Shri Sardari Lal College of Education

Shri Sardari Lal College of Education Educational Updates

https://youtu.be/aiMIP_NC4AI
09/05/2022

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विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सबसे सस्ती पुस्तकें कहाँ मिलती हैं? कितनी सस्ती हैं? ऑरिजिनल और डुप्....

https://youtu.be/jM0aThxDFSE
05/05/2022

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RPSC School Lecturer 2022 का Exam Pattern, पेपर 2nd इतिहास Syllabus, इतिहास Book List तथा Exam Strategy के बारे में इस वीडियो में बताने का प्रयास किया गया है।

https://youtu.be/VN-KQRbBut4
30/04/2022

https://youtu.be/VN-KQRbBut4

NCERT Support Material वर्तमान में होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष लाभकारी है, विशेष रूप से DSSSB, KVS, NVS, RPSC, UPPSC आदि संस्....

https://youtu.be/uNNKEoI7hGA
29/04/2022

https://youtu.be/uNNKEoI7hGA

RPSC ने स्कूल प्राध्यापक (School Lecturer/1st Grade) 2022 की विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है।

UP में 68500 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती निकली हुई है।आवेदन की अंतिम तिथि 05 फरवरी, 2018 है। विज्ञापन लिंक http://upbasic...
27/01/2018

UP में 68500 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती निकली हुई है।आवेदन की अंतिम तिथि 05 फरवरी, 2018 है।

विज्ञापन लिंकhttp://upbasiceduboard.gov.in/TETMANUAL/2018/VIGYAPTI.pdf

दिशा-निर्देशhttp://upbasiceduboard.gov.in/TETMANUAL/2018/MARGDARSHI_GENERAL_GUIDELINES.pdf

आवेदन हेतु साइट लिंक http://upbasiceduboard.gov.in/

16/01/2018

Plzzz read it very carefully

अभिषेक मनु सिंघवी का हाथ जैसे ही उस अर्द्धनग्न महिला के कमर के उपर पहुँचा , महिला ने बड़ी अदा व बड़े प्यार से पूछा - "जज कब बना रहे हो ? "..... बोलो ना डियर , जज कब बना रहे हो"...???

अब साहब ने जो भी उत्तर दिया था वह सारा का सारा सीन उस सेक्स-सीडी में रिकॉर्ड हो गया .....और यही सीडी कांग्रेस के उस बड़े नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी के राजनीतिक पतन का कारण बनी ! परन्तु बेशर्म सिंघवी आज भी कोर्टों में शान से पेश होता है और कांग्रेस का प्रवक्ता भी है और कहीं फिर कांग्रेस की सरकार बनी तो जज बनाना शुरू कर देगा।

पिछले 70 सालों से जजों की नियुक्ति में सेक्स , पैसा , ब्लैक मेल एवं दलाली के जरिए जजों को चुना जाता रहा है।

अजीब बिडम्बना है कि हर रोज दुसरों को सुधरने की नसीहत देने वाले लोकतंत्र के दोनों स्तम्भ मीडिया और न्यायपालिका खुद सुधरने को तैयार नही हैं।

जब देश आज़ाद हुआ तब जजों की नियुक्ति के लिए ब्रिटिश काल से चली आ रही " कोलेजियम प्रणाली " भारत सरकार ने अपनाई.... यानी सीनियर जज अपने से छोटे अदालतों के जजों की नियुक्ति करते है। इस कोलेजियम में जज और कुछ वरिष्ठ वकील भी शामिल होते है। जैसे सुप्रीमकोर्ट के जज हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति करते है और हाईकोर्ट के जज जिला अदालतों के जजों की नियुक्ति करते है ।

इस प्रणाली में कितना भ्रष्टाचार है वो लोगों ने अभिषेक मनु सिंघवी की सेक्स सीडी में देखा था... अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीमकोर्ट की कोलेजियम के सदस्य थे और उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के लिए जजों की नियुक्ति करने का अधिकार था... उस सेक्स सीडी में वो वरिष्ठ वकील अनुसुइया सालवान को जज बनाने का लालच देकर उसके साथ इलू इलू करते पाए गए थे , वो भी कोर्ट परिसर के ही अपने चैम्बर में।

कलेजियम सिस्टम से कैसे लोगो को जज बनाया जाता है और उसके द्वारा राजनीतिक साजिशें कैसे की जाती है उसके दो उदाहरण देखिये .......

