26/07/2026
**"अपने साथ चले या ना चले... लेकिन अपनों के साथ चाल मत चले।"**
ज़िंदगी ने एक बात बहुत साफ़ सिखाई है...
दुश्मनों से बचना आसान होता है,
लेकिन अपनों की चाल पहचानना सबसे मुश्किल।
क्योंकि अजनबी सामने से वार करता है,
और अपना... अक्सर मुस्कुराते हुए।
हर रिश्ता हमेशा साथ निभाने के लिए नहीं बना होता।
कुछ रिश्ते सिर्फ़ यह सिखाने आते हैं कि भरोसा आँख बंद करके नहीं, इंसान को समझकर करना चाहिए।
अपनों का साथ न मिले, तो भी इंसान संभल जाता है...
लेकिन जब अपने ही चाल चलने लगें,
तो सिर्फ़ रिश्ता नहीं टूटता,
इंसान का भरोसा भी बिखर जाता है।
इसलिए अब मैंने एक बात सीख ली है...
जो मेरे साथ चलना चाहता है,
उसका हाथ कभी नहीं छोड़ूँगी।
लेकिन जो मेरे रास्ते में मुस्कुराकर गड्ढे खोदता है,
उसे अब अपनी ज़िंदगी में जगह नहीं दूँगी।
क्योंकि माफ़ करना महानता हो सकती है,
लेकिन बार-बार वही चोट खाना समझदारी नहीं।
**याद रखिए...**
ज़िंदगी में सबसे बड़ा धन पैसा नहीं,
बल्कि ऐसे लोग हैं
जो आपकी गैरमौजूदगी में भी आपकी इज़्ज़त की रक्षा करें,
न कि आपकी मौजूदगी में वफ़ादारी का दिखावा।
**साथ न देना स्वीकार है...
पर पीठ पीछे खेल खेलना कभी स्वीकार नहीं।**
**क्योंकि विश्वास एक बार टूट जाए,
तो रिश्ते बच भी जाएँ...
मगर पहले जैसे कभी नहीं रहते।** ❤️