Central Sanskrit University

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The Sansthan was established in 15th October, 1970 as an autonomous organisation registered under the Societies Registration Act, 1860 (Act XXI of 1860) for the development and promotion of Sanskrit all over the country.

21/05/2026

“संस्कृत: अतीत की विरासत, भविष्य की आवश्यकता।”
Central Sanskrit University Shrinivasa Varakhedi Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna

देववाणी संस्कृत का वैश्विक शंखनाद कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने देवप्रयाग से किया ‘वन यूनिवर्सिटी वन लाइब्रेरी सिस्टम...
20/05/2026

देववाणी संस्कृत का वैश्विक शंखनाद कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने देवप्रयाग से किया ‘वन यूनिवर्सिटी वन लाइब्रेरी सिस्टम’ एवं अनुसंधान सहायता सेवा का शुभारंभ
देवप्रयाग।
Central Sanskrit University, Shri Raghunath Kirti Campus, Devprayag में Central Sanskrit University के कुलपति प्रो.Shrinivasa Varakhedi ने ‘One University One Library System’ के अंतर्गत Integrated Library Management System (ILMS), automated library services और Research Support Cell का शुभारम्भ किया।
इस अवसर पर परिसर निदेशक प्रो. पी. वी. बी. सुब्रह्मण्यम एवं मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. पी. एम. गुप्ता भी उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल पुस्तकों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि ज्ञान को प्रत्येक विद्यार्थी, शोधार्थी एवं जिज्ञासु तक सहज रूप से पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि क्लाउड-आधारित ILMS प्रणाली तथा ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ के अंतर्गत उपलब्ध ई-संसाधन विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शोध सुविधाएँ प्रदान करेंगे। साथ ही ‘ज्ञानवाहिनी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से संस्कृत का विशाल ज्ञान-संसार अब प्रत्येक स्मार्टफोन तक पहुँचेगा।
इस पहल के माध्यम से संस्कृत शिक्षा और अनुसंधान को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को 24×7 डिजिटल पुस्तकालय सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
परिसर निदेशक प्रो. पी.वी.बी. सुब्रह्मण्यम ने बताया कि Research Support Cell के माध्यम से बहुभाषी अनुवाद, अनुसंधान सहयोग एवं दिव्यांग पाठकों हेतु ऑडियो बुक्स जैसी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं, जिससे भारतीय ज्ञानपरम्परा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाया जा सके।

मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. पी.एम. गुप्ता के अनुसार, देवप्रयाग से प्रारंभ हुई यह डिजिटल व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय के सभी परिसरों में लागू की जाएगी।
Dharmendra Pradhan Ministry of Education Indian Knowledge Systems, MoE Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna

19/05/2026
ईशोपनिषद् के गूढ़ रहस्यों पर सप्ताहात्मकं सूक्ष्माध्ययन कार्यशाला का शुभारम्भदेवप्रयाग/उत्तराखण्ड।केन्द्रीय संस्कृत विश्...
18/05/2026

ईशोपनिषद् के गूढ़ रहस्यों पर सप्ताहात्मकं सूक्ष्माध्ययन कार्यशाला का शुभारम्भ
देवप्रयाग/उत्तराखण्ड।
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्रीरघुनाथकीर्ति परिसर, देवप्रयाग Central Sanskrit University, Shri Raghunath Kirti Campus, Devprayag
में दिनांक 18 मई 2026 से 25 मई 2026 तक आयोजित सप्तदिवसीय कार्यशाला “ईशोपनिषद्-सप्ताहात्मकं सूक्ष्माध्ययनम्” का भव्य शुभारम्भ हुआ। इस विशेष कार्यशाला का उद्देश्य ईशोपनिषद् के गूढ़ दार्शनिक एवं आध्यात्मिक तत्वों का गहन अध्ययन एवं विमर्श करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय Central Sanskrit University के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी Shrinivasa Varakhedi ने की। मुख्य वक्ता के रूप में Ashoka University अशोका विश्वविद्यालय, हरियाणा के प्रसिद्ध दार्शनिक एवं विद्वान् प्रो. अरिन्दम चक्रवर्ती
उपस्थित रहे। वहीं विषयविशेषज्ञ के रूप में कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रो. मल्लेपुरम् जी. वेंकटेश ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में परिसर निदेशक प्रो. पी.वी.बी. सुब्रह्मण्यम् ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ईशोपनिषद् भारतीय ज्ञानपरम्परा का अमूल्य ग्रंथ है, जो मानव जीवन को आत्मबोध, समत्व एवं विश्वबंधुत्व का संदेश प्रदान करता है।
मुख्य वक्ता प्रो. अरिन्दम चक्रवर्ती ने ईशोपनिषद् के प्रथम मंत्रों की व्याख्या करते हुए कहा कि यह उपनिषद् मनुष्य को भौतिकता से ऊपर उठकर आत्मिक चेतना की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने भारतीय दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उपनिषदों का चिंतन आज भी सम्पूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक है।
विषयविशेषज्ञ प्रो. मल्लेपुरम् जी. वेंकटेश ने अपने उद्बोधन में उपनिषदों की अध्ययन-पद्धति, पारम्परिक व्याख्यान शैली एवं भारतीय शास्त्रीय परम्परा की विशेषताओं पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने कहा कि उपनिषद् केवल दार्शनिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानवता के लिए जीवन-दर्शन हैं। उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं अध्यापकों से भारतीय ज्ञानपरम्परा के गंभीर अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु निरन्तर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
यह कार्यशाला संस्कृत एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से शोधार्थी, अध्यापक एवं संस्कृतप्रेमी सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन के. मनोज्ञा द्वारा किया गया।
Dharmendra Pradhan Ministry of Education Indian Knowledge Systems, MoE Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna

