Arihant academy

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02/05/2019

New batch started from 7the may for class 9th and 10th cbse and rbse
contact-: 9667947157
7014392907

15/11/2018

New batches started for class 9th RBSE from 20th november
Contact :-9667947157

22/06/2018

New batches start from 28/6/18 for class 6 to 10th
Contact -:9667947157

10/04/2018

New batch will start on 3rd june for class 9th and 10th for more information contact -: 9667947157

21/07/2017

Students motivation
बात बहुत समय पहले की हैं। एक किसान को अपनी बुरी आर्थिक स्थिति से हार मानकर गांव के ही एक साहूकार से क़र्ज लेना पड़ा, लेकिन काफी वक्त बीत जाने पर भी वह साहूकार का ऋर्ण नहीं चुका पाया। गाँव का वह साहूकार बुढ़ा और देखने में बदसूरत था। उसके अनुचित स्वभाव के कारण गांव में उसे कोई पसंद नहीं करता था।

किसान के परिवार में उसके और उसकी एक बेटी के सिवा और कोई नहीं था। उसकी लड़की बहुत ही सुन्दर और अच्छे स्वभाव की थी। किसान ने उसे बड़े ही लाड़-प्यार से पाला था। वह अपने पिता के साथ ही खेतों में काम करती। पर एक दिन उस बूढ़े साहूकार की नज़र उसकी खुबसूरत लड़की पर पड़ी और वह उस पर मोहित हो गया। वह मन ही मन उससे विवाह करने की सोचने लगा।

लेकिन उसे पता था कि किसान अपनी लड़की का विवाह उससे कभी नहीं करेगा और उसे यह भी मालूम था कि किसान इस समय ऐसी स्थिति में नहीं है कि उसका क़र्ज चुकता कर सके। इन सारी बातों को मन में रख वह स्वयं ही एक दिन किसान के खेत की ओर जाने वाले रास्ते पर जा पहुंचा, रास्ता छोटे-छोटे कंकड़-पत्थरों और रोड़ियों से भरा पड़ा था। वह किसान और उसकी बेटी दोनो वही पर थे। उसने किसान से क़र्ज के विषय में बात करते हुए उसके सामने एक शर्त रखी। शर्त यह थी कि - 'अगर उसने अपनी लड़की का विवाह उससे कर दिया, तो वह उसके सारे ऋण माफ़ कर देगा वो भी ब्याज़ सहित।' साहूकार की इस अजीबों-गरीब शर्त से किसान और उसकी बेटी भयभीत हो गये।



उस धूर्त साहूकार ने आगे सुझाव देते हुए दोनों से कहा कि चिंता करने की कोई बात नहीं। इस शर्त का फैसला न मैं करूंगा न आप। इसे आप अपने भाग्य पर छोड़ दे। इतना कहते हुए उसने अपनी ज़ेब से एक पैसे की खाली पोटली निकाली और उसे दिखात हुए कहा कि मैं इसमें एक काले रंग का और एक सफ़ेद रंग का कंकड़ रखूंगा। उसके बाद तुम्हारी लड़की को बिना देखे इस पोटली से एक कंकड़ निकालना होगा और यहाँ शर्त यह रहेगी कि -

अगर उसने काले रंग के कंकड़ को निकाला तब उसे मुझसे विवाह करना होगा और तुम्हारे क़र्ज भी माफ़ कर दिये जाएंगे।

अगर तुम्हारी लड़की ने सफ़ेद रंग के कंकड़ को निकाला तो इसे मुझसे विवाह नहीं करना होगा और फिर भी क़र्ज माफ़ कर दिये जाएंगे।

लेकिन अगर इसने कंकड़ निकालने से मना कर दिया तो फिर तुम्हें जेल के सलाखों के पीछे जाना होगा।

जैसे ही किसान और उसकी लड़की उसकी इस शर्त पर आपस में बात करने लगे, तभी साहूकार अचानक कंकड़ों को उठाने के लिए नीचे झुका। उसने जैसे ही दो कंकड़ों को उठाया उसी समय किसान की लड़की कि नज़र उस पर पड़ गई। उसने देखा कि साहूकार ने दो काले कंकड़ ही पोटली में रख दिये। जबकि नियम के अनुसार होना यह चाहिए था कि वह एक काले रंग का और दूसरा सफ़ेद रंग का कंकड़ खाली पोटली में रखता। खैर, उसके बाद साहूकार ने लड़की को पोटली से एक कंकड़ निकालने के लिए कहा।

