Ekal Bhartiya Sanskriti Vishwa Vidhyalaya

Ekal Bhartiya Sanskriti Vishwa Vidhyalaya Invite views of members on HIND SWARAJ AND GANDHIAN PRINCIPLES CRITICISM WELCOME BASED ON PRINCIPLES AND POLICIES INSTEAD OF BLAME GAME AND LEG PULLING.

WORK FOR ALL THROUGH BARTER SYSTEM, GANDHIAN POLICIES UNDERSTANDING THROUGH PROPER COMMUNICATION. CORRECTION OF WRONG BELIEF ABOUT GANDHIAN IDEAS AND MAKING HIM RESPONSIBLE FOR EVERYTHING WITHOUT PRACTICING AND FOLLOWING HIM. SHAME TO MATERIALISM AND CONSUMERISM. LOVE TO HUMANITY AND BROTHERHOOD JOINT FAMILY INDIAN CULTURE.

05/06/2026

🕊️ ये रियाज़ुद्दीन मंसूरी हैं। 🙏

📍 दिल्ली के मालवीय नगर के जिस होटल में बीते रोज़ आग लगने की वजह से 21 लोगों की जान चली गई थी, रियाज़ुद्दीन की उसी होटल के सामने ही रजाई-गद्दों की दुकान है। 🏨🔥

🏠 वे हौजरानी में पिछले 45 वर्षों से रहते हैं। जब होटल में आग लगी तो लोगों की चीख-पुकार सुनकर वे भी मौके पर पहुंचे। 🚨

🛏️ उन्होंने अपनी दुकान के सारे गद्दे सड़क पर बिछा दिए।

रियाज़ुद्दीन ने NDTV से बताया कि वे खुद सिविल डिफेंस में रह चुके हैं। 👨‍🚒 उन्हें पता है कि आग लगने पर लोगों को कैसे बचाया जा सकता है।

🔥 इसी के चलते आग लगने पर उन्होंने तुरंत खिड़की तोड़ी और सड़क पर गद्दे बिछा दिए, ताकि लोग ऊपर से कूदें तो उन्हें ज्यादा चोट न लगे। 🪟➡️🛏️

💬 उन्होंने कहा कि आज उनकी दुकान खाली हो गई है, लेकिन उन्हें सुकून है कि इंसान बच गए।

❤️ रियाज़ुद्दीन का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपए के गद्दे लोगों को बचाने के लिए बिछा दिए। उन्हें सुकून है कि गद्दों की वजह से 8-12 लोगों की जान बच गई और उन्हें सिर्फ मामूली चोट आई।

🤝 इंसानियत को बचाने की यह घटना उसी दिल्ली में सामने आई है, जिस दिल्ली में आपसी रंजिश में हुई एक हत्या का दोष पूरे समुदाय पर मढ़ने का षड्यंत्र किया गया, और हाल ही में दिल्ली से सटे ग़ाज़ियाबाद के खोड़ा में ‘सूर्या’ हत्याकांड के बाद पूरे समुदाय के खिलाफ भड़काऊ बयानबाज़ी और नफ़रत फैलाने का षड्यंत्र जारी है।

❓ अब सवाल यह है कि जब एक शख्स के आपराधिक कृत्य का दोष पूरे समुदाय पर मढ़ने का षड्यंत्र रचा जाता है, तब रियाज़ जैसे इंसानियत के मसीहा की इंसानियत को बचाने की जद्दोज़हद को उस समुदाय से क्यों नहीं जोड़ा जाता?

🤔 जो संगठन किसी ‘अपने’ को ‘दूसरे’ द्वारा मार दिए जाने के बाद उग्र होकर नफ़रत फैलाते हैं, वे संगठन रियाज़ जैसे मसीहाओं को पलकों पर क्यों नहीं बैठाते?

📖 कहावत है कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।

🌹 रियाज़ जैसे लोग इंसानियत के मसीहा हैं।

🫡 इन मसीहाओं को दिल से सलाम।

03/06/2026
03/06/2026

🇮🇳 हेमू कालानी, जो कि एक युवा क्रांतिकारी थे, को 21 जनवरी 1943 को ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी दे दी गई थी। ⚔️

उनकी शहादत के वर्षों बाद उनकी माताजी, श्रीमती जड़ी बाई, को सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। 🇮🇳

🎖️ मंच पर जब शहीद की माताजी को सम्मानित किया जा रहा था, तब उनके त्याग और बलिदान को देखकर श्रीमती इंदिरा गांधी अत्यंत भावुक हो गईं। उसी क्षण उन्होंने जो शब्द कहे, वे इतिहास में दर्ज हो गए। उन्होंने नम आंखों से कहा था—

🙏 "मैं आज देश की प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक साधारण नागरिक के रूप में इस महान मां के चरणों में खड़ी हूं। एक शहीद की मां का स्थान इतना ऊंचा है कि उनके सामने मैं स्वयं को बहुत छोटा महसूस कर रही हूं।"

🌹 इस कथन के माध्यम से इंदिरा गांधी ने यह संदेश दिया कि देश के लिए अपने पुत्र को हंसते-हंसते कुर्बान कर देने वाली मां का दर्जा किसी भी पद और प्रतिष्ठा से कहीं ऊपर होता है।

🫡 यह घटना दर्शाती है कि कैसे हेमू कालानी जैसे क्रांतिकारियों का बलिदान पूरे देश को और देश के शीर्ष नेतृत्व को गहराई से प्रभावित करता था।

❤️ हेमू कालानी की मां, जड़ी बाई, ने न केवल अपने पुत्र को खोया था, बल्कि उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ अपने बेटे के उस मार्ग का समर्थन किया जो उसने देश की आजादी के लिए चुना था।

🇮🇳 यह क्षण इस बात का प्रमाण है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में माताओं का योगदान कितना महत्वपूर्ण था और राष्ट्र उनके इस अविस्मरणीय त्याग को सदैव नतमस्तक होकर याद करता है।

🔥 1943 में जिसने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा, उनकी मां का त्याग आज भी हम भारतीयों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।

❓ क्या आपको लगता है कि आज की पीढ़ी अपने देश के इन अनसुने क्रांतिकारियों को भूल रही है?

👇 नीचे कमेंट में 'जय हिंद' लिखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें और इस गौरवशाली इतिहास को हर भारतीय तक पहुंचाएं! 🫡🇮🇳

📌 डिस्क्लेमर: यह पोस्ट ऐतिहासिक जानकारी और जन-श्रुतियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल शहीदों के बलिदान को याद करना है।





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