देवप्रयाग में पुनर्जीवित हो रही संस्कृत शिक्षा की गौरवशाली परंपरादेवप्रयाग।केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्रीरघुनाथ...
18/05/2026

देवप्रयाग में पुनर्जीवित हो रही संस्कृत शिक्षा की गौरवशाली परंपरा
देवप्रयाग।
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्रीरघुनाथकीर्ति परिसर देवप्रयाग Central Sanskrit University, Shri Raghunath Kirti Campus, Devprayag में भारतीय ज्ञान परंपरा Indian Knowledge Systems, MoE
आधारित एक माह की ‘प्रबोधन कार्यशाला’ का भव्य शुभारंभ कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी Shrinivasa Varakhedi
ने किया । इस अवसर पर नवस्थापित श्रीरघुनाथकीर्तिबालगुरुकुलम्’ के नवप्रवेशी छात्रों एवं आचार्यों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi ने कहा कि प्राचीन समय में संस्कृत संस्थानों में प्रारंभिक से उच्च शिक्षा तक की समग्र व्यवस्था होती थी, जो समय के साथ लुप्त हो गई थी। अब श्रीरघुनाथकीर्ति परिसर ने उस गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि इस गुरुकुल में अध्ययन हेतु आए छात्र अत्यंत सौभाग्यशाली हैं और यहां उपलब्ध उत्कृष्ट शिक्षण वातावरण उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि अल्प समय में गुरुकुल को प्रगति के पथ पर अग्रसर करना अत्यंत प्रशंसनीय है। यह परिसर भविष्य में उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश और विश्व में संस्कृत शिक्षा का आदर्श केंद्र बनेगा।
विशिष्ट अतिथि के रुप में Uttarakhand Sanskrit University उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय ने कहा कि नई शिक्षा नीति परंपरा एवं आधुनिकता के समन्वय पर आधारित है,और श्रीरघुनाथकीर्ति बालगुरुकुलम् इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से उपलब्ध सुविधाओ का सदुपयोग कर गंभीर अध्ययन करने का आह्वान किया। निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित इस एक माह की प्रबोधन कार्यशाला में छात्र एवं अध्यापक विभिन्न धर्मशास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित विषयों का अध्ययन करेंगे। इस अवसर पर प्रो.रमाकांत पाण्डेय ने कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी को ‘केदार पंचांग’ एवं ‘केदार मानस पंचांग भेंट किए। दोनों कुलपतियों ने संगम तट पर गंगा स्नान एवं गंगा आरती की। कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने ‘केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय’ नाम पट्टिका का अनावरण भी किया। कार्यक्रम में परिसर के आचार्यगण, छात्र उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शैलेंद्र नारायण कोटियाल ने तथा संचालन कुशाग्र अत्री ने किया।
Dharmendra Pradhan Ministry of Education
#नईशिक्षानीति #संस्कृत #उत्तराखंड #श्रीरघुनाथकीर्ति #प्रबोधनकार्यशाला

