09/02/2022
_मा० पूर्व विधायक गामा पांडेय जी का वर्तमान राजनैतिक हालात पर 08 फरवरी को हुल्का गाँव से पूरे विधानसभा के लोगों के लिए दिए गए व्यक्तव्य संदेश में से कुछ प्रमुख अंश..._
मेजा का सम्मान कैसे बचेगा ? ......सम्मान बचाने का तरीका होता है, किसी तरह से सम्मान कैसे बचेगा इसके लिए आपको जाना पड़ेगा अतीत में.. एक बार सोचिए कि... मेजा का आदमी जब पहली बार विधानसभा हुई 1952 में.. महावीर शुक्ल हंडिया से विधायक हुए; केपी तिवारी के बाप को सोरांव से टिकट मिला; पंडित सरजू प्रसाद पांडेय 20 साल जिला पंचायत के अध्यक्ष थे तब सिराथू और मंझनपुर इसी में था और आज क्या हालत है ?? आप लोगों को (मेजा वालो को) टोंस के उस पार कोई नहीं जानता ! आप लोगों को इस पार (गंगापार) कोई नहीं जानता ! आप लोग.. माण्डा के बाद, सुमतिया के बाद आपका कोई नाम लेने वाला.. नहीं है! किसका दोष है ? हमारा.. आप लोग कब सोचेंगे ? कब कोशिश करेंगे ? *(मेजा का) कोई भी चुनाव लड़े कोई फरक नहीं ! मेजा की इज्जत और प्रतिष्ठा बचाना पड़ेगा। मेजा में देश का प्राइममिनिस्टर पैदा हुआ.. मेजा का चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पैदा हुआ। मेजा में सरजू पांडेय, मंगला प्रसाद पैदा हुए। मेजा के.. प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से लेकर विश्वनाथ प्रताप सिंह पैदा हुए!*
अब मैं आपको पूछना चाहता हूं कि.. हम (मेजा वाले) एक वोटर हैं क्या ? वोट की राजनीति के लिए.. हम वोट देने के लिए खाली हैं... आप लोगों से पूछना चाहता हूँ ! हम (मेजा वाले) वोटर हैं क्या ? हम (मेजा वाले) नेता हैं ! जितने बैठे हैं सब नेता हैं।
(इसे शेयर कर औरों तक पहुचाएं और विचार करें कि जिस मेजा से लोग दूसरे विधानसभा से विधायक हुए , देश का नेतृत्व किये? आज उस मेजा की क्या हालत है ? क्या बाहर से आये लोग ही यहां का नेतृत्व करेंगे जबकि यहां घर - घर नेता हैं! सोचिए विचार कीजिये कि मेजा का सम्मान किसमें है और मेजा का सम्मान कैसे बचेगा)