Department Of Astrology -Mewar University

Department Of Astrology -Mewar University Dept of Astrology conducts Certificate 6 months, Diploma 1 year & Degree B.A. Hons 3 years, M.A. 2 years, M.Phil. 1 year & Ph.D. 3 years (min.) Programs

Convocation 2025
20/12/2025

Convocation 2025

21/06/2025
  Indian Knowledge System
17/06/2025

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17/06/2025

ज्योतिष शास्त्र, जिसे ज्योतिष भी कहा जाता है, एक प्राचीन विद्या है जो ग्रहों, नक्षत्रों और अन्य खगोलीय पिंडों की गति और स्थिति का अध्ययन करके मानवीय जीवन और घटनाओं पर उनके प्रभाव की भविष्यवाणी करने का प्रयास करती है। यह एक जटिल प्रणाली है जिसमें खगोलीय पिंडों की चाल, राशियों, नक्षत्रों और ग्रहों की दशाओं का विश्लेषण शामिल है।
ज्योतिष शास्त्र के मुख्य पहलू:
ग्रह:
ज्योतिष में नौ ग्रह (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, और केतु) महत्वपूर्ण माने जाते हैं, और प्रत्येक ग्रह का एक विशिष्ट प्रभाव होता है।
राशियाँ:
12 राशियाँ (मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, और मीन) हैं, जो ग्रहों की गति के आधार पर निर्धारित होती हैं।
नक्षत्र:
27 नक्षत्र हैं, जो ग्रहों की स्थिति को और अधिक विस्तार से परिभाषित करते हैं।
दशाएँ:
दशाएँ ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशाएँ होती हैं, जो किसी व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग समय पर सक्रिय होती हैं।

Department of Astrology views.  Admission open for session - 2022-23
20/02/2022

Department of Astrology views. Admission open for session - 2022-23

मेवाड़ विश्वविद्यालय ज्योतिष विभाग द्वारा ज्योतिष विषय में षाण्मासिक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम एवं एडवांस प्रमाणपत्रीय  पाठ...
05/08/2021

मेवाड़ विश्वविद्यालय ज्योतिष विभाग द्वारा ज्योतिष विषय में षाण्मासिक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम एवं एडवांस प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम, ज्योतिष, मेडिकल एस्ट्रोलॉजी, एवं वास्तु शास्त्र में डिप्लोमा पाठ्यक्रम, ज्योतिष शास्त्र में स्नातक पाठ्यक्रम, एवं ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में सत्र 2021-22 के लिए प्रवेश प्रारंभ हो गया है इन पाठ्यक्रमों में ज्योतिष शास्त्र के विषयों के साथ वास्तु शास्त्र का प्रायोगिक दृष्टि से भी ज्ञान करवाया जाएगा । उपरोक्त पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट http://admission.mewaruniversity.org/ पर जाकर ऑनलाइन एडमिशन फॉर्म भर सकते हैं।

Admission open for session 2021-21
03/08/2021

Admission open for session 2021-21

16/09/2020

💐 अधिकमास २०२०🌺

सौर वर्ष और चांद्र वर्ष में सामंजस्य स्थापित करने के लिए हर तीसरे वर्ष पंचांगों में एक चान्द्रमास की वृद्धि कर दी जाती है। इसी को अधिक मास या अधिमास या मलमास कहते हैं।
💐अधिकमास को मलमास क्यों कहते हैं?
अधिकमास में सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। इस पूरे माह में सूर्य संक्राति नहीं रहती है। इस वजह से ये माह मलिन हो जाता है। इसलिए इसे मलमास कहते हैं। मलमास में नामकरण, यज्ञोपवित, विवाह, गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी जैसे शुभ कर्म नहीं किए जाते हैं

सौर-वर्ष का मान ३६५ दिन, १५ घड़ी, २२ पल और ५७ विपल हैं। जबकि चांद्रवर्ष ३५४ दिन, २२ घड़ी, १ पल और २३ विपल का होता है। इस प्रकार दोनों वर्षमानों में प्रतिवर्ष १० दिन, ५३ घटी, २१ पल (अर्थात लगभग ११ दिन) का अन्तर पड़ता है। इस अन्तर में समानता लाने के लिए चांद्रवर्ष १२ मासों के स्थान पर १३ मास का हो जाता है।

