AtulinspireBharat

AtulinspireBharat HOD, Assistant professor
Govt. College Sahrai Dist.Ashoknagar
Madhya Pradesh

विदेशी धरती से इतिहास लौट आया: नीदरलैंड्स ने भारत को सौंपी 1000 साल पुरानी चोल धरोहर......सदियों तक विदेशी संग्रहालयों औ...
17/05/2026

विदेशी धरती से इतिहास लौट आया: नीदरलैंड्स ने भारत को सौंपी 1000 साल पुरानी चोल धरोहर......
सदियों तक विदेशी संग्रहालयों और औपनिवेशिक कब्जों में कैद रहीं भारत की ऐतिहासिक धरोहरें अब धीरे-धीरे स्वदेश लौट रही हैं। इसी कड़ी में नीदरलैंड्स ने औपचारिक रूप से भारत को चोल काल की दुर्लभ “अनैमंगलम ताम्रपत्र” धरोहर वापस सौंप दी। लगभग एक हजार वर्ष पुराने ये ताम्रपत्र भारत के समुद्री वैभव, सांस्कृतिक प्रभाव, धार्मिक सह-अस्तित्व और वैश्विक संपर्कों की जीवित गवाही माने जाते हैं।
दरअसल, यह ऐतिहासिक वापसी नरेंद्र मोदी की पांच देशों की विदेश यात्रा के दौरान हुई और इसे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। नीदरलैंड में “लीडेन प्लेट्स” के नाम से प्रसिद्ध ये ताम्रपत्र पिछले एक शताब्दी से अधिक समय तक लीडेन यूनिवर्सिटी में सुरक्षित रखे गए थे। वर्षों की राजनयिक बातचीत और सांस्कृतिक दावेदारी के बाद आखिरकार यह अमूल्य विरासत भारत लौट आई।इतिहासकार इन ताम्रपत्रों को चोल शासन के सबसे महत्वपूर्ण अभिलेखों मे गिनते हैं। ये शिलालेख 985 से 1014 ईस्वी के बीच महान चोल सम्राट राजराज चोल प्रथम के शासनकाल से जुड़े हुए हैं।
इन अभिलेखों में नागापट्टिनम स्थित “चूड़ामणि विहार” नामक एक बौद्ध मठ को दी गई भूमि, कर राजस्व और दान का उल्लेख मिलता है। इस विहार का निर्माण दक्षिण-पूर्व एशिया के शक्तिशाली श्रीविजय साम्राज्य के शासक श्री मार विजयोतुंग वर्मन ने करवाया था। यही तथ्य इन ताम्रपत्रों को और भी विशेष बनाता है, क्योंकि ये दिखाते हैं कि एक हिंदू चोल सम्राट ने बौद्ध संस्थानों को संरक्षण दिया। पुरातात्‍विक विशेषज्ञ इसे उस दौर के धार्मिक सह-अस्तित्व और उदार शासन व्यवस्था का अद्भुत उदाहरण मानते हैं। https://x.com/narendramodi/status/2055673174986240110?s=20

12/05/2026
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01/05/2026

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जीवन निर्धारण नहीं सीखने की ओर अग्रसर करती है परीक्षा उच्च शिक्षा मंत्री Inder Singh Parmar ने विद्यार्थियों से परीक्षा ...
25/03/2026

जीवन निर्धारण नहीं सीखने की ओर अग्रसर करती है परीक्षा

उच्च शिक्षा मंत्री Inder Singh Parmar ने विद्यार्थियों से परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन को लेकर किया संवाद

यदि नेतृत्व सही हाथों में हो तो,उसका लाभ समाज की कई पीढ़ियों को मिलता है। और नेतृत्व या पद अयोग्य लोगों के हाथ में हो तो...
15/03/2026

यदि नेतृत्व सही हाथों में हो तो,उसका लाभ समाज की कई पीढ़ियों को मिलता है। और नेतृत्व या पद अयोग्य लोगों के हाथ में हो तो समाज की पीढ़ियों तक खत्म हो जाती है। गुजरात के इस नानी भटलाव गांव के इस नेतृत्व को सलाम तो बनता है। सभी को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं

करे सज़दा वतन को जो वही ईमान हो जाऊं।मैं भारत वन्दना की इक सुरीली तान हो जाऊं।अगर सिमटूँ तो ढल जाऊँ वतन की धूल के कण में।...
26/01/2026

करे सज़दा वतन को जो वही ईमान हो जाऊं।
मैं भारत वन्दना की इक सुरीली तान हो जाऊं।
अगर सिमटूँ तो ढल जाऊँ वतन की धूल के कण में।
अगर फैलूँ तो यूं फैलूँ कि हिंदुस्तान हो जाऊं
वंदेमातरम, भारत माता की जय