दोस्तों, अब आप कुछ देर के लिए ऐसा महसूस करें कि उस लड़की कि जगह आप उस कंकड़-पत्थर वाले रास्ते पर खड़े है। उस परिस्थिति में आप अगर एक लड़की होते तोे क्या करते? अगर आपको उस लड़की को कुछ सुझाव देना होता तो क्या देते?

मुझे लगता है कि अगर हम इस पर ध्यानपूर्वक विचार करे तो हमारे सामने तीन संभावनाएं निकलकर आती हैं-

पहली बात यह हो सकती है कि, लड़की को कंकड़ निकालने से बिल्कुल मना कर देना चाहिए।

दूसरी बात यह हो सकती है कि, लड़की को थोड़ा साहस दिखाते हुए यह बता देना चाहिए कि उस पोटली में दोनों कंकड काले ही हैं जिससे साहूकार की धूर्तता की पोल खुल जाती।

या तीसरा विकल्प यह हो सकता है कि, लड़की साहूकार की धूर्तता के बारे में जानते हुए भी काले रंग के कंकड़ को निकाले और अपने आप को sacrifice कर दे, ताकि उसके पिता ऋण से मुक्त हो जेल जाने से बच जाए।
यह कहानी इस उम्मीद से लिखी गई हैं कि हम पारंपरिक सोच के ढ़ंग (traditional logical thinking) और आज की logical thinking में अंतर बता सके। उस लड़की कि इस दुविधा को हम traditional logical thinking से solve नहीं कर सकते।

तो चलिए हम ही बता देते हैं कि आगे उस लड़की ने क्या किया।

किसान की लड़की ने साहूकार के कहे अनुसार ही पोटली से एक कंकड़ निकाला और उसे बिना देखे हुए, जानबुझकर कंकड़-पत्थरों से भरे रास्ते पर धिरे से उछाल दिया। जिससे जल्द ही वह काले रंग का कंकड़ भी अन्य कंकडों में मिल गया।

उसके बाद उस लड़की ने झूठा खेद व्यक्त करते हुए कहा - 'ओ, मैं कितनी लापरवाह हूं!'

साहूकार इस बात ले लड़की पर थोड़ा क्रोधित हुआ लेकिन फिर उस लड़की ने मामला संभालते हुए आगे कहा कि चिंता न करे, अगर आप पोटली खोलकर देखें कि उसमें कौन से रंग का कंकड़ बचा हुआ है तो यह साफ हो जाएगा कि मैंने कौन सा कंकड़ निकाला था, काला या सफ़ेद ?

हालांकि, यह तो निश्चित था की बचा हुआ कंकड़ काले रंग का ही होगा। क्योंकि जैसा कि आप जानते ही है साहूकार ने पोटली में दोनों ही कंकड़ काले ही रखे थे। तो इस प्रकार यह सिद्ध हो गया कि लड़की ने सफ़ेद कंकड़ निकाला है। अब साहूकार चाह कर भी अपनी बेईमानी और धूर्तता को प्रकट नहीं कर सकता था। इस तरह उस लड़की ने बड़ी चालाकी से अपने विरूद्ध खड़ी परिस्थिति को अपने पक्ष में कर लिया।

तो, इस कहानी से आपने क्या सीखा? So, What is the moral of this story?

