16/09/2025
"गोण्डा की मिट्टी में ज़िन्दगी गुज़ार दी, किताबों में अपनी सोच छोड़ गए - मरहूम मास्टर इल्तिफ़ात अहमद साहब (इस्लाही/अलीग)"
ज़िला आज़मगढ़ के गाँव गोदाम गंगापुर की मिट्टी में पैदा हुए इल्तिफ़ात साहब ने इल्म को अपनी ज़िन्दगी का नक़्शा बनाया। मदरसतुल इस्लाह, आज़मगढ़ से तालीम की शुरुआत की, क्वीन्स कॉलेज, बनारस में आगे बढ़े, और फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई मुकम्मल की।
उस वक़्त मुल्क आज़ादी की जद्दोजहद से गुज़र रहा था और अलीगढ़ का माहौल लेफ़्ट के नारों से गूँजता था। उन नारों और यूनिवर्सिटी की फ़ज़ाओं ने इल्तिफ़ात साहब की शख़्सियत पर भी असर डाला।
अलीगढ़ से निकलने के बाद उनकी मंज़िल बनी गोण्डा। टाॅमसन इंटर कॉलेज में बतौर उस्ताद उनकी तैनाती हुई और यही शहर उनकी ज़िन्दगी का स्थायी मुक़ाम बन गया। गोण्डा ही में उन्होंने अपनी पूरी उम्र तालीम, तर्बियत और समाजी रहनुमाई में गुज़ारी। उनकी शख़्सियत पर मौलाना अबुल आला मौदूदी साहब का गहरा असर था। आख़िरी दम तक वो जमाअत से वाबस्ता रहे और दीन व समाज की ख़िदमत करते रहे।
इल्तिफ़ात साहब ने किताबें भी लिखीं और इंसानों के दिल भी। उनकी क़लम में गहराई थी, लेकिन उनके लफ़्ज़ सिर्फ़ किताबों तक महदूद नहीं थे बल्कि उनकी बातें उनकी शख़्सियत में नज़र आती थीं। उन्होंने अपनी ज़िन्दगी का बड़ा हिस्सा तहक़ीक़ और तहरीर में लगाया। उनके अफ़कार की झलक उनकी तस्नीफ़ात में साफ़ दिखाई देती है:
- क़ुरान मजीद – अंतिम ईश्वरग्रंथ
- हक़ की तलाश https://www.rekhta.org/ebooks/haq-ki-talash-iltifat-ahmad-ebooks
- मुसतक़बिल इस्लाम के लिए
- इम्तिहान के दो पर्चे
- दुनिया या आख़िरत
- हिंदुस्तान में इस्लाम का ग़लत तार्रुफ़
- धार्मिक आंदोलन
- दीन केवल इस्लाम
इन किताबों को पढ़कर आपको भी एहसास होगा कि इल्तिफ़ात साहब इंसानी सोच को जगाकर आगाह करने की कोशिश करते रहते थे। वो चाहते थे कि इंसान दीन को समझे भी और जीए भी। यही वजह है कि उनकी तहरीरें दीन की समझ के साथ साथ इंसानी समाज और ज़िन्दगी के मक़सद पर भी गहरी रौशनी डालती हैं।
वो सिर्फ़ एक उस्ताद नहीं थे, बल्कि सोचने और सिखाने वाले इंसान थे। इल्तिफ़ात साहब ने गोण्डा की मिट्टी में ज़िन्दगी गुज़ार दी, लेकिन आने वाली नस्लों के लिए अपनी सोच किताबों में छोड़ गए। उनकी किताबें हम सबके लिए अमानत हैं।
अल्लाह तआला उनकी कोशिशों को क़ुबूल करे, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में बुलंद मक़ाम अता करे।
आमीन।