Bhagalpur National College

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Bhagalpur National College NAAC Accredited - A Constituent Unit of Tlika Manjhi Bhagalpur University, Bhagalpur (Bihar). The college is one of the premier constituent units of T.M.

Bhagalpur University. The college has a homogeneous sprawling campus stretching an area of about 5 acres. The river Ganga flows only one km away the North of the college. There are 35 teachers imparting teaching in fifteen subjects of the faculties of Arts. Science and Commerce. In addition a professional course (O.M.S.P) sponsored by the... U.G.C is run by the college. Teachers of the college in good number participate in seminars, workshops, conferences and the academic bodies. They publish research papers in national and international journals. There are more than 3000 students enrolled in different courses. It is a co-educational institution imparting teaching of boys and girls.See More
Teaching is done by different methods i.e. lecture method, demonstration method, audio-visual methods. Classroom teaching is given top most priority. Students devote maximum time in Practical & Project work. Learning is based on classroom teaching library and other experiences. Students learn so many things and develop their skills through various academic pursuits. The evaluation of both the teachers and students is monitored in order to maintain high standard of education.

01/10/2026
27/09/2026

Cultural Evening During Bihar Itihas parisad confrence

📚 भाषा, इतिहास और संस्कृति के गौरवपूर्ण संगम का साक्षी बना हमारा महाविद्यालय!Bhagalpur National College, Bhagalpur में ब...
27/09/2026

📚 भाषा, इतिहास और संस्कृति के गौरवपूर्ण संगम का साक्षी बना हमारा महाविद्यालय!

Bhagalpur National College, Bhagalpur में बिहार इतिहास परिषद के सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन को सफल बनाने में हमारे महाविद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी के सामूहिक प्रयास, सहयोग और समर्पण से यह आयोजन सफल एवं गरिमापूर्ण बन सका।

ऐसे शैक्षणिक एवं ऐतिहासिक विमर्श विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बिहार के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और विरासत को समझने तथा आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।

इस सफल आयोजन से जुड़े सभी अतिथियों, विद्वानों, प्रतिभागियों एवं महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद। 🙏

Bhagalpur National College, Bhagalpur — शिक्षा, इतिहास और संस्कृति के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध।

🙏📚

बिहार इतिहास परिषद् के गोल्डन जुबली अधिवेशन का भागलपुर नेशनल कॉलेज में भव्य शुभारम्भ
देशभर से इतिहासकार, शोधार्थी, शिक्षक एवं विद्यार्थी हुए शामिल
भागलपुर, 26 सितंबर 2026।

