08/01/2022
ॐ...
येषां न विद्या,न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं, गुणो न धर्म:।
ते मृत्युलोके भुवि भारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति।।
अर्थ ...
जिनके पास न विद्या(शिक्षा)है, न तप है, न दान(करते)है, न ज्ञान है, न शील है, न (अन्य कोई) गुण हैऔर न धर्म है।वे इस संसार में पृथ्वी पर बोझ बन कर मनुष्य के रूप में पशुओं की तरह घूमते हैं।
मित्रों...
हमारे मनीषियों ने बहुत अध्ययन के बाद ये"सुभाषितानि" अर्थात अच्छे विचारणीय श्लोक, लिखे हैं।जिनसे व्यक्तियों को सही ढंग से जीने की कला मिले।सही में जिस व्यक्ति ने न तो विद्या अर्जित की है, न ही किसी प्रकार की तपस्या की है, न ही किसी को दान देने में कोई रुचि है, न ही ज्ञान अर्जित करने की चेष्टा की है, न ही उसका आचरण अच्छा है, न ही अपने अंदर गुणों को विकसित किया और न ही उसका आचरण धार्मिक है।ऐसे व्यक्तियों का जीवन तो पशुओं के समान ही होगा।जैसे पशुओं का जीवन ध्येय रहित होता है।वैसे ही ऐसे व्यक्ति धरती पर बोझ के समान ही होते हैं।मित्रों! हमें अपने जीवन में अच्छी आदतों का विकास करना ही चाहिए।ज़रूरी नहीं कि हम सर्व गुण सम्पन्न हों पर कुछ अच्छे गुण तो विकसित कर ही सकते हैं।सर्व प्रथम विद्या का गुण है।यदि किसी ने विद्या अर्जन कर लिया तो उसे जीवन के तौर तरीके विद्या ही सिखा देगी।और यदि कोई व्यक्ति तपस्या में लीन है तो उसे मोक्ष का रास्ता मिल जायेगा।मित्रों! तपस्या का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि हम संसार को त्याग कर साधु बन जाएं।संसार में रह कर भी तपस्या की जा सकती है।बस अपनी इन्द्रियों, वाणी तथा मन पर सयंम रखने की आवश्यकता है।और दान देना तो महान व्यक्तियों की निशानी है।कहा गया है-"दानेन पाणिर्न न तु कङ्कणेन" अर्थात कंगन से हाथ की शोभा नहीं होती बल्कि दान देने से होती है।दानी व्यक्ति हर समय परोपकार की ही सोचता है।और एक ज्ञानी व्यक्ति तो समाज के लिए आदर्श होता है।वह सबको जीवन जीने की राह दिखाता है।अच्छे आचरण वाला व्यक्ति तो सबका प्रिय होता है।अपने अच्छे आचरण से उसके सारे कार्य सिद्ध होते हैं।और जो व्यक्ति धार्मिक होता है उसका यह लोक तो सँवरता ही है साथ ही वह दूसरे जन्म को भी सुधार लेता है।मित्रों!यह मानव जीवन बहुत दुर्लभ है इसे ऐसे ही व्यर्थ न जाने दे।अपने अंदर अच्छी आदतों को रुचियों को विकसित कर ही लेना चाहिए।तभी हम इस संसार के आवागमन के चक्र से बच सकते हैं।मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता खोल सकते हैं।वरना तो पशुओं के समान ही रहेंगे जिन्हें किसी बात का कोई भान ही नहीं है।...ॐ शांति ॐ...