10/10/2022
ब्रिटिश गुलामी से आजादी हासिल करने के बावजूद उत्तर भारत में दलित, पिछड़े, आधी आबादी एवं अकलियत की आवाम सांस्कृतिक- सामाजिक उपनिवेशिता की शिकार थी। निषेध, नियंत्रण, तिरस्कार और बहिष्कार की संस्कृति का दंश झेलने के लिए यह वर्ग अभिशप्त था। ऐसे परिवेश में मुलायम सिंह समाजवाद का परचम लेकर एक मुक्तिदाता की भांति अवतरित हुए जिन्होंने गांव,गरीब,किसान, दलित,पिछड़े, आधी आबादी ,अकलियत को सत्ता, संपत्ति में सहभागिता तथा प्रतिष्ठा दिलाई। नेताजी की साइकिल में प्रतिरोध का गतिविज्ञान सतत अंकुरित होता रहा जो आज एक वटवृक्ष की शक्ल ले चुका है।इस विशाल तरु की छाया में शोषित, पीड़ित, वंचित तबके को शीतलता मिल रही हैं।सामाजिक न्याय के इस मुक्तिदाता का जाना एक युग का अंत है।🙏🙏