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कर्मयोगियों के संस्कृत संवाद से गूंजा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, ‘कर्मयोगी महोत्सव’ में दिखा उत्साह संस्कृत को कक्ष...
21/08/2026

कर्मयोगियों के संस्कृत संवाद से गूंजा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, ‘कर्मयोगी महोत्सव’ में दिखा उत्साह संस्कृत को कक्षा से निकालकर कार्यस्थल और व्यवहार की भाषा बनाएं प्रो. आरजी मुरली कृष्ण

नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026।
Central Sanskrit University केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रहें संस्कृत सप्ताहोत्सव-2026 के अंतर्गत पंचम दिवस शुक्रवार को ‘संस्कृत कर्मयोगी महोत्सव’ का उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। के.स.विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कर्मयोगियों ने संस्कृत में अपना परिचय देने के साथ गीत, स्तुति एवं श्लोक प्रतियोगिताओं में भाग लेकर प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कर्मयोगियों की सहभागिता से परिसर संस्कृतमय हो उठा।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. Murali Krishna
आरजी. मुरली कृष्ण ने कहा कि संस्कृत को केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन और कार्यस्थल की भाषा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत का प्रयोग कठिन नहीं है, इसकी शुरुआत दैनिक व्यवहार में प्रयुक्त होने वाले सरल शब्दों और छोटे-छोटे वाक्यों से की जा सकती है। उन्होंने कर्मयोगियों से संस्कृत को केवल सप्ताहोत्सव तक सीमित न रखते हुए वर्षभर अपने व्यवहार में अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कर्मयोगियों का संस्कृत से जुड़ाव विद्यार्थियों और समाज तक भी सकारात्मक संदेश पहुंचाता है तथा संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल, आदर्श योजना प्रभारी प्रो. कुलदीप शर्मा, कार्यक्रम संयोजिका डॉ. अमृता कौर एवं सह-संयोजक डॉ. योगेंद्र दीक्षित ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए।
प्रतियोगिताओं में डॉ. प्रमोद बुटोलिया एवं डॉ. के मनोज्ञा ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम का मंच-संचालन विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने किया।
Shrinivasa Varakhedi Shrinivasa Varakhedi
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अत्यावश्यक जनहित सूचनाफर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से सावधानसर्वसाधारण, विशेषतः विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों,...
21/08/2026

अत्यावश्यक जनहित सूचना

फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से सावधान

सर्वसाधारण, विशेषतः विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अभिभावकों को सूचित किया जाता है कि संलग्न चित्र में प्रदर्शित नाम एवं छायाचित्र का उपयोग कर बनाया गया सोशल मीडिया/Facebook अकाउंट माननीय कुलपति Shrinivasa Varakhedi Shrinivasa Varakhedi जी
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अतः ऐसे किसी भी फर्जी (Fake) सोशल मीडिया अकाउंट से प्राप्त संदेश, Friend Request, Messenger Call अथवा मोबाइल नम्बर, व्यक्तिगत जानकारी, OTP, धनराशि या अन्य विवरण माँगने वाले अनुरोध पर विश्वास न करें और न ही कोई जानकारी साझा करें।

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कृपया स्वयं सतर्क रहें तथा अन्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अभिभावकों को भी इस सम्बन्ध में सचेत करें।

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जनहित में जारी।
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गुरुकुल छात्रों ने कंठस्थ सुनाए भगवद्गीता के सम्पूर्ण श्लोक, संस्कृत सप्ताहोत्सव में जीवंत हुई शास्त्र-साधनानई दिल्ली। 2...
20/08/2026

गुरुकुल छात्रों ने कंठस्थ सुनाए भगवद्गीता के सम्पूर्ण श्लोक, संस्कृत सप्ताहोत्सव में जीवंत हुई शास्त्र-साधना