दोस्तों, इस कहानी से हम आपको यह बताना चाहते थे कि, समस्या चाहे कितनी भी जटिल क्यों न हो, हम उसके बारे में सोचने और उसे सुलझाने के तरीकों को बदलकर उसका सामाधान आसानी से निकाल सकते है।

04/04/2017

New batch will start on 3rd june for class 9th and 10th for more information contact -: 7014392907

BEST OF LUCK 10TH STUDENTSRAJASTHAN BOARD WILL DECALRE RESULT ON 10 JUNE 2015 CHECK YOUR RESULT HEREwww.rajeduboard.nic....
07/06/2015

BEST OF LUCK 10TH STUDENTS
RAJASTHAN BOARD WILL DECALRE RESULT ON 10 JUNE 2015
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29/05/2015

NEW BATCHES START FOR CLASS 9TH AND 10TH FROM 1ST JUNE 2015
FOR MORE DETAILS PLZ CONTACT
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26/01/2015

गणतंत्र दिवस विशेष
ND
भारत की आजादी 15 अगस्त 1947 के
बाद कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान
को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी 26 नवंबर
1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया। तब से 26
जनवरी को हम गणतंत्र दिवस मनाते आ रहे हैं।
इस बार हम 66वाँ गणतंत्र दिवस मनाएँगे।
भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे
हैं और इस दौरान लोगों में लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति असंतोष
भी व्याप्त होता गया। असंतोष का कारण भ्रष्ट शासन
और प्रशासन तथा राजनीति का अपराधिकरण रहा। भारत
में बहुत से ऐसे व्यक्ति और संगठन हैं जो भारतीय
संविधान के प्रति श्रद्धा नहीं रखते।
व्यर्थ है असंतोष : इस अश्रद्धा का कारण हमारा संविधान
नहीं है। माओवादी जैसे पूर्वोत्तर के
अन्य संगठन आज भी यदि सक्रिय है तो कारण सिर्फ
इतना है कि भ्रष्ट गैर जिम्मेदार राजनीतिज्ञों और
अपराधियों के चलते उनका लोकतंत्र से विश्वास उठ गया। लेकिन
समझने वाली बात यह है कि लादी गई
व्यस्था और तानाशाह कभी दुनिया में ज्यादा समय तक
नहीं चल पाया। माना कि लोकतंत्र की कई
खामियाँ होती है, लेकिन
तानाशाही या धार्मिक कानून
की व्यवस्था व्यक्ति स्वतंत्रता का अधिकार
छीन लेती है, यह हमने देखा है।
जर्मन और अफगानिस्तान में क्या हुआ सभी जानते
हैं। सोवियत संघ क्यों बिखर गया यह भी कहने
की बात नहीं है। भविष्य में देखेंगे आप
चीन को बिखरते हुए।
ND
लोकतंत्र को परिपक्व होने दें : हमें विश्व के सबसे बड़े
लोकतांत्रिक देश होने का गर्व है। हमारा लोकतंत्र
धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है। हम
पहले से कहीं ज्यादा समझदार होते जा रहे हैं।
धीरे-धीरे हमें लोकतंत्र
की अहमियत समझ में आने लगी है।
सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही व्यक्ति खुलकर
जी सकता है। स्वयं के व्यक्तित्व का विकास कर
सकता है और
अपनी सभी महत्वाकांक्षाएँ
पूरी कर सकता है। जो लोग यह सोचते हैं कि इस देश
में तानाशाही होना या कट्टर धार्मिक नियम होने चाहिए
वे यह नहीं जानते कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में
क्या हुआ। वहाँ की जनता अब खुलकर
जीने के लिए तरस रही है। ये सिर्फ नाम
मात्र के देश हैं।
लोकतंत्र बनेगा गुणतंत्र : हमारा समाज परिवर्तित हो रहा है।
मीडिया जाग्रत हो रही है।
जनता भी जाग रही है। युवा सोच
का विकास हो रहा है। शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है।
टेक्नोलॉजी संबंधी लोगों की फौज
बढ़ रही है। इस सबके चलते अब देश
का राजनीतिज्ञ भी सतर्क हो गया है।
ज्यादा समय तक शासन और प्रशासन में भ्रष्टाचार, अपराध और
अयोग्यता नहीं चल पाएगी तो हमारे
भविष्य का गणतंत्र गुणतंत्र पर आधारित होगा,
इसीलिए कहो....गणतंत्र की जय हो।

01/01/2015

May each day of the coming year Be vibrant and
new bringing along Many reasons for celebrations
& rejoices. Happy New Year!

31/12/2014

Address

Near Kumbha Circle Azad Nagar
Bhilwara
311001

Telephone

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