देहरादून के लेखक गांव में 'भारतीय ज्ञान परंपरा एवं विकसित भारत में संस्कृत का योगदान' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन म...
17/05/2026

देहरादून के लेखक गांव में 'भारतीय ज्ञान परंपरा एवं विकसित भारत में संस्कृत का योगदान' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में श्री श्री 1008 निरंजन अखाड़ा के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज Swami Kailashanand Giri ji के सान्निध्य में संपन्न हुआ। Central Sanskrit University केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी Shrinivasa Varakhedi ने बतौर विशिष्ट अतिथि भाग ग्रहण किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत Dr Dhan Singh Rawat रहे। अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक Dr.Ramesh Pokhriyal Nishank ने की । इस अवसर पर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के बीच एमयोयु पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय विशिष्ट अतिथि तथा सचिव संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड दीपक गैरोला भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
Dharmendra Pradhan Indian Knowledge Systems, MoE Ministry of Education Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna Uttarakhand DIPR Uttarakhand Tourism
#भारतीयज्ञानपरम्परा #संस्कृत

16/05/2026
काशी में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन वाराणसी।संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं जिल...
13/05/2026

काशी में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन
वाराणसी।
संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में 12 मई 2026 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी के स्वतंत्रता भवन में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व अटूट आस्था की गौरव गाथा’ विषयक भव्य आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन सम्पन्न हुआ। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, सनातन परम्परा, आध्यात्मिक चेतना एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान के अमर संदेश को जन-जन तक पहुँचाने हेतु समर्पित रहा।

इस गरिमामयी अवसर पर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली Central Sanskrit University के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी Shrinivasa Varakhedi ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत एवं सांस्कृतिक चेतना की वैश्विक प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव का शाश्वत प्रतीक है। साथ ही उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से आत्मिक रूप से जुड़ने का प्रेरणादायी संदेश दिया।

संगोष्ठी में परमपूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज (आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा, हरिद्वार), योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज (पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार), स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज (परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश), जगद्गुरु वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी महाराज (अयोध्या), स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराजमहामंडलेश्वर कैलाश मठ काशी निरंजनी अखाडा , श्री मिथिलेश नन्दिनी शरण जी महाराजसिद्ध पीठ हनुमत निवास अयोध्या , स्वामी शंकरचैतन्य ब्रह्मचारी, शंकरपुरी जी महाराज, स्वामी भद्रेश दास जी महाराज, स्वामी विश्वम्भर दास जी महाराज, जगद्गुरु रामानुजाचार्य उद्भव प्रपन्नाचार्य यति स्वामी जी महाराज, स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती जी, साध्वी देवप्रिया जी सहित देशभर से पधारे संत-महात्माओं एवं विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं शिक्षाविदों में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा जी, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के कुलपति प्रो. ए.के. त्यागी जी, Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University के कुलपति
प्रो. मुरली मनोहर पाठक जी, Banaras Hindu University - Varanasi के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी जी तथा दिव्य सेवा मिशन हरिद्वार के डॉ. आशीष गौतम सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भारत की सहस्राब्दियों पुरानी सांस्कृतिक यात्रा, आध्यात्मिक चेतना एवं आत्मगौरव का उत्सव है, जो विश्व को शांति, सद्भाव एवं मानवता का संदेश प्रदान करता है।
इस अवसर पर प्रो. बृजभूषण ओझा
विशाल सिंह (निदेशक, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश), सत्येन्द्र कुमार (जिलाधिकारी, वाराणसी), एस. राजलिंगम (मंडलायुक्त, वाराणसी) एवं अमृत अभिजात (अपर मुख्य सचिव, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश) के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विद्यार्थी, शोधार्थी एवं गणमान्य नागरिक इस प्रेरणास्पद आयोजन के साक्षी बने।
Dharmendra Pradhan Ministry of Education
Ministry of Culture, Government of India
Shrinivasa Varakhedi Indian Knowledge Systems, MoE Swami Ramdev
#भारतीय_संस्कृति #संस्कृत #राष्ट्रीय_स्वाभिमान #सोमनाथ_स्वाभिमान_पर्व