नई दिल्ली। 20 अगस्त 2026

संस्कृत सप्ताहोत्सव-2026 के चतुर्थ दिवस आयोजित ‘संस्कृत गुरुकुल महोत्सव’ में गुरुकुल छात्रों ने अपनी अद्भुत स्मरणशक्ति, शुद्ध उच्चारण और संस्कृत के प्रति समर्पण से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यार्थियों ने श्रीमद्भगवद्गीता के द्वादश अध्याय के सम्पूर्ण श्लोकों का कंठस्थ एवं सस्वर पाठ प्रस्तुत कर शास्त्र-साधना की जीवंत परंपरा को मंच पर साकार किया। संस्कृत भाषण, आशुभाषण तथा रघुवंश के प्रथम सर्ग के श्लोक-पाठ में भी विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन किया।

कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi श्रीनिवास वारखेड़ी ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें संस्कृत-अध्ययन, अनुशासन एवं निरंतर परिश्रम के लिए प्रेरित किया।
गुरुकुलों की यह प्रतिभा संस्कृत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जीवंत संदेश है।
Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna
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20/08/2026
संस्कृत ग्रंथों में वृद्धावस्था की भारतीय जीवन-दृष्टि का अध्ययन करेंगी अमेरिकी  मनोविज्ञान प्रोफेसर, डॉ ज्योत्सना (जोसी)...
20/08/2026

संस्कृत ग्रंथों में वृद्धावस्था की भारतीय जीवन-दृष्टि का अध्ययन करेंगी अमेरिकी मनोविज्ञान प्रोफेसर, डॉ ज्योत्सना (जोसी) कलावर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के परिसरों का करेंगी दौरा

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026। संस्कृत साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित जीवन-दृष्टि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वृद्धावस्था के अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। अमेरिका के Georgia Gwinnett College (GGC) की मनोविज्ञान प्रोफेसर एवं जेरोन्टोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. ज्योत्सना (जोसी) कलावर भारत में दो महीने रहकर अध्ययन विराम के इस काल में वह अपने अध्ययन के लिए केसंविवि को चुना हैं । डा ज्योत्स्ना कलावर एक प्रतिष्ठित मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता तथा प्राध्यापक है। संस्कृत ग्रंथों और भारतीय परंपराओं में वृद्धावस्था से जुड़े दृष्टिकोण, जीवन के उत्तरार्ध के संस्कारों तथा आध्यात्मिक विधानों का अध्ययन करेंगी। शोध के दौरान वह Central Sanskrit University केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (केसंविवि), नई दिल्ली के विभिन्न परिसरों के साथ बेंगलुरु स्थित पूर्णप्रज्ञ संशोधन मन्दिरम् का भी दौरा करेंगी।

डॉ. कलावर प्रतिष्ठित मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता एवं जेरोन्टोलॉजी विशेषज्ञ हैं तथा Gerontological Society of America की फेलो हैं। संस्कृत भाषा में दक्षता रखने वाली डॉ. कलावर का शोध विभिन्न संस्कृतियों में वृद्धावस्था को देखने के दृष्टिकोण, जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर किए जाने वाले संस्कारों तथा आध्यात्मिक परंपराओं की भूमिका को समझने पर केंद्रित है।

भारतीय और पश्चिमी दृष्टिकोण का होगा तुलनात्मक अध्ययन

डॉ. कलावर भारतीय और पश्चिमी समाजों में वृद्धावस्था तथा जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को मनाने की परंपराओं का तुलनात्मक अध्ययन करेंगी। उनके अनुसार पश्चिमी समाजों में महत्वपूर्ण जन्मदिवस प्रायः सामाजिक उत्सव के रूप में मनाए जाते हैं, जबकि भारतीय परंपरा में जीवन के ऐसे पड़ाव परिवार की विभिन्न पीढ़ियों को जोड़ने वाले अनुष्ठानों से जुड़े रहे हैं। इनमें क्षमा, कृतज्ञता और शांतिपूर्ण जीवन के लिए प्रार्थना जैसे भाव प्रमुख रहे हैं।

शोध में यह भी अध्ययन किया जाएगा कि समय के साथ इन परंपराओं में किस प्रकार परिवर्तन आया है तथा वैश्वीकरण, आधुनिकीकरण और बदलती पारिवारिक संरचनाओं ने वृद्धावस्था के अनुभव को किस तरह प्रभावित किया है।

