15/02/2025
मैं मीरान हैदर हूँ (जेल डायरी)
मैं मीरान हैदर बोल रहा हूँ । हाँ वही मीरान हैदर जो 4 साल 10 महीने 15 दिन यानी 1782 दिन,153,964,800 सेकेंड, 2,566,080 मिनट,42,768 घण्टें, 254 सप्ताह 4 दिन सलाखों में कैद हूँ । 1 अप्रैल, 2020 को 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ़्तार किया। धार्मिक रूप से भेदभावपूर्ण नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) का विरोध करने वाले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के लिए निशाना बनाया गया था।
आज मेरा जन्मदिन है। मुझे अपने घर की अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की बहुत याद आ रही है। जब मैं आपकी तरह आज़ाद था जब खुली फ़िज़ा में सांस ले रहा था। तब अपने जन्मदिन को बहुत धूमधाम से तो नहीं, लेकिन सामान्य तरीके से घरवालों के साथ, दोस्तों के साथ एक केक काटकर मनाता था। मेरे लिए सबसे खुशी की बात ये होती थी, मेरी बहन बेसब्री से मेरा इंतेज़ार करती थी। जबकि वो जानती थी कि मैं परिवार से ज़्यादा समय सामजिक कार्यों में लोगों की मदद करने में गुजार देता था। घर वाले हमेशा मुझे कहते थे देख लेना एक दिन सब तुम्हें अकेला छोड़ देंगे। मैं बार-बार कहता था। ऐसा नहीं होगा लोग मेरी कुर्बानी को याद रखेंगे। ये मेरा घमंड था या लोगों पर विश्वास वो आप तय कीजिए ? खैर! मेरी बहन फिर भी मेरे जन्मदिन के मौके पर घर जितना हो सकता था बेहतर इंतज़ाम करती थी। 5 साल से न वो केक का टेस्ट मिला न वो प्यार मिला न दोस्तों का साथ। जन्मदिन क्या होता है ? जेल में एक याद के सिवा कुछ महसूस नहीं करता हूँ। लेकिन ये बात ज़रूर है अन्य कैदियों के साथ बिस्किट का केक बनाया काटने में अलग ही मज़ा है। जेल का यह केक जीवन का सबसे खूबसूरत और स्वादिष्ट केक होता है। हम कैदी लोग बड़े आशावादी है। दीवारों के होल से आने वाली सूरज की छोटी सी किरण में ज़िन्दगी की रौशनी तलाश लेते हैं। रात के अंधेरे से डरने वालों के लिए यहां की रात बहुत भयानक और खतरनाक हो सकती है. उन्हें नींद नहीं आएगी, रात के सन्नाटे में तरह-तरह के जानवरों और पक्षियों की आवाजें सुनता हूँ और सबको पहचाने की कोशिश करता हूँ। जेल जीवन के दौरान जेल की चिल्ल-पो, लड़ाई-झगड़े, टीवी की ऊंची आवाज के कारण मुझे कई बार लगा कि ‘काश मुझे बैरक से अलग रहने की जगह मिल जाए’
हालांकि उस समय भी यह चाहत डराने लगती थी और मैं इसे झटक देता हूँ। कई हफ्तों तक बुखार के साथ-अलग थलग पड़ा रहना और काफी कमज़ोर हो जाना, लेकिन जेल में अपने को ज़िंदा रखना और आशावादी बने रहना भी एक काम होता है, मैंने कहा हम कैदी ना बहुत आशावादी लोग हैं! कैद की ज़ंजीर टूटने का इंतज़ार करते है। लेकिन हिम्मत को टूटने नहीं देते है। खुद को ज़िंदा रखने के लिए उसी झुंड का हिस्सा बन जाते है। लेकिन जानते है?
राजनीतिक अपराध और सामाजिक अपराध की दो बिल्कुल अलग दुनिया है. सामाजिक अपराध पुलिस वालों की न्याय व्यवस्था को, जेल प्रशासन को सहज स्वीकार्य है, वे उन्हें कोई भी सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन राजनीतिक अपराध सबसे बड़ा अपराध है, जिसके कारण किसी को सारे मानवीय संबंधों और अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है. फिर भी हम जैसे राजनैतिक अपराधी अपना फ़र्ज़ नहीं भूलते है। यहां भी हम अपना काम शुरू कर देते
लोगों के आवेदन लिखने, उनकी चार्जशीट पढ़कर केस को समझने और समझाने में, उन्हें कानूनी सलाह देने में वे इतनी व्यस्त हो जाते है। लेकिन यातना तो यातना है।
हमने ये नोटिस किया कि बच्चों के लिए जेलें बेहद क्रूर जगह हैं, क्योंकि ये बच्चों को उनकी कल्पना के सभी स्रोतों से काट देती हैं, रात में बैरक में बंद हो जाने के नाते वे चांद और तारों को नहीं पहचानते (क्या आप इसकी कल्पना कर सकते थे?).
हम जैसे लोगों से ये सरकार डरती है, इसीलिए उन्हें जेल भेजती है, जो लोग भी जन्म से मिले अपने ‘लोकतांत्रिक स्पेस’ को छोड़कर वंचितों के लोकतंत्र के लिए लड़ते हैं और इस तरह देश को पूर्ण लोकतंत्र की ओर बढ़ाते हैं, वो लोग देश का अभिमान होने चाहिए, लेकिन सरकार उन्हें ‘देशद्रोही’ कहती है और उनके अधिकार में सबसे अधिक कटौती करती है.
उम्मीद है उनका निर्वासन टूटेगा, वे खुलकर लिख बोल सकेंगे, यह मुकदमा ढह जाएगा और इस मुकदमे से जुड़े सभी लोग आज़ाद होंगे ।।
धन्यवाद
आपका मीरान हैदर
तिहाड़ सेंटर जेल दिल्ली
R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल Swara Bhasker AIMIM गोपालगंज बिहार Meeran Haider Tejashwi Yadav SIO of India All India Muslim Bedari Karwan Jamia Millia Islamia, New Delhi