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में “आङ्ग्लभाषामाध्यमस्य भ्रमजालः” पुस्तक का लोकार्पण सम्पन्ननई दिल्ली।केन्द्रीय संस्कृत...
12/05/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में “आङ्ग्लभाषामाध्यमस्य भ्रमजालः” पुस्तक का लोकार्पण सम्पन्न
नई दिल्ली।
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय Central Sanskrit University में संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के तत्वावधान में “The English Medium Myth” के संस्कृत अनुवाद “आङ्ग्लभाषामाध्यमस्य भ्रमजालः” का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया।

यह पुस्तक प्रसिद्ध लेखक श्री सक्रांत सानू द्वारा लिखित “The English Medium Myth” का संस्कृत अनुवाद है, जिसका अनुवाद Central Sanskrit University, Nashik Campus के डॉ. संदीप वसंत जोशी ने किया है।

कार्यक्रम में संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के निदेशक प्रो. चांदकिरण सलूजा ने पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ग्रंथ भारतीय भाषाओं एवं संस्कृत की महत्ता को नई दृष्टि प्रदान करता है। पुस्तक में 20 अध्याय हैं, जिन्हें तीन भागों में विभाजित किया गया है। इसमें भाषा, लिपि, भारतीय संविधान, शब्द चयन तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयो का गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी Shrinivasa Varakhedi ने मातृभाषा आधारित शिक्षा को राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना एवं आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं, विशेषकर संस्कृत, के माध्यम से शिक्षा समाज में आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव को सुदृढ़ करती है।

पुस्तक के लेखक श्री सक्रांत सानू ने अपने विदेश प्रवासों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि विकसित देशों में भी समस्त कार्य मातृभाषाओं में ही होते हैं, इसलिए भारतीयों को अपनी भाषाओं एवं संस्कृत पर गर्व करना चाहिए।

समारोह के दौरान केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं संस्कृत भारती, बेंगलौर के मध्य “ई-भारती संस्कृत ई-ग्रंथालय” परियोजना हेतु महत्वपूर्ण एमओयू भी सम्पन्न हुआ। इस परियोजना के अंतर्गत प्राचीन संस्कृत ग्रंथों के संरक्षण, स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण का कार्य किया जाएगा।

एमओयू समारोह में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रेयांश द्विवेदी तथा संस्कृत भारती के महामंत्री सत्यनारायण भट्ट उपस्थित रहे।
संस्कृत भारती के महामंत्री सत्यनारायण भट्ट ने बताया कि एमओयू के अंतर्गत “ई-भारती संस्कृत ई-ग्रंथालय” परियोजना के माध्यम से प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण, स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण का कार्य किया जाएगा।

कार्यक्रम में देशभर से शिक्षाविद्, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं संस्कृतप्रेमियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
Ministry of Education Dharmendra Pradhan Indian Knowledge Systems, MoE Samskrit Promotion Foundation Samskrita Bharati Shrinivasa Varakhedi
Murali Krishna #संस्कृत #मातृभाषा

चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव के अंतर्गत, चिन्मय विश्वविद्यापीठ में तीन द...
09/05/2026

चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव के अंतर्गत, चिन्मय विश्वविद्यापीठ में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।

सम्मेलन का विषय: “आध्यात्मिकता, शिक्षा और राष्ट्रभक्ति : स्वामी चिन्मयानंद के योगदान और उससे आगे”

सम्मेलन का प्रारंभ स्वामी शारदानंद सरस्वती द्वारा संपन्न गुरु पादुका पूजा से हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन हमारे कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा स्वामी चिन्मयानंद की उस दृष्टि को रेखांकित किया जिसमें आध्यात्मिकता को जीवन के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक माना गया है।

स्वामी तेजोमयानंद ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आध्यात्मिकता और राष्ट्रभक्ति का उद्देश्य अंततः शांति, सद्भाव और सामूहिक प्रगति को बढ़ावा देना होना चाहिए।

इस सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से आए विद्वान, शिक्षाविद्, शोधकर्ता और आध्यात्मिक चिंतक सहभागी बन रहे हैं, जो आध्यात्मिकता, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना जैसे विषयों पर सार्थक संवाद कर रहे हैं।

Ministry of Education Indian Knowledge Systems, MoE Shrinivasa Varakhedi Chinmaya Mission Chinmaya Vishwa Vidyapeeth


07/05/2026

“परदेश में विद्या माता के समान तथा गुप्त धन के रूप में कल्याणकारी होती है।” ✨
विद्या ही वह संपदा है जो हर परिस्थिति में साथ निभाती है।

#भारतीयज्ञानपरंपरा

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