बिहार इतिहास परिषद् के गोल्डन जुबली (13वें) अधिवेशन का भव्य शुभारम्भ आज भागलपुर नेशनल कॉलेज, भागलपुर में हुआ। दिनांक 26 एवं 27 सितंबर, 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय ऐतिहासिक अधिवेशन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से इतिहासकार, शोधार्थी, शिक्षक एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके उपरांत कुलध्वजारोहण, कुलगीत एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। भागलपुर नेशनल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अनिरुद्ध कुमार ने आगंतुक विद्वानों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार इतिहास परिषद् का गोल्डन जुबली अधिवेशन भागलपुर में आयोजित होना महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय कुमार चौधरी के महाविद्यालय के विकास में योगदान को विशेष रूप से स्मरण किया तथा उनके कार्यक्रम में उपस्थित होने को हर्ष का विषय बताया। उन्होंने पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेकानंद सिंह के शैक्षणिक नेतृत्व एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय के विकास के प्रति उनके संकल्प का भी उल्लेख किया।
अधिवेशन की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) चारू गुप्ता ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने इतिहास और हिंदी साहित्य के पारस्परिक संबंध, विशेषकर इतिहास-लेखन में साहित्य की भूमिका तथा नारीवादी लेखन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्तर भारत के इतिहास को समझने में हिंदी साहित्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए इतिहास और साहित्य के अंतर्संबंधों पर विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राजेश वर्मा, माननीय सांसद, खगड़िया लोकसभा क्षेत्र ने बिहार की गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बिहार के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित राज्य की गौरवपूर्ण ऐतिहासिक परंपरा को स्मरण किया तथा इतिहास के साथ सामाजिक एवं आर्थिक जीवन के निरंतर संबंध पर अपने विचार रखे।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय कुमार चौधरी ने बिहार के इतिहास को गौरवपूर्ण विरासत बताते हुए बिहार इतिहास परिषद् के दीर्घकालीन शैक्षणिक एवं शोधपरक कार्यों की सराहना की।
पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया के कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेकानंद सिंह ने कहा कि इतिहास की दृष्टि से 50 वर्ष की अवधि महत्वपूर्ण होती है और इस दौरान समाज एवं ज्ञान के अनेक आयामों में परिवर्तन आता है। उन्होंने वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि AI को शिक्षण में उपयोगी साधन के रूप में अपनाया जाना चाहिए, लेकिन इसे शिक्षक का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए।
अधिवेशन के प्रमुख अकादमिक आकर्षणों में प्रो. राम शरण शर्मा मेमोरियल अभिभाषण तथा प्रो. सुमित सरकार मेमोरियल अभिभाषण शामिल रहे। प्रो. स्मिता सहगल, दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रो. राम शरण शर्मा के इतिहास-लेखन एवं उनके योगदान पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। वहीं प्रो. हितेंद्र पटेल, रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय ने प्रो. सुमित सरकार मेमोरियल अभिभाषण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर ‘Proceedings of Bihar Itihas Parishad’ का लोकार्पण किया गया। साथ ही अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी लोकार्पण हुआ, जिनमें प्रो. रामलखन शुक्ला स्मृति पुस्तक, डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी की ‘मुगल हरम’, प्रो. अशोक अंशुमान एवं अन्य की ‘चंपारण में नील संघर्ष के सिपाही’, डॉ. शम्मा अंजुम की ‘मुगलकालीन प्रभावशाली महिलाओं की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक स्थिति’ तथा डॉ. अंशुमान सुमन की ‘आधुनिक विश्व का इतिहास’ प्रमुख हैं। विभिन्न पुस्तकों का परिचय क्रमशः प्रो. रेणु कुमारी, डॉ. अंशुमान सुमन, प्रो. अमरेन्द्र कुमार ठाकुर, डॉ. कौसर तस्मिन एवं डॉ. राकेश कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में बिहार इतिहास परिषद् के सचिव प्रो. (डॉ.) दयानंद रॉय, कोषाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अमरकांत सिंह, संयुक्त सचिव प्रो. के. के. मंडल, संरक्षक प्रो. विशम्भर झा, सह-सचिव प्रो. रेणु कुमारी सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अनेक विद्वान उपस्थित रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो. (डॉ.) स्निग्धा सिंह, प्रो. (डॉ.) नीरजा सिंह एवं डॉ. पंकज कुमार झा, बाबा भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार अंशुमान सहित अनेक इतिहासकार एवं शोधार्थी अधिवेशन में सहभागी बने।
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रो. मनोज कुमार ने प्रभावी ढंग से किया। प्रथम सत्र के अंत में बिहार इतिहास परिषद् के सचिव प्रो. (डॉ.) दयानंद रॉय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया और बिहार गीत के साथ सत्र का समापन हुआ।
इस अवसर पर भागलपुर नेशनल कॉलेज के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी अधिवेशन को सफल बनाने में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के अकादमिक आयोजन से भागलपुर के शैक्षणिक एवं बौद्धिक वातावरण को विशेष ऊर्जा मिली है।
अधिवेशन का आयोजन 27 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा। प्रभागीय अकादमिक कार्यविधि आयोजित की जाएगी। इसके अंतर्गत प्राचीन भारतीय इतिहास (बिहार), मध्यकालीन भारतीय इतिहास (बिहार), आधुनिक भारतीय इतिहास (बिहार) तथा समकालीन भारतीय इतिहास (बिहार) से संबंधित अकादमिक सत्र आयोजित होंगे। आधुनिक भारतीय इतिहास का सत्र कॉन्फ्रेंस हॉल में तथा अन्य विभागीय अकादमिक सत्र निर्धारित कक्षों में संचालित किए जाएंगे।
बिहार इतिहास परिषद् का यह गोल्डन जुबली अधिवेशन बिहार के इतिहास, इतिहास-लेखन, शोध एवं उच्च शिक्षा के विभिन्न आयामों पर देशभर के विद्वानों के बीच संवाद और विमर्श का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हो रहा है ।

*भागलपुर, 27 सितंबर 2026।**

# # # बिहार इतिहास परिषद् के गोल्डन जुबली अधिवेशन का सफल समापन

# # # नई कार्यकारिणी का गठन, क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास लेखन पर हुआ व्यापक विमर्श

भागलपुर नेशनल कॉलेज, भागलपुर में दिनांक **26 एवं 27 सितंबर, 2026** को आयोजित **बिहार इतिहास परिषद् के गोल्डन जुबली अधिवेशन** का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय स्तर के अधिवेशन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए इतिहासकारों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। अधिवेशन के दौरान बिहार के इतिहास, इतिहास-लेखन, शोध की नई प्रवृत्तियों तथा क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास के विविध पक्षों पर व्यापक अकादमिक विमर्श हुआ।

दूसरे दिन **अकादमिक कार्यविधि** के अंतर्गत विभिन्न प्रभागों में बिहार के **प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक एवं समकालीन इतिहास** से जुड़े विषयों पर शोध-पत्र एवं अकादमिक विचार प्रस्तुत किए गए। इसके पश्चात **12:15 बजे से 1:30 बजे तक “क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास लेखन : समस्याएं एवं संभावनाएं”** विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। संगोष्ठी की अध्यक्षता **प्रो. हितेंद्र पटेल** ने की। इसमें **प्रो. अभय कुमार, डॉ. अंशुमान सुमन** सहित अन्य विद्वानों ने क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास के स्रोत, शोध-पद्धति, चुनौतियों तथा संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

