01/05/2026
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर में “वास्तुशास्त्र की उपयोगिता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी का उद्देश्य वर्तमान जीवन में वास्तुशास्त्र के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर विद्वानों के विचारों का आदान-प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः मंगलाचरण के साथ छात्रों द्वारा किया गया, जिससे वातावरण अत्यंत पावन एवं आध्यात्मिक हो उठा। इसके पश्चात कुलगीत एवं राष्ट्रगीत का गायन हुआ, जिसने उपस्थित सभी को उत्साह एवं राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत कर दिया।
मंच संचालक महोदय ने अतिथियों का स्वागत प्रस्तुत किया गया, प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि डॉ. शुभम शर्मा ने अपने उद्बोधन में वास्तुशास्त्र के वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक पक्षों को विस्तार से समझाया तथा इसके व्यावहारिक महत्व को रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. श्रीगोविन्द पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में वास्तुशास्त्र के ऐतिहासिक विकास एवं उसके आधुनिक संदर्भों पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. हंसधर झा द्वारा की गई, जिन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विषय की सार्थकता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इससे लाभ उठाने हेतु प्रेरित कियाऔर व्याकरण विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो.सुबोध कुमार शर्मा महोदय और डॉ .गोविंद सरकार, डॉ .गोकुलानन्द तिवारी (शिक्षा शास्त्र विभाग)की भी गरिमामयी उपस्थिति रही ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अश्विनी पाण्डेय द्वारा अत्यंत कुशलता एवं प्रभावी ढंग से किया गया, जिससे कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित हुआ। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ब्रह्मानन्द मिश्र द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार यह संगोष्ठी ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रही, जिसने सभी प्रतिभागियों को वास्तुशास्त्र के महत्व एवं उपयोगिता के प्रति जागरूक किया।
इस कार्यक्रम में एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम ( ITEP ) के अंतर्गत ज्योतिष वर्ग के सभी छात्र उपस्थित रहे।