16/09/2020
💐 अधिकमास २०२०🌺
सौर वर्ष और चांद्र वर्ष में सामंजस्य स्थापित करने के लिए हर तीसरे वर्ष पंचांगों में एक चान्द्रमास की वृद्धि कर दी जाती है। इसी को अधिक मास या अधिमास या मलमास कहते हैं।
💐अधिकमास को मलमास क्यों कहते हैं?
अधिकमास में सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। इस पूरे माह में सूर्य संक्राति नहीं रहती है। इस वजह से ये माह मलिन हो जाता है। इसलिए इसे मलमास कहते हैं। मलमास में नामकरण, यज्ञोपवित, विवाह, गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी जैसे शुभ कर्म नहीं किए जाते हैं
सौर-वर्ष का मान ३६५ दिन, १५ घड़ी, २२ पल और ५७ विपल हैं। जबकि चांद्रवर्ष ३५४ दिन, २२ घड़ी, १ पल और २३ विपल का होता है। इस प्रकार दोनों वर्षमानों में प्रतिवर्ष १० दिन, ५३ घटी, २१ पल (अर्थात लगभग ११ दिन) का अन्तर पड़ता है। इस अन्तर में समानता लाने के लिए चांद्रवर्ष १२ मासों के स्थान पर १३ मास का हो जाता है।
वास्तव में यह स्थिति स्वयं ही उत्त्पन्न हो जाती है, क्योंकि जिस चंद्रमास में सूर्य-संक्रांति नहीं पड़ती, उसी को "अधिक मास" की संज्ञा दे दी जाती है तथा जिस चंद्रमास में दो सूर्य संक्रांति का समावेश हो जाय, वह "क्षयमास" कहलाता है। क्षयमास केवल कार्तिक, मार्ग व पौस मासों में होता है। जिस वर्ष क्षय-मास पड़ता है, उसी वर्ष अधि-मास भी अवश्य पड़ता है परन्तु यह स्थिति १९ वर्षों या १४१ वर्षों के पश्चात् आती है। जैसे विक्रमी संवत २०२०,२०३९,२०५८में क्षयमासों का आगमन हुआ तथा भविष्य में सम्वत् २१५० में पड़ने की संभावना है।
💐पुराण में अधिक मास--
अधिक मास स्वामी के न होने पर विष्णुलोक पहुंचे और भगवान श्रीहरि से अनुरोध किया कि सभी माह अपने स्वामियों के आधिपत्य में हैं और उनसे प्राप्त अधिकारों के कारण वे स्वतंत्र एवं निर्भय रहते हैं। एक मैं ही भाग्यहीन हूं जिसका कोई स्वामी नहीं है। अतः हे प्रभु, मुझे इस पीड़ा से मुक्ति दिलाइए। अधिक मास की प्रार्थना को सुनकर श्री हरि ने कहा, ‘हे मलमास, मेरे अंदर जितने भी सद्गुण हैं, वे मैं तुम्हें प्रदान कर रहा हूं और मेरा विख्यात नाम ‘पुरुषोत्तम’ मैं तुम्हें दे रहा हूं और तुम्हारा मैं ही स्वामी हूं।’ तभी से मलमास का नाम पुरुषोत्तम मास हो गया और भगवान श्री हरि की कृपा से ही इस मास में भगवान का कीर्तन, भजन, दान-पुण्य करने वाले मृत्यु के पश्चात श्री हरि धाम को प्राप्त होते हैं।
🌺अधिक मास का महत्व
अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता कि पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान और दान करने से विशेष फल प्राप्त होेते हैं और हर प्रकार के कष्ट दूर होते हैं.
💐अधिक मास में इन बातों का रखें ध्यान
अधिक मास में कुछ कार्यों को निषेध माना गया है. मान्यता कि अधिक मास में नई चीज की खरीदार कर घर में नहीं लाना चाहिए. ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है, इसीलिए पुरुषोत्तम मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. इस महीने वस्त्र आभूषण, घर, दुकान, वाहन आदि की खरीदारी नहीं की जाती है. शादी विवाह भी अधिक मास में नहीं करते हैं वहीं किसी प्रकार के मांगलिक कार्यों भी नहीं करने चाहिए.
💐अधिक मास में क्या कर सकते हैं और क्या नहीं--
अधिक मास में इस पूरे माह में व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत पुराण, ग्रंथों का अध्ययन, विष्णु यज्ञ आदि किए जा सकते हैं। जो कार्य पहले शुरु किये जा चुके हैं उन्हें जारी रखा जा सकता है। संतान जन्म के कृत्य जैसे गर्भाधान, पुंसवन, सीमंत आदि संस्कार किये जा सकते हैं। अगर किसी मांगलिक कार्य की शुरुआत हो चुकी है तो उसे किया जा सकता है। विवाह नहीं हो सकता है लेकिन रिश्ते देख सकते हैं, रोका कर सकते है। लेकिन मलमास यानी कि अधिक मास में कोई प्राण-प्रतिष्ठा, स्थापना, विवाह, मुंडन, नववधु गृह प्रवेश, यज्ञोपवित, नामकरण संस्कार व कर्म करने की मनाही है।
💐लीप ईयर में आश्विन अधिक मास --
160 साल बाद अंग्रेजी कैलेंडर में चार वर्ष में एक बार लीप ईयर आता है। लीप ईयर में फरवरी में 29 दिन होते हैं। हिंदू कैलेंडर में लीप ईयर नहीं होता, अधिक मास होता है। ये संयोग है कि 2020 में लीप ईयर एवं आश्विन अधिक मास दोनों एक साथ आए हैं। आश्विन का अधिक मास 19 साल पहले 2001 में आया था, लेकिन लीप ईयर के साथ अश्विन में अधिक मास 160 साल पहले 2 सितंबर 1860 को आया था।
🌺इस वर्ष अधिक मास--
17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे और अगले दिन से अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा।
17 अक्टूबर से नवरात्रि आरंभ होगी।
धन्यवाद 🙏🙏🙏🌺💐