# # # बिहार इतिहास परिषद् की नई कार्यकारिणी का गठन

अधिवेशन के दौरान बिहार इतिहास परिषद् की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। नई कार्यकारिणी में **संरक्षक प्रो. विशम्भर झा, दरभंगा** तथा **जनरल प्रेसिडेंट प्रो. दीपक कुमार, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली** बनाए गए।

**उपाध्यक्ष** के रूप में **प्रो. चारू गुप्ता, दिल्ली** तथा **प्रो. डॉ. ओ. पी. जायसवाल, पटना** को दायित्व दिया गया। **प्रो. (डॉ.) दयानन्द रॉय, भागलपुर** को सचिव तथा **प्रो. (डॉ.) अमरकांत सिंह, भागलपुर** को कोषाध्यक्ष बनाया गया। **प्रो. के. के. मंडल, भागलपुर** एवं **प्रो. रेणु कुमारी, मुजफ्फरपुर** को संयुक्त सचिव का दायित्व सौंपा गया।

विभिन्न प्रभागों के अध्यक्ष के रूप में **प्राचीन बिहार—प्रो. (डॉ.) दयानन्द रॉय, भागलपुर; मध्यकालीन बिहार—प्रो. मयंक, IGNOU, दिल्ली; आधुनिक बिहार—प्रो. संतोष कुमार रॉय, दिल्ली तथा समकालीन बिहार—प्रो. पुष्पा कुमारी, मुजफ्फरपुर** को दायित्व दिया गया।

नई कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में **प्रो. हितेंद्र पटेल, कोलकाता; डॉ. पंकज कुमार झा, बनारस; प्रो. अमरेन्द्र कुमार ठाकुर, शिलांग; प्रो. अनिल कुमार, पटना; प्रो. कृष्णा कन्हैया, छपरा; प्रो. नागेन्द्र शर्मा, दिल्ली; डॉ. राजेश कुमार, मुजफ्फरपुर; डॉ. इनायतुल्ला खां, कोलकाता; डॉ. जवाहर लाल वर्मा, बक्सर; प्रो. अशोक अंशुमन, पटना; डॉ. रविशंकर कुमार चौधरी, भागलपुर; डॉ. अंशुमन सुमन, भागलपुर; डॉ. जीतेन्द्र कुमार, बेगूसराय; डॉ. अशोक कुमार, पटना; डॉ. कौशर तहशीन, जमशेदपुर तथा डॉ. अमृता कुमारी, हाजीपुर** को शामिल किया गया।

# # # आयोजन की सफलता के लिए महाविद्यालय परिवार का आभार

समापन अवसर पर **मंच संचालन डॉ. शैलेश आनंद** ने किया। आयोजन की सफलता में भागलपुर नेशनल कॉलेज के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से **श्री पिंकू कुमार, डॉ. एम. मोशर्रफ हुसैन एवं श्री आशुतोष कुमार सिंह** सहित इतिहास विषय के शिक्षकों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के अथक प्रयासों की सराहना की गई।

**आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) दयानन्द रॉय** ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में बिहार इतिहास परिषद् के सभी सदस्यों, भागलपुर नेशनल कॉलेज के प्रधानाचार्य, सभी शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतिहासकारों का यह सम्मेलन प्रत्येक वर्ष अकादमिक सफलता की नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहा है और गोल्डन जुबली अधिवेशन का सफल आयोजन परिषद् की दीर्घ शैक्षणिक परंपरा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

उन्होंने **भागलपुर नेशनल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अनिरुद्ध कुमार** के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीमित समय में इतने व्यापक स्तर के राष्ट्रीय आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। अधिवेशन में उपस्थित बिहार इतिहास परिषद् के सदस्यों एवं विद्वानों ने भी प्रधानाचार्य डॉ. अनिरुद्ध कुमार तथा पूरे महाविद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रधानाचार्य **डॉ. अनिरुद्ध कुमार** ने अधिवेशन की सफलता पर बिहार इतिहास परिषद् के पदाधिकारियों, देशभर से आए इतिहासकारों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों तथा महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भागलपुर नेशनल कॉलेज में इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के अकादमिक आयोजन से विद्यार्थियों एवं युवा शोधार्थियों को देश के प्रतिष्ठित इतिहासकारों से संवाद एवं सीखने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ है।

दो दिनों तक चले इस गोल्डन जुबली अधिवेशन ने **बिहार के इतिहास और इतिहास-लेखन की समृद्ध परंपरा के साथ-साथ स्थानीय एवं क्षेत्रीय इतिहास के अध्ययन की आवश्यकता** को रेखांकित किया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए इतिहासकारों एवं शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी के साथ अधिवेशन का सफल समापन हुआ।

Sem 4 ncc/nss (AEC) Mid Term Exam
20/09/2026

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11/09/2026

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