25/07/2026
धूल, समय और उपेक्षा की मार से जब इतिहास की अमूल्य धरोहर धीरे-धीरे अपना स्वरूप खोने लगी, तब उसे पुनः जीवंत करने का एक प्रेरणादायी प्रयास किया गया।
श्री देव कुमार जैन ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट, आरा के संस्थापक राजर्षि बाबू देव कुमार जी जैन की दुर्लभ एवं ऐतिहासिक तस्वीर समय के प्रभाव से क्षतिग्रस्त होती जा रही थी। उनकी स्मृतियों और योगदान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इस चित्र को एक नया जीवन प्रदान किया गया।
पुरानी तस्वीर के आधार पर कुशल कलाकारों द्वारा इसका आकर्षक चित्रांकन (पेंटिंग) तैयार किया गया, जिससे न केवल मूल स्वरूप को संरक्षित किया जा सका, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को भी सजीव रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
यह केवल एक चित्र नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और विरासत के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
राजर्षि बाबू देव कुमार जी जैन द्वारा स्थापित संस्था आज भी भारतीय ज्ञान-परंपरा, प्राचीन पांडुलिपियों और शोध की अमूल्य धरोहर को संजोए हुए है। उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने की दिशा में यह प्रयास एक महत्वपूर्ण कदम है।
"जब तस्वीरें धुंधली होने लगती हैं, तब उन्हें नया रंग देकर इतिहास को फिर से जीवित किया जाता है।" ✨🙏🏻
Gyan Bharatam Mission D.K Jain Oriental Research Institute Ara Prashant Kumar Jain PMO India President of India Art, Culture and Youth Department, Government of Bihar Ministry of Culture, Government of India