वास्तव में यह स्थिति स्वयं ही उत्त्पन्न हो जाती है, क्योंकि जिस चंद्रमास में सूर्य-संक्रांति नहीं पड़ती, उसी को "अधिक मास" की संज्ञा दे दी जाती है तथा जिस चंद्रमास में दो सूर्य संक्रांति का समावेश हो जाय, वह "क्षयमास" कहलाता है। क्षयमास केवल कार्तिक, मार्ग व पौस मासों में होता है। जिस वर्ष क्षय-मास पड़ता है, उसी वर्ष अधि-मास भी अवश्य पड़ता है परन्तु यह स्थिति १९ वर्षों या १४१ वर्षों के पश्चात् आती है। जैसे विक्रमी संवत २०२०,२०३९,२०५८में क्षयमासों का आगमन हुआ तथा भविष्य में सम्वत् २१५० में पड़ने की संभावना है।
💐पुराण में अधिक मास--
अधिक मास स्वामी के न होने पर विष्णुलोक पहुंचे और भगवान श्रीहरि से अनुरोध किया कि सभी माह अपने स्वामियों के आधिपत्य में हैं और उनसे प्राप्त अधिकारों के कारण वे स्वतंत्र एवं निर्भय रहते हैं। एक मैं ही भाग्यहीन हूं जिसका कोई स्वामी नहीं है। अतः हे प्रभु, मुझे इस पीड़ा से मुक्ति दिलाइए। अधिक मास की प्रार्थना को सुनकर श्री हरि ने कहा, ‘हे मलमास, मेरे अंदर जितने भी सद्गुण हैं, वे मैं तुम्हें प्रदान कर रहा हूं और मेरा विख्यात नाम ‘पुरुषोत्तम’ मैं तुम्हें दे रहा हूं और तुम्हारा मैं ही स्वामी हूं।’ तभी से मलमास का नाम पुरुषोत्तम मास हो गया और भगवान श्री हरि की कृपा से ही इस मास में भगवान का कीर्तन, भजन, दान-पुण्य करने वाले मृत्यु के पश्चात श्री हरि धाम को प्राप्त होते हैं।
🌺अधिक मास का महत्व

अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता कि पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान और दान करने से विशेष फल प्राप्त होेते हैं और हर प्रकार के कष्ट दूर होते हैं.

💐अधिक मास में इन बातों का रखें ध्यान

अधिक मास में कुछ कार्यों को निषेध माना गया है. मान्यता कि अधिक मास में नई चीज की खरीदार कर घर में नहीं लाना चाहिए. ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है, इसीलिए पुरुषोत्तम मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. इस महीने वस्त्र आभूषण, घर, दुकान, वाहन आदि की खरीदारी नहीं की जाती है. शादी विवाह भी अधिक मास में नहीं करते हैं वहीं किसी प्रकार के मांगलिक कार्यों भी नहीं करने चाहिए.
💐अध‍िक मास में क्या कर सकते हैं और क्‍या नहीं--
अध‍िक मास में इस पूरे माह में व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत पुराण, ग्रंथों का अध्ययन, विष्णु यज्ञ आदि किए जा सकते हैं। जो कार्य पहले शुरु किये जा चुके हैं उन्हें जारी रखा जा सकता है। संतान जन्म के कृत्य जैसे गर्भाधान, पुंसवन, सीमंत आदि संस्कार किये जा सकते हैं। अगर किसी मांगलिक कार्य की शुरुआत हो चुकी है तो उसे किया जा सकता है। विवाह नहीं हो सकता है लेकिन रिश्ते देख सकते हैं, रोका कर सकते है। लेक‍िन मलमास यानी क‍ि अध‍िक मास में कोई प्राण-प्रतिष्ठा, स्थापना, विवाह, मुंडन, नववधु गृह प्रवेश, यज्ञोपवित, नामकरण संस्कार व कर्म करने की मनाही है।
💐लीप ईयर में आश्विन अधिक मास --
160 साल बाद अंग्रेजी कैलेंडर में चार वर्ष में एक बार लीप ईयर आता है। लीप ईयर में फरवरी में 29 दिन होते हैं। हिंदू कैलेंडर में लीप ईयर नहीं होता, अधिक मास होता है। ये संयोग है कि 2020 में लीप ईयर एवं आश्विन अध‍िक मास दोनों एक साथ आए हैं। आश्विन का अध‍िक मास 19 साल पहले 2001 में आया था, लेकिन लीप ईयर के साथ अश्विन में अध‍िक मास 160 साल पहले 2 सितंबर 1860 को आया था।
🌺इस वर्ष अधिक मास--
17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे और अगले दिन से अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा।

17 अक्टूबर से नवरात्रि आरंभ होगी।

धन्यवाद 🙏🙏🙏🌺💐

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