खरगोन जिले के गोगावां निवासी श्री जगदीश जोशीला जी को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से...
21/01/2026

खरगोन जिले के गोगावां निवासी श्री जगदीश जोशीला जी को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से विभूषित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
निमाड़ी साहित्य के पुरोधा के रूप में विख्यात श्री जोशीला जी ने हिंदी और निमाड़ी भाषा में कुल 56 पुस्तकें लिखी हैं।

11/01/2026

स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा चंदेरी में औद्योगिक भ्रमण एवं एक्सपोजर विजिट सम्पन्न । शासकीय महाविद्यालय, सहराई के स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को दृष्टिगत रखते हुए चंदेरी में एक दिवसीय औद्योगिक भ्रमण एवं एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया।

महादेव 🔱
04/12/2025

महादेव 🔱

मैं  #नर्मदा हूं...!! 🙏जब  #गंगा नहीं थी, तब भी मैं थी। जब  #हिमालय नहीं था, तभी भी मै थी। मेरे किनारों पर  #नागर_सभ्यता...
25/11/2025

मैं #नर्मदा हूं...!! 🙏
जब #गंगा नहीं थी, तब भी मैं थी।
जब #हिमालय नहीं था, तभी भी मै थी।

मेरे किनारों पर #नागर_सभ्यता का विकास नहीं हुआ। मेरे दोनों किनारों पर तो #दंडकारण्य के घने जंगलों की भरमार थी। उन दिनों मेरे तट पर #उत्तरापथ समाप्त होता था और #दक्षिणापथ शुरू होता था।

मेरे तट पर मोहनजोदड़ो जैसी नागर संस्कृति नहीं रही, लेकिन एक आरण्यक संस्कृति अवश्य रही। मेरे तटवर्ती वनों मे #मार्कंडेय, #कपिल, #भृगु , #जमदग्नि आदि अनेक ऋषियों के आश्रम रहे। यहाँ की यज्ञवेदियों का धुआँ आकाश में मंडराता था। ऋषियों का कहना था कि तपस्या तो बस नर्मदा तट पर ही करनी चाहिए।

इन्हीं ऋषियों में से एक ने मेरा नाम रखा, " #रेवा "। रेव् यानी कूदना। उन्होंने मुझे चट्टानों में कूदते फांदते देखा तो मेरा नाम "रेवा" रखा।

एक अन्य ऋषि ने मेरा नाम "नर्मदा " रखा ।"नर्म" यानी आनंद । आनंद देनेवाली नदी।

मैं भारत की सात प्रमुख नदियों में से हूं । गंगा के बाद मेरा ही महत्व है। पुराणों में जितना मुझ पर लिखा गया है उतना और किसी नदी पर नहीं। स्कंदपुराण का "रेवाखंड " तो पूरा का पूरा मुझको ही अर्पित है।

" #पुराण कहते हैं कि जो पुण्य , गंगा में स्नान करने से मिलता है, वह मेरे दर्शन मात्र से मिल जाता है।"

मेरा जन्म अमरकंटक में हुआ । मैं पश्चिम की ओर बहती हूं। मेरा प्रवाह आधार चट्टानी भूमि है। जीवन में मैंने सदा कड़ा संघर्ष किया।

मैं एक हूं ,पर मेरे रुप अनेक हैं । मूसलाधार वृष्टि पर उफन पड़ती हूं ,तो गर्मियों में बस मेरी सांस भर चलती रहती है। मैं प्रपात बाहुल्या नदी हूं । #कपिलधारा , #दूधधारा , #धावड़ीकुंड, #सहस्त्रधारा मेरे मुख्य प्रपात हैं ।

#ओंकारेश्वर मेरे तट का प्रमुख तीर्थ है। #महेश्वर ही प्राचीन माहिष्मती है। वहाँ के घाट देश के सर्वोत्तम घाटों में से है। मैं स्वयं को #भरूच ( #भृगुकच्छ) में ागर को समर्पित करती हूँ ‌।

मुझे याद आया।

#अमरकंटक में मैंने कैसी मामूली सी शुरुआत की थी। वहां तो एक बच्चा भी मुझे लांघ जाया करता था पर यहां मेरा पाट 20 किलोमीटर चौड़ा है । यह तय करना कठिन है कि कहां मेरा अंत है और कहां समुद्र का आरंभ? पर आज मेरा स्वरुप बदल रहा है। मेरे तटवर्ती प्रदेश बदल गए हैं मुझ पर कई बांध बांधे जा रहे हैं। मुझ पर बने बांध इनकी आवश्यकताओं को पूरा करेंगें। अब धरती की प्यास बुझेगी । मैं धरती को सुजला सुफला बनाऊंगी। यह कार्य मुझे एक आंतरिक संतोष देता है।
त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदे...
नर्मदे सर्वदे
{अमृतस्य नर्मदा}
🙏🙏🙏

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