पहला उदाहरण --
किसी भी राज्य के हाईकोर्ट में जज बनने की सिर्फ दो योग्यता होती है... वो भारत का नागरिक हो और 10 साल से किसी हाईकोर्ट में वकालत कर रहा हो .....या किसी राज्य का महाधिवक्ता हो ।

वीरभद्र सिंह जब हिमाचल में मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर अपनी बेटी अभिलाषा कुमारी को हिमाचल का महाधिवक्ता नियुक्त कर दिया फिर कुछ दिनों बाद सुप्रीमकोर्ट के जजों के कोलेजियम ने उन्हें हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति दे दी और उन्हें गुजरात हाईकोर्ट में जज बनाकर भेज दिया गया।

तब कांग्रेस , गुजरात दंगो के बहाने मोदी को फंसाना चाहती थी और अभिलाषा कुमारी ने जज की हैसियत से कई निर्णय मोदी के खिलाफ दिये ...हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उसे बदल दिया था।

दूसरा उदाहरण....
1990 में जब लालूप्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे तब कट्टरपंथी मुस्लिम आफ़ताब आलम को हाईकोर्ट का जज बनाया गया.... बाद में उन्हे प्रोमोशन देकर सुप्रीमकोर्ट का जज बनाया गया.... उनकी नरेंद्र मोदी से इतनी दुश्मनी थी कि तीस्ता शीतलवाड़ और मुकुल सिन्हा गुजरात के हर मामले को इनकी ही बेंच में अपील करते थे... इन्होने नरेद्र मोदी को फँसाने के लिए अपना एक मिशन बना लिया था।

बाद में आठ रिटायर जजों ने जस्टिस एम बी सोनी की अध्यक्षता में सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस से मिलकर आफ़ताब आलम को गुजरात दंगो के किसी भी मामलो की सुनवाई से दूर रखने की अपील की थी.... जस्टिस सोनी ने आफ़ताब आलम के दिए 12 फैसलों का डिटेल में अध्ययन करके उसे सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस को दिया था और साबित किया था कि आफ़ताब आलम चूँकि मुस्लिम है इसलिए उनके हर फैसले में भेदभाव स्पष्ट नजर आ रहा है।

फिर सुप्रीमकोर्ट ने जस्टिस आफ़ताब आलम को गुजरात दंगो से किसी भी केस की सुनवाई से दूर कर दिया।

जजों के चुनाव के लिए कोलेजियम प्रणाली के स्थान पर एक नई विशेष प्रणाली की जरूरत महसूस की जा रही थी। जब मोदी की सरकार आई तो तीन महीने बाद ही संविधान का संशोधन ( 99 वाँ संशोधन) करके एक कमीशन बनाया गया जिसका नाम दिया गया National Judicial Appointments Commission (NJAC)

इस कमीशन के तहत कुल छः लोग मिलकर जजों की नियुक्ति कर सकते थे।
A- इसमें एक सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश ,
B- सुप्रीम कोर्ट के दो सीनियर जज जो मुख्य न्यायाधीश से ठीक नीचे हों ,
C- भारत सरकार का कानून एवं न्याय मंत्री ,
D- और दो ऐसे चयनित व्यक्ति जिसे तीन लोग मिलकर चुनेंगे।( प्रधानमंत्री , मुख्य न्यायाधीश एवं लोकसभा में विपक्ष का नेता) ।

परंतु एक बड़ी बात तब हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने इस कमीशन को रद्द कर दिया , वैसे इसकी उम्मीद भी की जा रही थी।

इस वाकये को #न्यायपालिका एवं #संसद के बीच टकराव के रूप में देखा जाने लगा ....भारतीय लोकतंत्र पर सुप्रीम कोर्ट के कुठाराघात के रूप में इसे लिया गया।

यह कानून संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित किया गया था जिसे 20 राज्यों की विधानसभा ने भी अपनी मंजूरी दी थी।

सुप्रीम कोर्ट यह भूल गया थी कि जिस सरकार ने इस कानून को पारित करवाया है उसे देश की जनता ने पूर्ण बहुमत से चुना है।

सिर्फ चार जज बैठकर करोड़ों लोगों की इच्छाओं का दमन कैसे कर सकते हैं ?

क्या सुप्रीम कोर्ट इतना ताकतवर हो सकता है कि वह लोकतंत्र में #जनमानस की आकांक्षाओं पर पानी फेर सकता है ?

जब संविधान की खामियों को देश की जनता परिमार्जित कर सकती है तो न्यायपालिका की खामियों को क्यों नहीं कर सकती ?

यदि NJAC को सुप्रीम कोर्ट असंवैधानिक कह सकता है तो इससे ज्यादा असंवैधानिक तो कोलेजियम सिस्टम है जिसमें ना तो पारदर्शिता है और ना ही #ईमानदारी ?

#कांग्रेसी सरकारों को इस कोलेजियम से कोई दिक्कत नहीं रही क्योंकि उन्हें #पारदर्शिता की आवश्यकता थी ही नहीं।

मोदी सरकार ने एक कोशिश की थी परंतु सुप्रीम कोर्ट ने उस कमीशन को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

#शूचिता एवं #पारदर्शिता का दंभ भरने वाले सुप्रीम कोर्ट को तो यह करना चाहिए था कि इस नये कानून (NJAC) को कुछ समय तक चलने देना चाहिए था...ताकि इसके लाभ हानि का पता चलता , खामियाँ यदि होती तो उसे दूर किया जा सकता था ...परंतु ऐसा नहीं हुआ।

जज अपनी नियुक्ति खुद करे ऐसा विश्व में कहीं नहीं होता है सिवाय भारत के।

क्या कुछ सीनियर आॅफिसर मिलकर नये IAS की नियुक्ति कर सकते हैं?

