20/03/2013
think frnds
*** अँग्रेजी भाषा के बारे में भ्रम- 1 ***
अँग्रेजी नहीं होगी तो विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई नहीं हो सकती: दुनिया में 2 देश इसका उदाहरण हैंकी बिना अँग्रेजी के भी विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई होती है- जापान और फ़्रांस।
पूरे जापान में इंजीनियरिंग, मेडिकल के जितने भी कॉलेज और विश्वविद्यालय हैं सबमें पढ़ाई"JAPANESE" में होती है, इसी तरह फ़्रांस में बचपन से लेकर उच्च शिक्षा तक सब 'FRENCH' में पढ़ाया जाता है। हमसे छोटे छोटे, हमारे शहरों जितने देशों में हर साल नोबल विजेता पैदा होते हैं लेकिन इतने बड़े भारत में नहीं क्यूंकी हम विदेशी भाषा में काम करते हैं और विदेशी भाषा में कोई भी मौलिक काम नहीं किया जा सकता सिर्फ रटा जा सकता है।
ये अँग्रेजी का ही परिणाम है की हमारे देश में नोबल पुरस्कार विजेता पैदा नहीं होते हैं क्यूंकी नोबल पुरस्कार के लिए मौलिक काम करना पड़ता है और कोई भी मौलिक काम कभी भी विदेशी भाषा में नहीं किया जा सकता है।
नोबल पुरस्कार के लिए P.hd, B.Tech, M.Tech की जरूरत नहीं होती है।
उदाहरण: न्यूटन कक्षा 9 में फ़ेल हो गया था, आइंस्टीन कक्षा 10 के आगे पढे ही नही और E=hv बताने वाला मैक्सप्लांक कभी स्कूल गया ही नहीं।
ऐसी ही शेक्सपियर, तुलसीदास, महर्षि वेदव्यास आदि के पास कोई डिग्री नहीं थी, इन्होनें सिर्फ अपनी मातृभाषा में काम किया। जब हम हमारे बच्चों को अँग्रेजी माध्यम से हटकर अपनी मातृभाषा में पढ़ाना शुरू करेंगे तो इस अंग्रेज़ियत से हमारा रिश्ता टूटेगा और हम भी नोबल पुरस्कार विजेता पैदा करने लगेंगे।
क्या आप जानते हैं जापान ने इतनी जल्दी इतनी तरक्की कैसे कर ली ? क्यूंकी जापान के लोगों में अपनी मातृभाषा से जितना प्यार है उतना ही अपने देश से प्यार है। जापान के बच्चों में बचपन से कूट- कूट कर राष्ट्रीयता की भावना भरी जाती है।
अँग्रेजी हमारी मजबूरी, हिन्दी हमारा स्वाभिमान !