Central Sanskrit University Bhopal Campus

Central Sanskrit University Bhopal Campus PMKVY centre for Editor, Counselor & Fitness Trainer

केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालयस्य भोपालपरिसर: मध्यभारते संस्कृतशिक्षाया: प्रमुखतमं केन्द्रं वर्तते।
अत्र प्राक्शास्त्री-शास्त्री-आचार्य-बीएबीएड-एमए-शिक्षाशास्त्री-शिक्षाचार्य-विद्यावारिधि रित्यादया: पाठ्यक्रमा: प्रचलन्ति।

Accredited with A++ by NAAC

16/05/2026

CSU Bhopal Campus

भारतीय सेना में जूनियर कमीशन ऑफिसर (JCO) प्रतियोगी परीक्षा में धर्म गुरु के पद पर चयनित छात्रों को परिसर निदेशक एवं परिस...
15/05/2026

भारतीय सेना में जूनियर कमीशन ऑफिसर (JCO) प्रतियोगी परीक्षा में धर्म गुरु के पद पर चयनित छात्रों को परिसर निदेशक एवं परिसर परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई 💐💐💐

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में प्राक्शास्त्री प्रथम(द्वितीय चरण) में प्रवेश हेतु दिए गए लिंक के माध्...
06/05/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में प्राक्शास्त्री प्रथम(द्वितीय चरण) में प्रवेश हेतु दिए गए लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
https://sanskritadm.samarth.edu.in/

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में Non-CUET के माध्यम से शास्त्री प्रतिष्ठा एवं आचार्य/M.A प्रथम में प्र...
04/05/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में Non-CUET के माध्यम से शास्त्री प्रतिष्ठा एवं आचार्य/M.A प्रथम में प्रवेश हेतु दिए गए लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
https://sanskritadm.samarth.edu.in/

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर में “वास्तुशास्त्र की उपयोगिता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयो...
01/05/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर में “वास्तुशास्त्र की उपयोगिता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी का उद्देश्य वर्तमान जीवन में वास्तुशास्त्र के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर विद्वानों के विचारों का आदान-प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः मंगलाचरण के साथ छात्रों द्वारा किया गया, जिससे वातावरण अत्यंत पावन एवं आध्यात्मिक हो उठा। इसके पश्चात कुलगीत एवं राष्ट्रगीत का गायन हुआ, जिसने उपस्थित सभी को उत्साह एवं राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत कर दिया।
मंच संचालक महोदय ने अतिथियों का स्वागत प्रस्तुत किया गया, प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि डॉ. शुभम शर्मा ने अपने उद्बोधन में वास्तुशास्त्र के वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक पक्षों को विस्तार से समझाया तथा इसके व्यावहारिक महत्व को रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. श्रीगोविन्द पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में वास्तुशास्त्र के ऐतिहासिक विकास एवं उसके आधुनिक संदर्भों पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. हंसधर झा द्वारा की गई, जिन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विषय की सार्थकता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इससे लाभ उठाने हेतु प्रेरित कियाऔर व्याकरण विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो.सुबोध कुमार शर्मा महोदय और डॉ .गोविंद सरकार, डॉ .गोकुलानन्द तिवारी (शिक्षा शास्त्र विभाग)की भी गरिमामयी उपस्थिति रही ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अश्विनी पाण्डेय द्वारा अत्यंत कुशलता एवं प्रभावी ढंग से किया गया, जिससे कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित हुआ। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ब्रह्मानन्द मिश्र द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार यह संगोष्ठी ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रही, जिसने सभी प्रतिभागियों को वास्तुशास्त्र के महत्व एवं उपयोगिता के प्रति जागरूक किया।
इस कार्यक्रम में एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम ( ITEP ) के अंतर्गत ज्योतिष वर्ग के सभी छात्र उपस्थित रहे।