क्या कुछ सीनियर प्रोफेसर मिलकर नये #प्रोफेसर की नियुक्ति कर सकते हैं ?

यदि नहीं तो जजों की नियुक्ति जजों द्वारा क्यों की जानी चाहिए ?

आज सुप्रीम कोर्ट एक धर्म विशेष का हिमायती बना हुआ है ...
सुप्रीम कोर्ट गौरक्षकों को बैन करता है ...सुप्रीम कोर्ट जल्लीकट्टू को बैन करता है ...सुप्रीम कोर्ट #दही_हांडी के खिलाफ निर्णय देता है ....सुप्रीम कोर्ट दस बजे रात के बाद #डांडिया बंद करवाता है .....सुप्रीम कोर्ट #दीपावली में देर रात पटाखे को बैन करता है।

लेकिन ..
सुप्रीम कोर्ट #आतंकियों की सुनवाई के लिए रात दो बजे अदालत खुलवाता है ....सुप्रीम कोर्ट #पत्थरबाजी को बैन नहीं करता है....सुप्रीम कोर्ट गोमांस खाने वालों पर बैन नहीं लगाता है ....ईद - बकरीद पर पर कुर्बानी को बैन नहीं करता है .....मुस्लिम महिलाओं के शोषण के खिलाफ तीन तलाक को बैन नहीं करता है।

और तो और सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि तीन #तलाक का मुद्दा यदि #मजहब का है तो वह हस्तक्षेप नहीं करेगा। ये क्या बात हुई ? #आधी_मुस्लिम_आबादी की जिंदगी नर्क बनी हुई है और आपको यह मुद्दा मजहबी दिखता है ? धिक्कार है आपके उपर ....।

अभिषेक मनु सिंघवी के वीडियो को सोशल मीडिया , यू ट्यूब से हटाने का आदेश देते हो कि न्यायपालिका की बदनामी ना हो ? ....पर क्यों ऐसा ? ...क्यों छुपाते हो अपनी कमजोरी ?

जस्टिस कर्णन जैसे पागल और टूच्चे जजों को नियुक्त करके एवं बाद में छः माह के लिए कैद की सजा सुनाने की सुप्रीम कोर्ट को आवश्यकता क्यों पड़नी चाहिए ?

#अभिषेक मनु सिंघवी जैसे अय्याशों को जजों की नियुक्ति का अधिकार क्यों मिलना चाहिए ?

क्या #सुप्रीम कोर्ट जवाब देगा ..?????

लोग अब तक सुप्रीम कोर्ट की इज्जत करते आए हैं , कहीं ऐसा ना हो कि जनता न्यायपालिका के विरुद्ध अपना उग्र रूप धारण कर लें उसके पहले उसे अपनी समझ दुरुस्त कर लेनी चाहिए। सत्तर सालों से चल रही दादागीरी अब बंद करनी पड़ेगी .. यह " #लोकतंत्र" है और "जनता" ही इसकी "मालिक" है।

02/11/2017
02/11/2017

November 1, 2017
स्कूलों में अब नर्सरी से 12वीं तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (टीचर्स एलिजबिलिटी टेस्ट) अनिवार्य होगा। अभी तक स्कूलों में एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए ही इसे अनिवार्य रखा गया था। एनसीटीई (नेशनल काउंसिल आफ टीचर्स एजुकेशन) ने टीईटी को अब स्कूलों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए जरूरी बताते हुए इसे नर्सरी से 12वीं तक शिक्षकों के लिए अनिवार्य बनाने की सिफारिश की है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी इसे लेकर रुचि दिखाई है।
एनसीटीई की इस पहल को शिक्षा में सुधार को लेकर जुटी सरकार के एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। एनसीटीई का मानना है कि टीईटी की अनिवार्यता से शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार होगा, साथ ही स्कूलों में योग्य शिक्षकों को पढ़ाने का मौका मिलेगा। अपनी सिफारिश में एनसीटीई ने मानव संसाधन विकास मंत्रलय से इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने को कहा है। मंत्रलय ने इस दिशा में तेजी से काम भी शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि मंत्रालय के स्तर से जल्द ही राज्यों से इसे अनिवार्य करने के लिए निर्देश जारी हो जाएंगे। स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी को लागू करने का फैसला एनसीटीई की पहल पर ही किया गया था। फिलहाल यह अनिवार्यता अभी सिर्फ सरकारी स्कूलों में ही लागू है।
हाल ही में सरकार ने शिक्षा में सुधार के तहत ही देश भर के स्कूलों में पढ़ा रहे अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना पर भी काम शुरू किया है। इसके तहत स्कूलों में पढ़ा रहे देश के सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को अगले दो वर्षो के भीतर प्रशिक्षित करने की लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक देश भर के करीब 15 लाख स्कूली शिक्षकों ने प्रशिक्षण के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

24/10/2017

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