19/08/2026
⭐⭐उद्यमिता से आत्मनिर्भरता की राह पर युवा, जय प्रकाश विश्वविद्यालय में नई पहल⭐⭐
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विश्व उद्यमिता दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस उद्यमिता, नवाचार, नेतृत्व और रोजगार-सृजन की भावना को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन व्यक्तियों के योगदान को रेखांकित करता है, जो नए विचारों को व्यावहारिक रूप देकर आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनते हैं। आज उद्यमिता केवल व्यवसाय स्थापित करने की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, नवाचार, स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग और व्यापक आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। भारत जैसे युवा देश के लिए उद्यमिता का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। बड़ी युवा आबादी को केवल पारंपरिक रोजगार के अवसरों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार सृजक के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। डिजिटल तकनीक, ई-कॉमर्स, स्टार्टअप संस्कृति और बदलते बाजार ने युवाओं के सामने उद्यमिता के नए अवसर खोले हैं। किंतु सफल उद्यमिता के लिए केवल पूंजी पर्याप्त नहीं है; इसके लिए दूरदृष्टि, जोखिम उठाने की क्षमता, नवाचार, अनुशासन, बाजार की समझ और असफलताओं से सीखने का साहस भी आवश्यक है।
इसी संदर्भ में जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में 21 अगस्त 2026 को आयोजित ‘उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन-2026’ विशेष महत्व रखता है। अर्थशास्त्र एवं वाणिज्य विभाग तथा स्वदेशी जागरण मंच, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों और युवाओं में उद्यमशील चेतना विकसित करने की दिशा में एक सार्थक पहल है। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) परमेंद्र कुमार बाजपेई की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन शैक्षणिक परिसर में उद्यमिता को विचार-विमर्श के केंद्र में लाने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर पर मुख्य वक्तव्य स्वदेशी जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री माननीय अजय कुमार जी का होगा। कार्यक्रम के आयोजन में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजीत तिवारी तथा वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गोप की भूमिका उल्लेखनीय है। कार्यक्रम के आयोजक अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजीत तिवारी तथा वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गोप ने बताया कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को पारंपरिक रोजगार के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उनमें नेतृत्व, सृजनात्मकता, जोखिम लेने की क्षमता और समस्या-समाधान की दृष्टि विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है; उचित मार्गदर्शन, अवसर और संसाधनों की उपलब्धता से वे स्थानीय स्तर पर नए उद्यम स्थापित कर व्यापक आर्थिक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं।
अर्थशास्त्र उद्यमिता को संसाधन, उत्पादन, बाजार और रोजगार के व्यापक संदर्भ में समझने की दृष्टि प्रदान करता है, जबकि वाणिज्य उद्यम को प्रबंधन, वित्त, विपणन और व्यवसायिक व्यवहार से जोड़ता है। दोनों विषयों का यह समन्वय विद्यार्थियों को उद्यमिता की व्यावहारिक और सैद्धांतिक समझ विकसित करने में सहायक हो सकता है।
बिहार के संदर्भ में उद्यमिता की संभावनाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। राज्य की कृषि, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और स्थानीय उत्पादों में अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें युवा नवाचार के माध्यम से नए उद्यम विकसित कर सकते हैं। स्थानीय संसाधनों और स्थानीय कौशल को बाजार से जोड़कर न केवल व्यक्तिगत आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि ग्रामीण और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है। इस दृष्टि से ‘स्थानीय संसाधन स्थानीय उद्यम स्थानीय रोजगार’ की अवधारणा आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की आधारशिला बन सकती है।
उद्यमिता का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं का समाधान प्रस्तुत करना भी है। सामाजिक उद्यमिता, हरित उद्यमिता और तकनीक-आधारित नवाचार आज उद्यमिता के नए आयाम हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रखें, बल्कि उनमें समस्या पहचानने, समाधान विकसित करने और उसे उद्यम में बदलने की क्षमता विकसित करें। आज आवश्यकता ऐसी शिक्षा-व्यवस्था की है, जिसमें ज्ञान के साथ कौशल, कौशल के साथ नवाचार और नवाचार के साथ उद्यमशीलता का समन्वय हो। जय प्रकाश विश्वविद्यालय में आयोजित उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। यह कार्यक्रम युवाओं को यह संदेश देता है कि अवसरों की प्रतीक्षा करने के बजाय अवसरों का निर्माण भी किया जा सकता है। विश्व उद्यमिता दिवस केवल उद्यमियों के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी में आत्मविश्वास, नवाचार और आत्मनिर्भरता का संकल्प विकसित करने का दिन है। यदि विश्वविद्यालय, उद्योग, सरकार और समाज मिलकर युवाओं को उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराएँ, तो भारत की युवा शक्ति आर्थिक परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है। आत्मनिर्भर युवा ही आत्मनिर्भर भारत और सशक्त बिहार की मजबूत आधारशिला रख सकता है।सम्मेलन में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, युवा उद्यमी एवं उद्यमिता में रुचि रखने वाले प्रतिभागी सम्मिलित होंगे। आयोजकों ने सभी संबंधितों से सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता कर ‘आत्मनिर्भर युवा - सशक्त अर्थव्यवस्था’ के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है।
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आप सभी का 21 अगस्त 2026 को 12 बजे जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के सीनेट हाल में हार्दिक स्वागत है