06/08/2026
आज एक किराना दुकान से कुछ समान लिया।
दुकानदार से पूछा- "भैया, कितने पैसे हुए" ?
दुकानदार - "आपके 70 रुपए हुए"
मैंने उसे 100 रुपये का एक नोट दिया।
तो दुकानदार ने मुझे 70 रुपये काटकर बाकी पैसे लौटा दिए।
मैंने पैसे गिने, और दुकानदार से फिर पूछा..
"भैया, किस हिसाब से मुझे पैसे लौटाए हो" ?
तो भाईसाहब गिनाने लगे कि ये समान इतने का, ये इतने का ., देख लीजिए 70 रुपये हुए"
फिर मैंने कहा कि 70 का समान हुआ,
मैंने आपको 100 का नोट दिया..
औऱ आप मुझे 130 रुपए लौटाए है..
ये किस हिसाब से ?
दुकानदार भाई साहब के चेहरे का रंग उड़ गया..
वो आसपास खड़े ग्राहको का मुहँ देखने लगे, औऱ ग्राहक मुझे..
फिर हल्का मुस्कुराए और बोले - "भैया मुझे लगा कि आप 200 का नोट दिए है"
मैंने कहा - " इस तरह लापरवाही मत कीजिए। आज आपका फायदे की जगह नुकसान हो जाता"
दुकानदार - "बात तो आपकी सही है। क्या कहूँ , मुझसे ज्यादा भिड़ में ऐसा कई बार हो चुका है, बाद में कभी ध्यान आता है तो कुछ कर भी नही सकते।
लेकिन 4 साल की दुकानदारी में आप दूसरे ब्यक्ति है जो ज्यादा पैसा लौटा दिए है, वरना लोग जेब मे पैसा रखकर चल देते है।
उसकी यह बात सुनकर मैं अभी तक सोच में डूबा हु
कि-
आजकल लोगों की मानसिकता कितनी दूषित हो चुकी है। लोग 50 - 100 रुपये के लिए अपनी अंतरात्मा की आवाज को कुचल दे रहा है जो उन्हें बताती है कि ये गलत है..इसे मत करो..
लेकिन, लालच विवेक पर हावी हो जाता ,औऱ लोग गलत कर बैठते है..
जाते समय वो मुझे 10 रुपये वाला गुडडे बिस्किट देने लगा कि भैया ये मेरी तरफ से..
लेकिन मैंने लेने से मना कर दिया...
वो बोला भैया कुछ तो ले लीजिये, वरना अब मुझे बुरा लगेगा... आपको खाली हाथ तो नही जाने दूँगा। आपको कुछ तो लेना ही पड़ेगा..
उसका मन रखने के लिए मैंने सामने रखी टॉफी के डिब्बे से 1 टॉफी निकाली..
मैंने कहा - "अब खुश" ?
फिर उसके चेहरे पर प्रसन्नता का जो भाव उभरा, उसे यहाँ शब्दो में बाँधना संभव नही...