06/08/2019
#चिड़िया_उड़ #यादें
यहाँ अमेरिका में एक प्राइवेट कंपनी के तहत एक क्लाइंट के यहाँ कार्यरत हूं, अमरीका में अधिकतर सभी भौतिक सुविधाएं है। बिजली और पानी शायद कभी नहीं जाता । अगर किसी दिन बिजली-पानी का कुछ दिक्कत भी तो पहले अलर्ट आ जाते है। तो कुल मिलाकर लाइट जाना क्या होता है ये भूल सा गया था । अक्सर ऑफिस से घर आकर टीवी देखने लगता हूं और फिर ऐसे ही रात हो जाती है ,सो जाते है । ऐसे ही एक दिन ऑफिस से घर पहुंचा तो पता चला कि भारी बारिश का एलर्ट है और शायद रात में लाइट न रहे । शाम हुई , बारिश जोरो से होने लगी और अचानक लाइट भी चली गयी। मैंने अपनी मैनेजर को मैसेज किया कि आज बिजली नहीं है तो आज रात ऑफिस की कॉल्स में भाग नहीं ले पाउँगा और आराम से बैठ गया ।
बहुत तेज बारिश हो रही थी, मेरी २ साल की बिटिया मेरे पास ही बैठी थी । मैं समझ नहीं पा रहा था परन्तु एक अजीब सी एक खुशी महसूस महसूस हो रही थी, पुरानी यादो में जाने लगा। सोचते लगा की जब हम छोटे थे तो हम क्या करते थे, तब ध्यान आया कि लाइट चले जाने पर पूरे मोहल्ले के बच्चे साथ में खेलते थे ।
क्या ……
जैसे ऊंच नीच का पापड़ा ,नीली पीली साड़ी , छुपन- छुपाई इत्यादि । उसमे से एक खेल था चिड़िया उड़, तोता उड़ जिसमें पशु पक्षियों के नाम लेकर हाथ को ऊपर उठाया जाता था और सही से न करने वाले की पिटाई होती थी (दोस्ती में 😛 )
मुझे कुछ कुछ एहसास हो रहा था की ये धीमी सी खुशी क्या थी, अब मुझे समझ आ रहा था कि कितने सालों बाद लाइट चले जाने पर मैं खुद को आजाद सा महसूस कर रहा था क्योकि आज टीवी ,कंप्यूटर, मोबाइल सब बंद थे। मैंने अपनी बेटी की तरफ देखा, वो हमेशा की तरह मुझे देख कर हॅंस रही थी ।दो साल के नन्हे अल्हड़पन की चंचलता का बयान मैं शब्दों में तो नहीं कर सकता । मैंने उसको चिड़िया उड़ सिखाना शुरू किया परन्तु अंग्रेजी की तरफ बढ़ती दुनिया को मद्देनजर वो चिड़िया उड़ को अपनी तुतलाती जबान से बर्ड्स फ्लाई, हॉर्स फ्लाई ही बोल पाई, और अगर में हॉर्स फ्लाई कर देता ,तो मुझे नो कहकर सही करती ।उस दिन से मेरी बेटी का सोने से पहले का पसंदीदा खेल है।बर्ड फ्लाई और पैरेट फ्लाई होने के बावजूत खेल का नाम उसके लिए "चिड़िया उड़" ही है । वो रोज रात में प्रतीक्षा करती है कि कब पापा "चिड़िया उड़" खेलने को कहेंगे ।
कभी-कभी कुछ ना होने का एहसास भी बहुत कुछ दे जाता है। मैं आज भी शुक्रगुजार हूं उन पलों का जिसमें मुझे चिड़िया उड़, तोता उड़ खेलना आया क्योकि आज मेरी बेटी कि मुस्कान का हिस्सा है । मुझे ये तो याद नहीं की सबसे पहली बार किसके साथ ये खेल खेला था लेकिन हाँ एक अंकल जी है जिनके यहां हम कभी किराए पर रहते थे शायद ये खेल को मुझ से अवगत कराने वाले वो ही है, जिनके साथ मैंने ये खेल बहुत बार खेला है ।
नमन है उनको आज ।
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अपने कुछ खास दोस्तों तो उनका फ़ोन नंबर पता करने को कहा है, उनसे बात करके इस अहसास को साझा करने का मन है …………………..