11/02/2025
विजय मनोहर तिवारी जी एक प्रख्यात लेखक, पत्रकार, और इतिहास एवं इस्लाम के अध्येता हैं। उन्होंने 25 वर्षों तक प्रिंट और टेलीविजन मीडिया में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसमें राष्ट्रीय सहारा (दिल्ली), नईदुनिया (इंदौर), सहारा समय न्यूज चैनल, और दैनिक भास्कर (भोपाल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
वर्ष 2018 से 2023 तक, तिवारी जी मध्यप्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त के पद पर आसीन रहे। इसके अतिरिक्त, 2022 से 2024 तक वे बहुकला केंद्र भारत भवन के न्यासी भी रहे। उनकी साहित्यिक यात्रा में अब तक 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 'भारत में इस्लाम' श्रृंखला विशेष रूप से चर्चित रही है। उनकी पुस्तक 'भारत की खोज में मेरे पांच साल' को मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी सम्मान से नवाजा गया है।
तिवारी जी ने 2010 से 2015 के बीच दैनिक भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में विशेष संवाददाता के रूप में देश की लगातार आठ यात्राएँ कीं, जिनका विवरण उनकी पुस्तक 'भारत की खोज में मेरे पांच साल' में मिलता है। उन्होंने "रिवर्स माइग्रेशन" के तहत 2018 में अपने पैतृक गांव (विदिशा जिला) में शहरों से गांवों की ओर लौटने के एक जमीनी मॉडल पर कार्य शुरू किया, जो ग्रामीण पुनर्विकास के लिए प्रेरणास्रोत बना।
हाल ही में, विजय मनोहर तिवारी जी को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति के रूप में नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल चार वर्षों का होगा।
तिवारी जी की उपलब्धियाँ और अनुभव नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, और उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय नई ऊँचाइयों को छूने की उम्मीद है।
यादों के झरोखे से .....
जब किसी संस्थान में आयोजित कार्यक्रमों में एक अथिति उसी विश्वविद्यालय का नेतृत्व संभालता है, तो वह केवल एक प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी नहीं लेता, बल्कि अपनी यात्रा, अपने अनुभव और अपनी विरासत को भी उस संस्थान के भविष्य में बुनता है। जाने-माने लेखक-पत्रकार आदरणीय विजय मनोहर तिवारी जी को कुलपति बनाए जाने की खबर आते ही यादों का सिलसिला तेज़ी से घूमने लगा।
2013 का पूर्व छात्र समागम और मंच पर आसीन सर
वर्ष 2013, 16 फरवरी—माखनलाल के छात्र समागम का वह दिन आज भी ज़ेहन में ताज़ा है। विश्वविद्यालय में उत्साह का माहौल था, पूरा परिसर छात्रों और अतिथियों की चहलकदमी से भरा हुआ था। इस समागम में आदरणीय विजय मनोहर तिवारी जी विशेष अतिथि के रूप में पधारे थे। मंच पर वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद और तमाम मेहमान मौजूद थे। मैं कार्यक्रम में दर्शक की भूमिका निभा रहा था कि तभी मंच से एक मुस्कुराती हुई आवाज़ आई—
"दामोदर, तुम्हें तो बोलना ही पड़ेगा!"
मैंने मुड़कर देखा, तो विजय मनोहर तिवारी जी मुस्कुराते हुए इशारा कर रहे थे। उनका आत्मीय अंदाज, विनम्रता और संवाद की सहजता ने मुझे तुरंत मंच की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मंच पर बुलाए जाने के बाद उनसे संवाद करने का सौभाग्य मिला। बातों ही बातों में मैंने उनसे कहा—
"सर, आज आप हमारे विश्वविद्यालय के गेस्ट हैं, लेकिन आने वाले समय में हम आपके गेस्ट होंगे, जब आप इस यूनिवर्सिटी की बागडोर संभालेंगे।"
तब उन्होंने हंसते हुए कहा था—
"अभी तो मुझे घूमना है, मैं एक भ्रमणशील पत्रकार हूं, यात्राओं में मगन रहना चाहता हूं।"
उनका वह जवाब न केवल उनके घुमक्कड़ स्वभाव को दर्शाता था, बल्कि उनकी पत्रकारिता की जिज्ञासा और दुनिया को समझने की अदम्य इच्छा को भी उजागर करता था।
विजय मनोहर तिवारी जी का पत्रकारिता सफर किसी परिचय का मोहताज नहीं। उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल समसामयिक मुद्दों को बेबाकी से उठाया, बल्कि भारतीय भ्रमण और संस्कृति, राजनीति और समाज के जटिल पहलुओं को भी गहराई से परखा। मध्यप्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त के रूप में उनकी निष्पक्षता और निर्भीक दृष्टि सभी को प्रेरित करती रही है। उनके विचारों की स्पष्टता और पत्रकारिता के प्रति समर्पण को देखते हुए विश्वविद्यालय ने पहले ही उन्हें गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किया था।
यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि विजय मनोहर तिवारी जी ने अपनी उच्च शिक्षा एसएसएल जैन पीजी कॉलेज, विदिशा से प्राप्त की। वे पत्रकारिता के छात्र नहीं बल्कि एक मुक्कमल संस्थान रहे हैं, उनकी पत्रकारिता यात्रा ने उन्हें इस संस्थान से गहरे रूप से जोड़ दिया।
उन्होंने एमएससी (गणित) की पढ़ाई की और शिक्षाविदों की नगरी विदिशा से ज्ञान अर्जित करने के बाद अपनी लेखनी को पत्रकारिता के क्षेत्र में समर्पित किया। स्कूलिंग उन्होंने मंडी बामोरा, जिला सागर से की, और आगे चलकर भोपाल और विदिशा से ऊपर देश और दुनिया के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को बारीकी से समझा।
पत्रकारिता जगत में कदम रखने के बाद उन्होंने अपनी लेखनी से एक अलग पहचान बनाई और अपने विचारों की स्पष्टता, बेबाकी और निर्भीकता से पत्रकारिता में अपनी जगह स्थापित की।
माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में एक नई शुरुआत
वक्त का पहिया घूमा और वही व्यक्ति जो कभी छात्रों के समागम में अथिति थे, आज उसी संस्थान की बागडोर संभालने के लिए कुलपति के रूप में नियुक्त हुए है। यह केवल उनकी उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम छात्रों के लिए भी एक प्रेरणा है, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में कुछ कर दिखाने का सपना देखते हैं।
विजय मनोहर तिवारी जी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा, इसमें कोई संदेह नहीं। पत्रकारिता के बदलते दौर में उनकी सटीक दृष्टि, अनुभव और मार्गदर्शन नई पीढ़ी के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
आदरणीय विजय मनोहर तिवारी जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! आपके नेतृत्व में माखनलाल विश्वविद्यालय न केवल ज्ञान और पत्रकारिता की मशाल को आगे बढ़ाएगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी सच्ची पत्रकारिता की राह दिखाएगा।
Vijay Manohar Tiwari