संस्कृत के मूल स्रोतों से समझेंगी भारतीय जीवन-दृष्टि

शोध यात्रा के दौरान डॉ. कलावर को संस्कृत पांडुलिपियों के महत्वपूर्ण संग्रहों तक पहुंच के साथ वैदिक विद्वानों, हिंदू पुरोहितों और संस्कृत पंडितों से संवाद का अवसर मिलेगा। संस्कृत में दक्षता के कारण वह मूल ग्रंथों में प्रयुक्त शब्दों, श्लोकों और पारिभाषिक अवधारणाओं का उनके मूल संदर्भ में अध्ययन कर सकेंगी। इससे भारतीय परंपराओं के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भ तथा वृद्धावस्था से उनके संबंध को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलेगी।

वृद्धावस्था से जुड़े भारतीय संदर्भों पर डॉ. कलावर पूर्व में भी शोध कर चुकी हैं। उनके प्रकाशित अध्ययन में हिंदू परंपरा में जीवन के उत्तरार्ध से जुड़े संस्कारों, विशेष रूप से षष्ट्यब्दिपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण अवसरों का अध्ययन किया गया है।

“वृद्धावस्था केवल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया नहीं”

डॉ. कलावर के अनुसार वृद्धावस्था को केवल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि जीवनभर अर्जित अनुभवों के संचय के रूप में देखने की आवश्यकता है। जीवन के अनुभव व्यक्ति में करुणा, प्रज्ञा और अहंकार से परे जीवन-दृष्टि विकसित करने में सहायक हो सकते हैं। समाज वृद्धावस्था को जिस दृष्टि से देखता है, उसका प्रभाव बुजुर्गों के प्रति व्यवहार के साथ-साथ व्यक्ति द्वारा अपने जीवन के उत्तरार्ध को देखने के तरीके पर भी पड़ता है।

उन्होंने बदलते भारतीय पारिवारिक परिवेश की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। पहले बहु-पीढ़ी वाले परिवारों में बुजुर्गों का साथ रहना सामान्य था, लेकिन वर्तमान में निजता, स्वतंत्रता, आर्थिक परिस्थितियों और बदलती जीवनशैली के कारण पारिवारिक संरचनाओं में बदलाव आया है। अनेक बुजुर्ग अब परिवार के निकट रहते हुए अलग घर में रहना पसंद करते हैं, वहीं सेवानिवृत्ति समुदायों की अवधारणा भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।

भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ने का प्रयास

डॉ. कलावर का यह अध्ययन संस्कृत ग्रंथों में निहित वृद्धावस्था संबंधी भारतीय दृष्टिकोण को आधुनिक जेरोन्टोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विमर्श से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों में अध्ययन और विद्वानों से संवाद के माध्यम से उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध पक्षों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा।

यह शोध न केवल भारतीय और पश्चिमी समाजों में वृद्धावस्था की अवधारणाओं के तुलनात्मक अध्ययन को आगे बढ़ाएगा, बल्कि संस्कृत साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन वैश्विक प्रासंगिकता को भी रेखांकित करेगा। साथ ही, इससे GGC के विद्यार्थियों को विभिन्न संस्कृतियों में वृद्धावस्था के अनुभवों को समझने और वैश्विक समुदायों के साथ कार्य करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता मिलेगी।
Ministry of Education Indian Knowledge Systems, MoE Pralhad Joshi Shrinivasa Varakhedi Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna

20/08/2026
संस्कृत के साथ AI और नवाचार का संगम, युवा महोत्सव में दिखी नई पीढ़ी की प्रतिभा युवा शक्ति के रंग में रंगा संस्कृतसप्ताहो...
19/08/2026

संस्कृत के साथ AI और नवाचार का संगम, युवा महोत्सव में दिखी नई पीढ़ी की प्रतिभा युवा शक्ति के रंग में रंगा संस्कृतसप्ताहोत्सव-2026, आधुनिक तकनीक के साथ संस्कृत का अभिनव संगम

नई दिल्ली।
Central Sanskrit University केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में चल रहें संस्कृतसप्ताहोत्सव-2026 के अंतर्गत युवा महोत्सव में संस्कृत, युवा ऊर्जा, सृजनशीलता, तकनीक और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिला। दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. स्तर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

