19/08/2026
“तुलसीदास को केवल धार्मिक कवि के रूप में नहीं, बल्कि लोकजीवन, करुणा और मानवीय संवेदना के कवि के रूप में समझना होगा।”
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर हंसराज कॉलेज में आयोजित विशेष संगोष्ठी “लोकवादी तुलसीदास” में प्रख्यात साहित्यकार आचार्य विश्वनाथ त्रिपाठी जी ने तुलसीदास के साहित्य, लोकजीवन, करुणा और मानवीय संवेदना पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों के साथ उनका संवाद संगोष्ठी का विशेष आकर्षण रहा।
आचार्य त्रिपाठी जी ने तुलसी को उनके ऐतिहासिक, सामाजिक और मानवीय संदर्भों में समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, भाषा, संस्कार और मानवीय मूल्यों से जुड़े रहते हुए प्रगतिशील दृष्टि विकसित करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) रमा, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. प्रदीप सिंघल, हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. नृत्यगोपाल, तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विद्यार्थियों के प्रश्नों और आचार्य विश्वनाथ त्रिपाठी जी के विचारोत्तेजक उत्तरों ने इस संगोष्ठी को एक जीवंत और सार्थक साहित्यिक संवाद में परिवर्तित कर दिया।
लोक से साहित्य तक, साहित्य से संवेदना तक—तुलसी को नए संदर्भों में समझने का एक सार्थक प्रयास।