25/09/2026
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के संस्कृति संगम सभागार में आज दिन में (25 सितम्बर 2026) पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ के तरफ से उनकी 110वीं जयंती समारोह के अवसर पर एकात्म मानववाद विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का भव्य आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि एवं वक्ता, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री अशोक मेहता जी ने पं. दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए व्यष्टि से समष्टि और परमिष्टि तक की यात्रा पुरूषार्थ और विराट तक के बारे में इस दर्शन का भारतीय सनातन परम्परा और गाँधी, विनोबा भावे, महामना मालवीय से लेकर तुलसीदास, मीरा, कबीर, रैदास, रहीम और रसखान तक के विचारों से सम्बन्ध को रेखांककित किया। भारतीय संविधान, अधिकार और कर्तव्य तथा सरकार की योजनाओं में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों की झलक पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पीठ के चेयर प्रोफेसर प्रो. हर्ष कुमार ने आजादी के बाद नेहरू जी के भारत के नवनिर्माण के बजाय दीनदयाल जी के पुर्ननिर्माण की बात कही। विषय प्रवर्तन डॉ. मृत्युंजय राव परमार और संचालन डॉ. सर्वेश सिंह ने किया।
अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकान्त यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन करते हुए पीठ के रिसर्च फेलो डॉ. राजेश सिंह ने पीठ के आउटरीज कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में पीठ द्वारा अगस्त माह में कराये गए निबन्ध प्रतियोगिता के प्रथम पाँच प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र के साथ पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थिति अन्य प्रमुख लोगों में डीन विद्यार्थी कल्याण प्रो. सूर्यभान सिंह, कुलानुशासक डॉ. अतुल नरायण सिंह, विधि अधिकारी पीयूष मिश्रा, डॉ. जितेन्द्र सिंह नौलखा, डॉ. अमित सिंह, डॉ. राघवेन्द्र सिंह, डॉ. धीरज श्रीवास्तव, डॉ. संजय, डॉ. मुकेश, डॉ. अरविन्द, डॉ. अशीष धर त्रिपाठी एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ के अनुराग कुमार यादव समेत सैकड़ों शिक्षक, प्रबुध्दजन, शोध छात्र एवं अन्य छात्र –छात्राएँ उपस्थिति रहे।