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर , भोपाल के एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम सत्र 2025-26 के अंतर्गत हिंदी (द्...
29/04/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर , भोपाल के एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम सत्र 2025-26 के अंतर्गत हिंदी (द्वितीय सत्रार्द्ध) के प्रायोगिक विषय हेतु “हिंदी कविता में कालानुसार होने वाले परिवर्तनों पर चर्चा” विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 29 अप्रैल, 2026 को प्रातः 10:30 बजे कक्ष क्रमांक 303 में , भोपाल परिसर, मध्य प्रदेश में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

28/04/2026

भोपाल परिसर

28/04/2026

योगाभ्यासः

28/04/2026

वार्षिकोत्सवः, भोपालपरिसरः

27/04/2026

" #शब्दशक्तिविमर्श:" त्रिदिवसीय कार्यशाला एवं विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम सम्पन्न।

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय मुख्यालय के निर्देशानुसार भोपाल परिसर मध्यप्रदेश में दिनांक 22 अप्रैल, 2026 से 24 अप्रैल 2026 तक एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम ITEP के अन्तर्गत चतुर्थ सत्रार्द्ध साहित्य वर्ग के छात्रों के लिए "शब्दशक्तिविमर्श:" त्रिदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें उद्घाटन समारोह में मुख्यातिथि एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गुरुवायूर परिसर के पूर्व निदेशक साहित्य शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान् प्रो. ई. एम. राजन् महोदय उपस्थित होकर छात्रों को संबोधित करते हुए काव्यप्रकाश एवं साहित्यदर्पण ग्रन्थों में स्वीकृत शब्दों की शक्तियां (व्यापार) अभिधा लक्षणा व्यंजना एवं तात्पर्या की विस्तृत चर्चा किये। पदार्थज्ञानं प्रति त्रीणि कारणानि भवन्ति - पदज्ञानं, पदार्थज्ञानं, शक्तिज्ञानञ्च।
मंचस्थ अतिथियों का वाचिक स्वागत सहनिदेशक शिक्षाशास्त्र प्रो. के.के.हर्षकुमार ने किया। कार्यशाला में भाग ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन सहनिदेशक एवं शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के अध्यक्ष प्रो. गोविन्द पाण्डेय ने किया। सभा अध्यक्ष परिसर निदेशक प्रो. हंसधर झा ने अध्यक्षीय वक्तव्य में सभी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि श्रद्धापूर्वक विद्या का ग्रहण किया जाए तो अवश्य ही फलीभूत होती है। "एक: शब्द: सम्यक् ज्ञात: सुप्रयुक्त: स्वर्गे लोके च कामधुक् भवति" वाक्यों को उद्धृत किया। शास्त्र एवं शास्त्रीय परम्परा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ऐसी कार्यशाला का आयोजन आवश्यक है। कार्यशाला का प्रास्ताविक भाषण ITEP-साहित्य वर्ग के संकाय सलाहकार एवं विषय प्राध्यापक डॉ. जितेन्द्र तिवारी ने किया। सत्र का संचालन ITEP साहित्य वर्ग के छात्र निहाल ढिमोले ने किया।

कार्यशाला का समापन समारोह एवं विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम दिनांक - 24 अप्रैल, 2026 को अपराह्न 3:00 बजे से आरम्भ हुआ। जिसमें ITEP साहित्य वर्ग द्वितीय एवं चतुर्थ सत्रार्द्ध के सभी छात्र-छात्राओं ने सोत्साह भाग ग्रहण किया। विशिष्ट व्याख्यान हेतु डॉ तुलसीदास परौहा, सहाचार्य एवं साहित्य विभागाध्यक्ष, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन ने उपस्थित होकर "काव्यशास्त्रीय परम्परायां काव्यप्रयोजनविमर्श:" विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. ई. एम. राजन् ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किये। उपस्थित अतिथियों ने कार्यशाला में भाग ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र वितरित किए। त्रिदिवसीय कार्यशाला का प्रतिवेदन एवं समापन समारोह कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेन्द्र तिवारी ने किया। छात्र-छात्राओं ने अनुभव कथन में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित होती रहनी चाहिए जिससे हमें कुछ नया सीखने को मिलता रहे। इस अवसर शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के प्राध्यापक उपस्थित रहे।



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