17/05/2026
विदेशी धरती से इतिहास लौट आया: नीदरलैंड्स ने भारत को सौंपी 1000 साल पुरानी चोल धरोहर......
सदियों तक विदेशी संग्रहालयों और औपनिवेशिक कब्जों में कैद रहीं भारत की ऐतिहासिक धरोहरें अब धीरे-धीरे स्वदेश लौट रही हैं। इसी कड़ी में नीदरलैंड्स ने औपचारिक रूप से भारत को चोल काल की दुर्लभ “अनैमंगलम ताम्रपत्र” धरोहर वापस सौंप दी। लगभग एक हजार वर्ष पुराने ये ताम्रपत्र भारत के समुद्री वैभव, सांस्कृतिक प्रभाव, धार्मिक सह-अस्तित्व और वैश्विक संपर्कों की जीवित गवाही माने जाते हैं।
दरअसल, यह ऐतिहासिक वापसी नरेंद्र मोदी की पांच देशों की विदेश यात्रा के दौरान हुई और इसे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। नीदरलैंड में “लीडेन प्लेट्स” के नाम से प्रसिद्ध ये ताम्रपत्र पिछले एक शताब्दी से अधिक समय तक लीडेन यूनिवर्सिटी में सुरक्षित रखे गए थे। वर्षों की राजनयिक बातचीत और सांस्कृतिक दावेदारी के बाद आखिरकार यह अमूल्य विरासत भारत लौट आई।इतिहासकार इन ताम्रपत्रों को चोल शासन के सबसे महत्वपूर्ण अभिलेखों मे गिनते हैं। ये शिलालेख 985 से 1014 ईस्वी के बीच महान चोल सम्राट राजराज चोल प्रथम के शासनकाल से जुड़े हुए हैं।
इन अभिलेखों में नागापट्टिनम स्थित “चूड़ामणि विहार” नामक एक बौद्ध मठ को दी गई भूमि, कर राजस्व और दान का उल्लेख मिलता है। इस विहार का निर्माण दक्षिण-पूर्व एशिया के शक्तिशाली श्रीविजय साम्राज्य के शासक श्री मार विजयोतुंग वर्मन ने करवाया था। यही तथ्य इन ताम्रपत्रों को और भी विशेष बनाता है, क्योंकि ये दिखाते हैं कि एक हिंदू चोल सम्राट ने बौद्ध संस्थानों को संरक्षण दिया। पुरातात्विक विशेषज्ञ इसे उस दौर के धार्मिक सह-अस्तित्व और उदार शासन व्यवस्था का अद्भुत उदाहरण मानते हैं। https://x.com/narendramodi/status/2055673174986240110?s=20