मिरांडा हाउस, माता सुंदरी कॉलेज, रामजस कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषण, संस्कृत गीत तथा संस्कृत एवं AI आधारित लघु चलचित्र निर्माण जैसी प्रतियोगिताओं में अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi
श्रीनिवास वरखेड़ी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनके अनुभव सुने और उन्हें संस्कृत अध्ययन, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं की सक्रिय सहभागिता को संस्कृत के उज्ज्वल भविष्य का महत्वपूर्ण संकेत बताया।

छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों, शैक्षणिक अवसरों एवं छात्र कल्याण योजनाओं की जानकारी दी तथा संस्कृत के साथ आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के समन्वय पर बल दिया।

कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. अमृता कौर एवं सह-संयोजक डॉ. योगेंद्र दीक्षित के संयोजन में आयोजित युवा महोत्सव ने यह संदेश दिया कि संस्कृत केवल परंपरा और प्राचीन ज्ञान की भाषा ही नहीं, बल्कि AI, तकनीक, रचनात्मकता और आधुनिक ज्ञान-विमर्श की भी प्रभावी भाषा बन रही है।

समापन अवसर पर डीन अकादमिक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ. अनमोल शर्मा, SCERT की डॉ. मनीषा तनेजा, दिल्ली विश्वविद्यालय के CIE से डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार तथा आंतरिक निर्णायक के रूप में डॉ. विजय दाधीच, डॉ. प्रमोद बुटोलिया एवं डॉ. चक्रधर मेहर, डॉ रमण मिश्र
शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने किया।
युवा प्रतिभा + संस्कृत + AI + नवाचार = संस्कृत के उज्ज्वल भविष्य की नई तस्वीर!
Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna Ministry of Education Indian Knowledge Systems, MoE
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उत्कर्ष महोत्सव–२०२६ | ज्ञान, परम्परा और नवचिन्तन का आयोजन Central Sanskrit University National Sanskrit University, Tir...
19/08/2026

उत्कर्ष महोत्सव–२०२६ | ज्ञान, परम्परा और नवचिन्तन का आयोजन
Central Sanskrit University National Sanskrit University, Tirupati Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित उत्कर्ष महोत्सव–२०२६ का प्रथम दिवस आज ज्ञान, विद्वत्ता और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण रहा।

भारतीय ज्ञान-परम्परा, संस्कृत, दर्शन एवं शास्त्रीय चिन्तन के विविध आयामों पर प्रतिष्ठित विद्वानों द्वारा विद्वत्-विमर्श एवं शोध-पत्र प्रस्तुतियाँ की गईं। इस अवसर पर ग्रन्थ-विमोचन, विद्वानों का सम्मान तथा विभिन्न अकादमिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सम्पन्न हुए।

उद्घाटन समारोह में भारत सरकार के माननीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री Arjun Ram Meghwal अर्जुन राम मेघवाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में प्रो. मुरलीमनोहर पाठक, कुलपति, श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय; तथा प्रो. जी.एस.आर. कृष्ण मूर्ति, कुलपति, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपतिप्रो सर्वनारायण झा सहित अनेक प्रतिष्ठित विद्वानों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने पर अनादि संस्था तमिलनाडु, शंकराचार्य संस्कृत कन्याआश्रम खंडामल ओड़िशा,संस्कृत संवाद समाचार पत्र नई दिल्ली, रसना संस्कृत पत्रिका केरल, द्वीपान्तरसंस्कृतप्रतिष्ठानम् बाली इंडोनेसिया
इन पांचो संस्थाओं का सम्मान किया गया है और सभी की संस्थाओं को एक लाख ₹100000 की राशि प्रदान कर उत्कर्ष सम्मान से सम्मानित किया गया है

संध्या सत्र में छह विद्वानों को ‘प्राच्यविद्याभूषण’ सम्मान से सम्मानित किया गया तथा महापरीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी का भी अभिनन्दन किया गया। इसके पश्चात् पद्मश्री सम्मानित डॉ. शोभा राजू द्वारा अन्नमर्य संकीर्तनम् की मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।

📍 राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति
📅 १९–२० अगस्त २०२६

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