
किसी के चले जाने से किसी कि मौत नहीं हो जाती है, राजा दशरथ भी श्री राम के वनवास पर प्राण ना त्यागते अगर उन्हें श्रवण कुमार के माता पिता का श्राप ना होता..!!
मैं जानता था कि मेरी भी मौत नही होगी, और बहुत कुछ नहीं बदल जायेगा...हाँ थोड़ा समय लगेगा तुमको दिए जाने वाले समय को किसी और काम मे लगाने में...
जानती हो, मैं बस परेशान इसीलिए था, कि मैं जानता था, जितना प्यार मैंने तुमसे किया है उतना किसी और के बस में नहीं था...
मैं जानता था कि तुम्हारी बेपरवाह हँसी उसे खटक जाएगी चार लोगों में, मैं जानता था कि तुम्हारी बचकानी हरकतों से वो इरिटेट हो जाएगा बहुत जल्दी...वो नहीं समझ पायेगा तुम्हारे रोज़ बीमार पड़ जाने को...
उसे नहीं पता होगा कि तुम खाना खाने के वक़्त टेलीविजन के सामने बैठना ही पसंद करती हो...
या रोज़ रोज़ की तुम्हारी ऑनलाइन शॉपिंग उसे कर देंगी परेशान, और किसी रोज़ वो जब चिढ़कर तुम
पर बरस पड़ेगा, तब तुम खोजोगी मुझे, और मैं कहीं नहीं मिलूँगा..
मैं परेशान इसीलिए नहीं था कि तुम मेरे साथ नहीं होगी..मैं परेशान इसीलिए था,क्योंकि तुम किसी और के साथ होगी, जो तुम्हारे बारे में बिल्कुल नहीं जानता है..
फिर ऐसे वक़्त में मैं भी नहीं रहूँगा तुम्हारे साथ...और मुझे ये उम्र भर अखरेगा..!!
🖊️ हर्ष तिवारी

🥰

24/07/2025



औरत को तो जंग में भी मारने की इजाजत नही है और लोग मोहब्बत में मार देते है ❤️‍🩹
🖊️ हर्ष तिवारी

08/07/2025





Yar ugc net 1st paper kafi tough lag rha...kaha se padhun koi bta do..

online course le lo dost

08/07/2025





Hey buddy hope so u all r fine. ...it's not any confession..actually urgently i need room nd here i don't know the people who could help me to find, thats why i choose such platform to get help . ...i need (2bhk)2 room attached with kitchen nd washroom near durgakund,ravidasgate .... to chhitupur road...under 5k for( 2 brother nd a sister)...as i listened i could get such room a/c to my budget in chhitupur road. ...hey if anybodies have idea then plz drop a txt ...i will reached at u....one more request to our admin that plz post it ASAP...

26/06/2025





मन किंचित भी भयभीत नहीं..
वो दिल में है पर प्रीत नही,
बनकर आये थे मेरे रहनुमा...
लेकिन अब वो मीत नहीं,
लिए थे मेरे कांधे का ही सहारा..
अब अंत है वो अतीत नही,
व्यथित मन जब रोता है तो रोने दो..
देकर ढाढ़स सेहलाओ रोते मन को...
बद था वो पर ये जग की रीत नही।।
🖊️ हर्ष तिवारी

❤️

04/06/2025

क्या बात है आजकल कोई भी confessions नहीं लिख रहा है अब आप लोगों का कोई confessions नहीं है?
अपनी बातों को इस पेज़ के माध्यम से अपने अज़ीज़ लोगों तक पहुंचा सकते हैं
(लिखना आपका काम है पहुंचाना मेरी ज़िम्मेदारी)

