St.Xavier's School

St.Xavier's School A School Situated in piprauli Belthra Road,
Ballia A senior secondary school founded by Mr. Jay Ram Mishra .

08/10/2017

जब आप से पढाई ना हो और मन नही लगे तो एक बार
इसे पढ़ लेना शायद पढाई होने लगे .............
आज मायूस है तू आज डरा हुआ है तू
आखिर क्या मायूस होना जीत है
क्या डर के खामोस बैठ जाना जीत है
अरे तू कभी ख़ुद्दार हुआ करता था
अरे तू कभी रातो पढ़ा करता था
फिर आज ये डर कैसा, ये मायूसी कैसी?
क्या भूल गया वो पल जब तूने घर से बैग उठाया था
क्या बोला था दोस्त को ,क्या बोला था जलने
वालो लोगो को
अरे उस वक्त को याद कर जब तू अलग था,
अरे वो वक्त याद कर जब तू ट्रेन में बैठा था,
अरे उस मुसाफिर को याद कर जिसे ias बनने की ट्रेन
में बोला था,
याद आ गये ना वो दिन जब सपनों को इज्जत माना
जाता था,
याद आ गये ना वो दिन जब दोस्त को पढाई के बहाने
ना बोला जाता था
याद कर वो दिन जब अकेले में किसी को कहा था
की ias बनूंगा,
क्यों चुप है अब, क्यों सोया है अब , अरे दो दिन में
पहाड़ नही उखड़ते
अरे अपनी आत्मा को जगा,, अपनी शक्ति को
पहचान,, मेरे दोस्त
तू ही एक है जो तेरे सपने पूरे कर पायेगा कोई और नही
याद कर उस मजदूर को जिसे रोटी नही मिलती,
याद कर उस बच्चे को जिसकी जिन्दगी प्लेटफार्म पर
पलती
अरे याद कर उस दिन को जब तेरी आँखों के सामने
अन्याय हुआ था,
याद कर वो दिन जिस दिन उस ऑफिस में तेरा काम
ना हुआ था,
याद कर जब कोई बाइक तेरे पास से ऐसे गुजारा मानो
अमीरी दिखा रहा है,
याद आया वो दिन जब बहन के साथ था और सोच
रहा था कब घर आयेगा
याद कर माँ की वो कहानी जिसके बाद माँ रोई थी
अरे क्या ये जुल्म नही और तू हिम्मत हारा तो कौन
खत्म करेगा इन्हें?
भूखे को रोटी कौन दिलाएगा? सडक पर पैदा हुऐ
बच्चे को कौन स्कूल दिखलायेगा,
अरे सब बदलना चाहता है न तू ,दुराचारियो से बदला
लेना चाहता हे ना तू
अरे अपने लिए नही अपने देश के लिए ही सही
अरे उस लडकी के लिए ही सही जो अच्छी लगती थी
पर नौकरी न होने से दिल में ही अच्छी लगती रही
अरे अपने घर को याद कर जिसका छप्पर अभी नही
बदला
अरे पिता को याद कर जो तेरे बारे में मोहल्ले भर में
बोला करते हैं
अरे माँ को याद कर ,माँ को कहता था न तू की तेरा
बेटा dm होगा
बहन को क्या बोला था की तेरी शादी जोरो से
करूंगा
बता क्या मायूस होना हल है,क्या चुप रहना हल है?
नहीं, तो फिर सोचता क्या है उठा किताब पढ़ डाल
इतिहास
पढ़ डाल राजनीती पढ़ डाल अर्थशास्त्र पढ डाल
भूगोल
पढ़ डाल पर्यावरण पढ़ डाल विज्ञान , करेंट की
चिंता मत कर
करेंट तू खुद बनायेगा कल तू भी कुछ होगा
अरे प्रतियोगिता दर्पण ,क्रोनिकल ,योजना
कुरुक्षेत्र ,विज्ञान प्रगति में तेरा फोटो होगा
कोई पढ़ेगा तेरे सपनों का भारत और उसमे ये होगा
गरीब को सहारा ,भूखे को रोटी ,लाचार को प्यार
पिता जी को सम्मान ,मॉ के आँचल की शक्ति ,बहन
की सुरक्षा
ऐसा होगा तेरा लिखा भारत ,जो जरूर छपेगा
अब कोई तुझे रोक नही सकता, तो उठा किताब और
दिखा दे
की तू सच्चा दोस्त है, भाई है ,बेटा है ,
देश भक्त है ,नेक इन्सान है ,दयावान है ।

