10/04/2023
सूर्यपीठ बड़गांव की महत्ता किसी से छुपी नहीं है। यह विश्व के 12 अर्को (सूर्य मंदिर) में से एक है। यहां देश के कोने- कोने से श्रद्धालु छठव्रत करने के लिए आते हैं। यहां छठ करने से मुरादें पूरी होती हैं। रविवार को नहाय-खाय के दिन छठव्रतियों की भीड़ बड़गांव में जुटने लगी है। व्रतियों का यहां आना अब भी जारी है। लोग साड़ी धोती से बने तंबुओं में चार दिनों तक रहने के लिए अस्थायी रूप से डेरा डाल लिया है। तालाब के आसपास जहां तक नजर जाती हैं बांस व कपड़े के तंबू नजर आ रहे हैं। ऐसा लगता है तम्बुओं का एक नया शहर ही बस गया है। वैदिक काल से सूर्योपासना का प्रमुख केन्द्र रहा है बड़गांव :- बड़गांव का प्राचीन नाम बर्राक है। श्रीकृष्ण के पौत्र राजकुमार साम्ब का ऋषि दुर्वासा के श्राप से कुष्ठ रोग हो गया था। बड़गांव के तालाब में स्नान करने से उन्हें रोग से मुक्ति मिली थी। कई वर्षों तक यहां रहकर उन्होंने यहां सूर्योपासना की थी। मंदिर के पुजारी भुनेश्वर पांडेय ने बताया कि पहले सूर्य मंदिर तालाब के पास ही था। वर्ष 1934 में भूकंप के कारण ध्वस्त हो गया।