09/12/2018
Economic capsule
प्रत्येक अर्थव्यवस्था अपनी आर्थिक गतिविधियों को आय अर्जन के मामले में महत्तम करना चाहती है ताकि आर्थिक गतिविधियाँ और अधिक लाभकारी हो सके। चाहे आर्थिक संगठन की व्यवस्था कुछ भी हो, अर्थव्यवस्था की आर्थिक गतिविधियों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है जिन्हें अर्थव्यवस्था का क्षेत्रक कहा जाता है।
1-प्राथमिक क्षेत्र: अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जहाँ प्राकृतिक संसाधनों को कच्चे तौर पर (सीधे तौर पर) प्राप्त किया जाता है, यथा: उत्खनन, कृषि कार्य, पशुपालन, मछली पालन, इत्यादि। कुछ अर्थव्यवस्था में उत्खनन कार्य को द्वितीयक क्षेत्र माना जाता है, यद्यपि हम यहाँ प्राकृतिक संसाधनों का सीधे तौर पर उपयोग करते हैं। मोटे तौर पर ऐसे अर्थव्यवस्था में कृषि एवं कृषि संबंधी कार्य को प्राथमिक क्षेत्र माना जाता है। भारत में यही स्थिति है।
2-द्वितीयक क्षेत्र: अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों को कच्चे माल (raw material) के तरह उपयोग करता है, द्वितीयक क्षेत्र कहलाता है। वास्तव में इस क्षेत्र में विनिर्माण कार्य होता है इसलिए इन्हें औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है; उदहारण के लिए केक एवं बिस्कुट उद्योग, वाहन उद्योग, वस्त्र उद्योग, लौह-इस्पात उद्योग, इत्यादि।
3-तृतीयक क्षेत्र: इस क्षेत्र में वे सभी आर्थिक गतिविधियाँ शामिल हैं जिससे विभिन्न प्रकार की सेवाओं का उत्पादन किया जाता है; यथा: शिक्षा, बैंकिंग, बीमा, पर्यटन, आवागमन इत्यादि। इस क्षेत्र को सेवा क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है। आज भी भारत की जनसंख्या का अधिकांश भाग रोजगार के लिए प्राथमिक क्षेत्र पर निर्भर है जबकि देश के सकल घरेलू उत्पाद में सर्वाधिक योगदान तृतीयक क्षेत्र का है।