11/06/2022
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इस पुस्तक के लेखक डॉ. एम.यू. दुआ बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के रहे हैं। इन्हें बचपन में खिलौने से खेलने में रूचि नहीं थी। ये शुरू से ही कुछ विशेष करना चाहते थे। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण ही अपने हमउम्र बच्चों से काफी समझदार माने जाते थे। डॉ. एम. यू. दुआ ने प्राथमिक शिक्षा गांव में प्राप्त की। माध्यमिक शिक्षा में अपने पूरे प्रखंड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। माध्यमिक शिक्षा के दौरान इन्होंने पूरे जिले में राष्ट्रीय स्तर की स्कॉलरशिप में प्रथम स्थान पाया और जिले के सबसे अच्छे स्कूल में दसवीं तक पढ़ाई की। इन्होंने स्कूल के छात्रावास में रहकर पढ़ाई की। गणित मनपसन्द विषय होने की वजह से ये साइंस पढ़ना चाहते थे परन्तु घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई वाणिज्य से पूरी की। इनके इंजीनियर बनने का सपना अधूरा रह गया तत्पश्चात् इन्होंने स्नातक व स्नातकोत्तर की शिक्षा पटना विश्वविद्यालय से वाणिज्य विषय में ही प्राप्त की। एम.कॉम प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद पहले चार्टर्ड एकाउंटेंट की पढ़ाई शुरू की, फिर आई.ए. एस.की तैयारी में लगे रहे और साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से इवनिंग कॉलेज से लॉ की पढ़ाई करते रहे।
इनका जिज्ञासु मन शांत नहीं हुआ व कुछ नया करने की सोचते रहे। समाज में बढ़ती असमानता व भेदभाव को देखकर इनका मन विचलित हुआ। कुछ समय अपने बलबूते पर व्यवसाय के क्षेत्र में अपना मुकाम बनाने निकले, सफलता-असफलता के बीच मानवीय मूल्यों को समझा। तदुपरांत इन्होंने मानवाधिकार के क्षेत्र में सामाजिक कार्य करने का बीड़ा उठाया और फिर इन्होंने मानवाधिकारों के प्रति रुचि दिखाई और देश के प्रतिष्ठित लोगों के साथ मिलकर 1987 में ऑल इंडिया हयूमन राइट्स एसोसिएशन की नींव रखी। भारत के नियमों के अनुसार सोसायटी रजिस्ट्रार से संस्था को पंजीकृत करवाया। यूनाइटेड नेशनंस से संस्था को जोड़ा एवं इंटरनेशनल बार एसोसिएशन (लंदन), अमेरिकन बार एसोसिएशन (यूएसए), लीगल सर्विस ऑथारिटी तथा अन्य ऑथारिटी से भी संस्था को संबद्ध किया। इनके अथक प्रयास से ही ‘एहरा’ आज भारत के 34 राज्यों एवं अन्य देशों में मानवाधिकार के क्षेत्र में अच्छा काम करते हुए नई दशा देने एवं दिशा दिखाने का कार्य कर रहा है।