08/05/2026
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है।" 8 साल की उम्र में इतिहास रचकर इस बच्चे ने यह सच कर दिखाया।
शतरंज (Chess) का इतिहास उतना ही गहरा और रणनीतिक है जितनी कि इसकी चालें। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस वैश्विक खेल की जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं।
यहाँ शतरंज के सफर के कुछ मुख्य पड़ाव दिए गए हैं:
1. प्राचीन शुरुआत: चतुरंग (Chaturanga)
शतरंज का जन्म लगभग 6वीं शताब्दी (Gupta Empire) के दौरान भारत में हुआ था। उस समय इसे 'चतुरंग' कहा जाता था।
'चतुरंग' का अर्थ है "सेना के चार अंग": पैदल सेना (प्यादा), घुड़सवार (घोड़ा), हाथी (ऊंट/फील), और रथ (किश्ती/हाथी)।
यह खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि युद्ध की रणनीति सिखाने का एक तरीका माना जाता था।
2. फारस और अरब की यात्रा (Shatranj)
भारत से यह खेल सिल्क रोड के जरिए फारस (Persia) पहुँचा, जहाँ इसका नाम बदलकर 'शतरंज' हो गया।
यहीं से "शाह मात" (Shah Mat) शब्द आया, जिसका अर्थ है "राजा की हार" या आज का 'Checkmate'।
7वीं-8वीं शताब्दी में जब अरबों ने फारस पर विजय प्राप्त की, तो वे इस खेल को मुस्लिम जगत और फिर स्पेन के जरिए यूरोप ले गए।
3. आधुनिक शतरंज का जन्म (15वीं शताब्दी)
यूरोप पहुँचने के बाद खेल के नियमों में बड़े बदलाव हुए:
वजीर (Queen): पहले यह मोहरा बहुत कमजोर था, लेकिन 15वीं शताब्दी के अंत में इसे बोर्ड का सबसे शक्तिशाली मोहरा बना दिया गया।
बिसात की रफ्तार: खेल को और तेज बनाने के लिए प्यादों (Pawns) को पहली चाल में दो घर चलने की अनुमति दी गई।
लगभग 1475 के आसपास, यह खेल उस रूप में आ गया जिसे हम आज खेलते हैं।
4. ग्रैंडमास्टर्स और विश्व चैंपियनशिप
पहला आधिकारिक विश्व चैंपियन: 1886 में विल्हेम स्टेनिट्ज़ (Wilhelm Steinitz) दुनिया के पहले आधिकारिक वर्ल्ड चेस चैंपियन बने।
रूस का दबदबा: 20वीं सदी के मध्य में सोवियत संघ ने चेस पर राज किया, जिसमें गैरी कास्पारोव और अनातोली कारपोव जैसे दिग्गज शामिल थे।
भारतीय गौरव: भारत के विश्वनाथन आनंद ने 2000 में पहली बार विश्व चैंपियन बनकर भारत को फिर से चेस के नक्शे पर मजबूती से खड़ा कर दिया।