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तकनीकी शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों का समावेश अनिवार्य: श्री वासुदेव देवनानी, अध्यक्ष-राजस्थान विधानसभाबीकानेर तकनीकी वि...
14/03/2026

तकनीकी शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों का समावेश अनिवार्य: श्री वासुदेव देवनानी, अध्यक्ष-राजस्थान विधानसभा
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षान्त समारोह आयोजित
श्री देवनानी विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि से हुए विभूषित

बीकानेर, 13 मार्च। ​राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में 'तकनीक' प्रधान हो सकती है, लेकिन इसका अंतिम लक्ष्य 'मनुष्यता का विकास' होना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी शुक्रवार को बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (बीटीयू) के चतुर्थ दीक्षान्त समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

विधानसभा अध्यक्ष ने ​वर्तमान दौर की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैट जीपीटी जैसे संसाधनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एआई कार्यों को सुगम जरूर बना सकती है, लेकिन यह कभी भी मानव मस्तिष्क और उसकी संवेदनशीलता का विकल्प नहीं बन सकती। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि केवल मशीनी ज्ञान पर निर्भरता घातक हो सकती है; असली मेधा मनुष्य के मौलिक चिंतन और विवेक में ही निहित है।

प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और नवाचार
​श्री देवनानी ने ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें विश्व भर के श्रेष्ठ विचारों को अपनाना चाहिए। आईटी उन्होंने ऋषि कणाद, आर्यभट्ट और कौटिल्य जैसे विद्वानों का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने नई शिक्षा नीति (एनईपी) की सराहना करते हुए कहा कि कौशल विकास और व्यावहारिक ज्ञान ही 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने का सबसे बड़ा मंत्र है।

श्री देवनानी ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबों से सूचनाएं एकत्र करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मिक शक्ति का विकास है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण कराते हुए कहा कि शिक्षा वह है, जो मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाए और उसमें आत्मविश्वास जगाए।

दीक्षांत समारोह के इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी तकनीकी कुशलता का उपयोग केवल स्वयं के लाभ के लिए न कर, 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध करने में करें। उन्होंने विद्यार्थियों को नए नवाचार करने, मौलिक सोच विकसित करने और समाज की रूढ़ियों को तोड़कर मानवता के कल्याण के लिए समर्पित रहने का मार्ग दिखाया।

युवाओं को 'राष्ट्र प्रथम' का संदेश
​दीक्षान्त समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने आह्वान किया कि वे 'राष्ट्र प्रथम' की सोच के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी नया सोचे, नया करे और विकसित भारत की संकल्पना में अपना योगदान दे। उन्होंने तकनीकी संस्थानों को शोध और सामुदायिक भागीदारी पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का सुझाव भी दिया।

कुलगुरु ने प्रस्तुत किया विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन और स्वागत उद्बोधन
​समारोह के दौरान शैक्षणिक उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने बताया कि चतुर्थ दीक्षांत समारोह में कुल 3380 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ वितरित की गई हैं। उन्होंने विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि इनमें सर्वाधिक 2588 डिग्रियाँ बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) संकाय में दी गई हैं। इसके अतिरिक्त 483 विद्यार्थियों को मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए), 242 को मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए), 42 को मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (एमटेक), 12 को बैचलर ऑफ डिजाइन (बी डिजाइन), 4 को बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (बीआर्क) तथा 9 शोधार्थियों को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधियाँ प्रदान की गई हैं। प्रो. गर्ग ने बताया कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 23 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 166 विद्यार्थियों को मेरिट प्रमाण पत्र से भी नवाजा गया है। इसी गरिमामयी अवसर पर कुलगुरु ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी को शिक्षा एवं समाज के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए 'विद्या वाचस्पति' की मानद उपाधि से भी विभूषित किया। साथ ही राज्यपाल और कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे के संबोधन का वाचन किया।

*चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में मूल्यों के साथ तकनीक अपनाने का संदेश*

दीक्षांत समारोह में दीक्षांत उद्बोधन देते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश अग्रवाल ने कहा गया कि आज दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां और डिजिटल अवसंरचना जैसी नई तकनीकें समाज के कार्य करने के तरीके को तेजी से बदल रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है। चंद्रयान और आदित्य जैसे अंतरिक्ष मिशनों से लेकर डिजिटल भुगतान, जैव प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में हुई उपलब्धियों ने देश को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया है।

कुलसचिव श्रीमती रचना भाटिया ने आभार जताया। कार्यक्रम में खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, बीकानेर पश्चिम विधायक श्री जेठानंद व्यास, श्रीडूंगरगढ़ विधायक श्री ताराचंद सारस्वत, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित, राजूवास के कुलगुरु प्रो. सुमंत व्यास, डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, श्रीमती सुमन छाजेड़ सहित विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल सदस्य, स्टाफ, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे ।

10/03/2026

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