01/05/2024
बिलकुल सच बात है, “दो भारत थे”
एक 2014 से पहले का भारत, जब टीवी, अख़बार, रेडियो, प्लेटफार्म हर जगह ये बताया जाता था कि अनजान वस्तुओं को ना छुए, वो बम हो सकता है।
वो भारत जिसमें आये दिन बम ब्लास्ट होना, आतंकी हमले होना, सैनिकों का सर काटकर ले जाना एक आम घटना की तरह अक्सर हुआ करती थी।
सिलेंडर, मोबाईल सिम, यूरिया, सरकारी राशन की दुकानों पर घण्टो लंबी लाईन में खड़े होने की आदत सी पड़ गई थी।
डिजिटल इण्डिया तो छोड़िए, हर नागरिक के हाथ में स्मार्ट फ़ोन होने की तो कल्पना मात्र भी करना बेवक़ूफ़ी मानी जाती थी।
पटरी पर ट्रेन कम, लोग शौच करने ज्यादा जाते थे।
90 के दशक के कई विद्यार्थी लालटेन और ढिबरी में बोर्ड के एग्जाम की तैयारी करते थे। गाँवों में बिजली शिफ्ट में आती थी।
— दूसरा 2014 के बाद का भारत
जन्हा ब्लास्ट करना तो दूर आतंकी घुसने से भी डरते है।
अब देश में आतंकी नहीं घुसते बल्कि देश आतंकियों घर में घुसकर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक करता है।
प्लेटफार्म पर अब अनजान वस्तुओं को ना छूने का एनाउसमेंट नहीं, बल्कि वन्दे भारत और अमृत भारत जैसे ट्रेनों के आने का होता है।
लाइन लगाकर सिलेंडर इत्यादि ख़रीदना तो पुराने जमाने की बात है, आजकल ये काम सिर्फ़ मोबाइल से हो जाता है।
अब बैंक अकाउंट खोलने के लिए बैंक नहीं जाना पड़ता, बल्कि बैंक ख़ुद चलकर आपके घर आता है।
आज सिर्फ़ हर ग़रीब के पास स्मार्ट फ़ोन ही नहीं बल्कि GPay और Paytm की सुविधा है।
अन्य बहुत से बदलाव इस देश में 2014 के बाद हुए जिसे एक ट्वीट लिखना मुश्किल है।
अब आप सोचिए को इस चुनाव के बाद आपको इसी भारत रहना है या 2014 से पहले वाले भारत में?
मतदान करने ज़रूर निकले 🙏🏻