15/05/2025





****** *झूठ का जाल* ******
जिंदगी, निरंतर बहने वाली सरिता की भांति उस रोज भी बह रही थी जब व्यापक दृष्टिकोण के साथ परिवर्तन की अनंत क्षमता रखने वाले ऋषभ की मुलाकात दिव्या से होती है जो देखने में सीधी सरल शांत स्वभाव की प्रतीत होती है।
ऋषभ इस सरलता को आज के समय में चल रहे "फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स" से भिन्न समझता है और भावनात्मक समर्थन एवं प्रेम की आकांक्षा रखते हुए हाथ आगे बढ़ाता है और दिव्या भी लड़के के स्वभाव में वफादारी और कर्मठता से प्रभावित होकर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है।
यद्यपि दोनों की पृष्ठभूमि में विभिन्न आयामों पर पर्याप्त भिन्नता होती है दिव्या इसका अनुभव नहीं कर पाती है और उसके लिए यह सामान्य घटना थी लेकिन ऋषभ इस विषय से परिचित था किन्तु दिव्या की सरलता एवं निष्कपटता एक आकर्षण उत्पन्न करती थी जो ऋषभ को बहुत भाती थी।
"प्यार करने वाले रंग रूप नहीं देखते..
जैसे खून पीने वाले ब्लड ग्रुप नहीं देखते.."
उपर्युक्त पंक्ति का अनुसरण करते हुए ऋषभ दिव्या को अपने हृदय की बात बताता है जिस पर दिव्या की सहमति प्राप्त होती है और दोनों में प्रेम की भावना बलवती होती है एकदूसरे से अथाह प्रेम करते है व अभिन्न प्रेमी-प्रेमिका बनते है।
"शब्दों का मैं मौन लिखूँ
या मेरे हो तुम कौन लिखूँ
बस इतना ही तुम्हे लिख पाया हूँ
तुम अवर्णनीय ...तुम अतुलनीय ..जीवन का सच्चा साथ हो तुम 💕"
उन दोनों की नजदीकिया बढ़ती गयी, ऋषभ निस्वार्थ प्रेम की चाह में एक साधारण सी लड़की को अपने हृदय की राजकुमारी बना लेता है और उसको हर छोटी बड़ी खुशी देने का वादा करता है।
दोनों का रिश्ता काफी मजबूत हो चुका था एक-दूसरे के स्वभाव को अच्छे से समझते थे जीवन के आगामी समय के लिये योजनाए बनाते थे जिसमें दिव्या की आकांक्षाओं को प्राथमिकता देना ही ऋषभ की संतुष्टि थी।
ऋषभ व्यापार क्षेत्र से सम्बद्ध था और दिव्या अध्यापिका थी तो किसी बहाने से दोनों के पास मिलने-जुलने का पर्याप्त अवसर मिल जाता था दोनों ने साथ में जीवन की अविस्मरणीय यात्राएं की जो बहुत यादगार और रोमांच से पूर्ण होती थी।
जब प्रेमिका को घर से बाहर नगर में या नगर के बाहर कहीं जाना होता था तो ऋषभ सदैव उपस्थित होता था जैसे प्रेमिका के लिये ही जीवन समर्पित कर दिया हो और जीवन का प्रथम कार्य प्रेमिका के समक्ष उपस्थित होकर उसे प्रेम की अनुभूति प्रदान करना हो....
दोनों के मध्य के सम्बन्ध अब न केवल भावनात्मक जुड़ाव के थे बल्कि एक पति-पत्नी जैसे हो चुके थे उनमें किसी भी प्रकार का परस्पर कोई संकोच न रहा था और उनके मध्य समन्वयता भी अच्छी थी।
ऋषभ संवेदनशील व्यक्ति था और किसी लड़की का भावनात्मक या शारीरिक लाभ प्राप्त करके छोड़ने में यकीन नही रखता था इसलिए इस रिश्ते को दीर्घकाल के लिये संजोना चाहता था
लेकिन अब दिव्या का वास्तविक नज़रिया दृष्टिगोचर होता है "तू नही कोई और सही, कोई और नहीं कोई और सही...." यह बात ऋषभ की भावनाओं को अंतरतम तक घायल कर गयी।
"पत्थर के सनम, तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना, बड़ी भूल हुई अरे हमने, ये क्या समझा, ये क्या जाना"
यहां से दोनों के मध्य मतभेद प्रारम्भ हो गया, ऋषभ के मन में दिव्या की जो छवि थी "फ्रेंड्स विथ बेनिफिट्स" से अलग वफादार, सरल स्वभाव की शांत लड़की वाली, वह अब एक पत्थर पर गिरे सीसे की भांति टूटकर बिखर गयी।
"निभाना किसको कहते है
वो कुछ ही लोगो को आता है...
बड़ा आसान है कहना
मुझे तुमसे मोहब्बत है.."
दिव्या का मिजाज अस्थिर चेतना से पूर्ण नजर आने लगा परन्तु अब भी वह कभी हमसफऱ बोलती और कुछ दिन बाद पृथक भविष्य की कल्पना कराती यही प्रक्रिया वह वर्षभर से अधिक समय तक दोहराती रही जिससे ऋषभ के मन में अपना वस्तुकरण होना प्रतीत होने लगा और अपने प्रेम व वफादारी तथा समर्पण की हार देखकर अंतर्मन तक टूट गया।
और बिखरी भावनाओं व टूटे जज्बातों के साथ पृथक होने का निर्णय लिया
"जिस दिन तुम्हारा ध्यान मुझसे हटने लगेगा
मैं स्वयं ही तुम्हारे जीवन से विदा लेकर चला जाऊंगा,
क्योंकि प्रेम और महत्ता के लिए
प्रेमिका से ही लड़ना पड़े तो व्यर्थ है।"
अब दोनों के मन में एक-दूसरे के लिये वह लगाव प्रेम न रहा लेकिन इतना आसान होता है क्या अपने प्रेम को भूलकर आगे बढ़ना.....
इस सन्दर्भ में लडके ने प्रयास भी किये सम्बन्धो में सुधार करने के लिये लेकिन निरंतर प्रेमिका द्वारा अवहेलना नजरअंदाजी द्वारा लडके का मन अंदर ही अंदर व्यथित होता रहा और यह कारण बन गया ऐसे रिश्ते से बाहर जाने का जिसमें प्रेम के नाम पर छला गया हो और भावनाओं का उल्लास बनाया गया हो।
"उसने प्रेम को रोमांच का जब घर बनाया तो मैंने....
आँखें पोंछी, दर्द समेटा, दिल उठाया और चलते बने l"
विदित है कि ऐसे लड़के कम ही है संसार में जो किसी लड़की का तन प्राप्त करने के बाद भी अपने प्रेम को कभी कम नही होने देते है और प्रेमिका को भोग की वस्तु न समझकर उसको अपने जीवन की महत्वपूर्ण इकाई मानते है लेकिन उनके हिस्से में आती है वह लड़कियां जो अपने शरीर को वस्तु मानकर सौपती है लड़के को और मन भर जाने पर बिभिन्न तरीको से पृथक होकर तलाशने लगती है एक नया रोमांच।
अतः आप केवल उन्हें चुनो जिनका नजरिया स्थायी हो जिसके लिये व्यक्ति और भावनाओं का महत्त्व हो जो जानता हो प्रेम की परिभाषा और अपने सम्बन्ध को प्राथमिक बनाता हो।
अंततः तुम केवल उन्हें चुनो..
जिनकी कहानी के तुम मुख्य पात्र हो !! 🌻❤️
🖊️ हर्ष तिवारी

❤️‍🩹

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Banaras Hindu University
Varanasi
221005

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