Urmila Paramedical and Nursing College

Urmila Paramedical and Nursing College Affiliated to Asian International University

27/04/2026
17/04/2026

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_*हर नया दिन हमारे जीवन में नया अवसर लेकर आता है,क्या हममें उस अवसर को पहचानने की क्षमता है?*_ *अवसर की दस्तक*पहाड़ी क्षे...
13/04/2026

_*हर नया दिन हमारे जीवन में नया अवसर लेकर आता है,क्या हममें उस अवसर को पहचानने की क्षमता है?*_

*अवसर की दस्तक*

पहाड़ी क्षेत्र में नदी किनारे एक छोटा सा गाँव बसा हुआ था। उस गाँव के लोग बहुत धार्मिक प्रवृति के थे। गाँव के मध्य स्थित मंदिर में सभी गाँव वाले दैनिक पूजा-अर्चना करते थे। उस मंदिर की देखभाल की ज़िम्मेदारी वहाँ के पुजारी जी पर थी, जो मंदिर परिसर में ही निवास करते थे। वह सुबह से लेकर रात तक ईश्वर की अर्चना में लीन रहते थे।
एक दिन गाँव पर प्रकृति का कहर मूसलाधार बारिश के रूप में टूटा, जिससे गाँव की नदी में बाढ़ आ गई। बाढ़ का पानी जब गाँव में प्रवेश कर गया, तो गाँव के लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी करने लगे।
एक व्यक्ति को गाँव छोड़कर जाने से पहले मंदिर के पुजारी जी का ध्यान आया और वह भागता हुआ मंदिर पहुँचा। वहाँ पहुँचकर वह पुजारी जी से बोला, ”पुजारी जी! बाढ़ का पानी हमारे घरों में घुसने लगा है। धीरे-धीरे बढ़ते हुए वो मंदिर तक भी पहुँच जायेगा। यदि हमने गाँव नहीं छोड़ा, तो बाढ़ में बह जायेंगे। हम सभी सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं। आप भी हमारे साथ चलिए।”
लेकिन पुजारी जी उस व्यक्ति के साथ जाने को राज़ी नहीं हुए। वह बोले, “मैं तुम लोगों जैसा नास्तिक नहीं हूँ। मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है। पूरे जीवन मैंने उनकी आराधना की है। वह मुझे कुछ नहीं होने देंगे। तुम लोगों को जाना है तो जाओ। मैं यहीं रहूँगा।”
पुजारी जी की बात सुनकर वह व्यक्ति वापस चला गया। पुजारी जी भगवान की प्रार्थना में लीन हो गये।
कुछ ही देर में बाढ़ का पानी मंदिर तक पहुँच गया। बढ़ते-बढ़ते वह पुजारी जी के कमर तक पहुँच गया। ठीक उसी समय एक आदमी नाव लेकर वहाँ आया और पुजारी जी से बोला, “पुजारी जी, मुझे गाँव के एक आदमी ने बताया कि आप अब भी यहीं हैं। मैं आपको लेने आया हूँ। चलिये, नाव पर बैठिये।”
पुजारी जी ने वही बात नाव वाले व्यक्ति से भी कही, जो उसने पहले व्यक्ति से कहीं थी और जाने से इंकार कर दिया। नाव लेकर आया व्यक्ति चला गया।
कुछ देर में पानी मंदिर के छत तक पहुँच गया। भगवान को मदद के लिये याद करते हुए पुजारी जी मंदिर के सबसे ऊँचे शिखर पर जाकर खड़े हो गये। तभी वहाँ एक सुरक्षा दल हेलीकॉप्टर से आया और उन्होंने पुजारी जी को बचाने के लिए रस्सी फेंकी। लेकिन पुजारी जी ने वही बात दोहराते हुए रस्सी पकड़ने से इंकार कर दिया। सुरक्षा दल का हेलीकॉप्टर दूसरों को बचाने आगे चला गया।
अब बाढ़ का पानी मंदिर के शिखर तक आ गया था। वहाँ खड़े पुजारी जी डूबने लगे। डूबने के पहले वह भगवान से शिकायत करते हुए बोले,“भगवान! मैंने पूरा जीवन आपको समर्पित कर दिया। मैंने आप पर इतना विश्वास रखा। फिर भी आप मुझे बचाने नहीं आये।”
पुजारी जी की शिकायत सुन भगवान प्रकट हुए और बोले, “अरे मूर्ख! मैं तीन बार तुझे बचाने आया था। पहली बार मैं भागते हुए तुम्हारे पास आया और गाँव वालों के साथ गाँव छोड़कर चलने के लिए कहता रहा। फिर मैं नाव लेकर आया और अंत में हेलीकॉप्टर। अब इसमें मेरी क्या गलती कि तूने मुझे पहचाना नहीं?”
पंडित को अपनी गलती समझ में आ गई। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जीवन में अवसर बिना बताये दस्तक देते है। हम उन्हें पहचान नहीं पाते और जीवन भर शिकायत करते रहते हैं कि अच्छा और सफ़ल जीवन जीने का हमें अवसर ही प्राप्त नहीं हुआ।
हर दिन जीवन को नए तरीक़े से जीने का एक अवसर है। प्रत्येक सुबह का ह्रदय पर ध्यान हमें उस नए जीवन को इसी जीवन में लाने का अवसर प्रदान करता है।
*“जब प्रेरणा आती है, तब उस पर संदेह न करके, बस उस पर अमल करें। ध्यान यह परखने में हमारी मदद करता है कि हमारी सोच सही है या गलत, लाभदायी है या नहीं।"*

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