🍁🍁All the best!!!
Future officers🌷

21/09/2017
26/07/2017

देखो बनारस,
मैं आना चाहता हूँ उन गलियों में भटकते हुए आवारा सा, न किसी को मैं पहचानु, और न मुझे कोई जाने। घाट पर बनी सीढ़ियों पर घण्टों बैठकर कुछ भी न सोचते हुए बहुत कुछ सोचना। माँ गंगा की दिव्य आरती जहाँ देवों देवियों के आवाहन के समय जैसे स्वर्गलोक का दृश्य प्रस्तुत होता है उसे अपने रोम रोम में महसूस करना चाहता हूँ।कभी कभी लगता है कि कोई दिव्य शक्ति मुझे चुम्बक की तरह खींच रही हो।वो सीटी कॉलेज के बड़े से प्रांगण में चहलकदमी करता हुआ मैं।
मैं जल्द ही आऊँगा, खुद को एक बार फिर से समझने के लिए, सारनाथ में बुद्ध को निकट महसूस करने के लिए।
#बनारस
@

21/07/2017
16/07/2017

सही-गलत के फंदे
जब गर्दन कसने लगते है
सोचों से लड़ते झगड़ते
जब हारने लगता हूँ
सारी हिकमते सारी तरकीबें
जब नेस्तनाबूद हो जाती है
बैठता हूँ, सर रखकर माँ की गोद मे
मैं भी कुछ नही कहता
माँ भी चुप रहती है
बिना किसी सवाल के
बिना किसी जिक्र के
कैसे क्या समझती है ... नही जानता
पर, बालों में फिरती उंगलियां
कांधे पर हथेली की छुअन
और बचपन की मेरी
हिम्मती यादों की बातें ... कुछ तो मुझसे कहती है
मेरे उठते ही जब माँ मेरी गाल थपथपा के कहती है "मेरा बेटा बब्बर शेर है तू"
मैं पहले से ज्यादा मजबूत हो जाता हूँ
मैं मेरी माँ का शेर हूँ .....😊🤘🏼

09/07/2017
06/07/2017

Shahar.
📔कहानी रफ़ कॉपी की📔............................................
👥जब हम पढ़ते थे तो हर subject की कॉपी अलग थी।
लेकिन एक ऐसी कॉपी📖 थी जो हर subject को संभालती थी।
उसे हम कहते थे "रफ़ कॉपी"📔
यूँ तो रफ़ कॉपी📔 का मतलब खुरदुरा होता है।
लेकिन ये हमारे लिए बहुत ही मुलायम थी..
क्योकि...
1) उसके कवर पर हमारा कोई पसंदीदा चित्र होता था।😛😛
2) उसके पहले पन्ने पर डिजाइन में लिखा हुआ हमारा नाम।😊😊
3) शानदार राइटिंग में लिखा हुआ पहला पेज।😁😁
4) बीच में लिखते तो हिंदी थे पर लगता था जैसे कई भाषाओं का मिश्रण हो।😜😜
5) अपना लिखा खुद नही समझ पाते थे।😂😂
रफ़ कॉपी📔 में हमारी बहुत सी यादें छुपी होती थी🙇🏻
वो अनकहा प्रेम...💑
वो अंजना सा गुस्सा ...😲
बेमतलब के दर्द...🙁
कुछ उदासी🙇🏻 छुपी होती थी...
हमारे रफ़ कॉपी📔 में कुछ ऐसे code words लिखते थे✍🏼
जो सिर्फ और सिर्फ हम ही समझ सकते थे😂😂
उसके आखिरी पन्नों पर वो राजा, मंत्री, चोर, सिपाही का स्कोर बोर्ड📋
वो दिल💞छू जाने वाली शायरी।
कुछ ऐसे नाम जिन्हें हम मिटने की सोच� भी नहीं सकते थे।
मतलब हमारे बैग🎒में कुछ हो न हो रफ़ कॉपी जरूर रहती थी।
लेकिन अब वो दिन काफी दूर चले गए😥
रफ़ कॉपी📔 हमसे दूर चली गयी😥
शायद पड़ी होगी घर🏠के किसी कोने में...
मेरी यादों को छुपाये हुए..🙁
सबकी नज़रों👀 से बचाये हुए..😥
न जाने कहाँ होंगे वो दोस्त👥
न जाने कहाँ होंगी वो यादें🙁
�सोचता हूँ...
जब चार दिन बचेंगे ज़िन्दगी के😓
तब खोलूंगा वो रफ़ कॉपी📔
"देखूंगा चश्मे👓 में छिपे आँखों से😰"
"पलटूंगा कपकपाती हाथों से😓"
"पढूंगा थरथराती होठों से🙁
क्योंकि अभी तो...
"जो 👀नज़रों-नज़रों👀 से होती थी, वो अल्फ़ाज़ अधूरी है"
"जो दोस्तों 👬 के साथ बिताए, वो याद अधूरी है"
"👲🏻बचपन में जैसे जीता था, वो अंदाज अधूरी है"
"अभी उस रफ़ कॉपी 📔में कई code words, कई सवाल हैं यारों..
जिनकी अभी हिसाब 📝 अधूरी है।"🙇🏻...........................................

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