19/08/2026
दिनांक 19 अगस्त 2026 को विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में पंचम अंतर्राष्ट्रीय छायाचित्र प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया । “ द शैडो ऑफ नेचर एंड हेरिटेज विषय पर केंद्रित छायाचित्र प्रदर्शनी में प्रकृति, पक्षियों, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मनोहारी छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया । प्रदर्शनी में देश-विदेश के विभिन्न छायाकारों द्वारा खींचे गए छायाचित्रों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया ।
प्रदर्शनी का उद्घाटन महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) भूपेश के. गोयल, ए.वी.एस.एम (सेवानिवृत्त) ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया ।
उद्घाटन के पश्चात कुलपति ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न छायाचित्रों का अवलोकन किया और छायाकारों की रचनात्मक दृष्टि की सराहना की। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी केवल किसी दृश्य को कैमरे में कैद करने की कला नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी केवल तस्वीर खींचने की कला नहीं, बल्कि दृष्टि, संवेदना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम है। एक अच्छी तस्वीर किसी क्षण, भावना, संस्कृति अथवा प्राकृतिक सौंदर्य को लंबे समय तक स्मृति में जीवंत रखने की क्षमता रखती है। छात्रों को संबोधित करते हुए कुलपति ने फोटोग्राफी को एक रचनात्मक हॉबी के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी विद्यार्थियों की छिपी हुई रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति, वन्यजीवन, ऐतिहासिक स्मारकों, कला, संस्कृति तथा मानवीय भाव-भंगिमाओं को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान करती है ।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि फोटोग्राफी शुरू करने के लिए महंगे कैमरे का होना आवश्यक नहीं है। वे अपने स्मार्टफोन में उपलब्ध कैमरे से ही अभ्यास प्रारंभ कर सकते हैं और अनुभव एवं रुचि बढ़ने के साथ आगे चलकर डी.एस.एल.आर अथवा मिररलेस कैमरे का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को फोटोग्राफी में प्रयोग, धैर्य और निरंतर अभ्यास का महत्व समझाया ।
कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले वर्ष अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में प्रदर्शित अधिकांश तस्वीरें महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा स्वयं खींची गई होंगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर अवसर उपलब्ध कराता रहेगा।कुलपति ने विद्यार्थियों और उपस्थित दर्शकों से संवाद करते हुए प्रकृति एवं पक्षियों के अपने द्वारा खींचे गए छायाचित्रों से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रकृति और पक्षियों का छायांकन धैर्य, संवेदनशीलता और सूक्ष्म निरीक्षण की मांग करता है। एक अच्छा छायाचित्र उस क्षण को जीवंत बना देता है, जो समय बीतने के बाद भी अपनी कहानी कहता रहता है। प्रदर्शनी में प्रकृति के विविध रंगों, पक्षियों की गतिविधियों, प्राकृतिक परिवेश तथा भारतीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली। छायाचित्रों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और विरासत के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों और कला एवं फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले दर्शकों ने प्रदर्शनी का उत्साहपूर्वक अवलोकन किया। प्रदर्शनी के संयोजक राज्य ललित कला अकादमी संस्कृति विभाग के सदस्य लेफ्टीनेंट डॉ. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी छायाकारों, प्रतिभागियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय छायाचित्र प्रदर्शनी में दीप्तिमान संस्कृति फाउंडेशन फॉर आर्ट कल्चर एंड हेरिटेज के सहयोग से प्रतिष्ठित छायाकारों के छायाचित्र इस प्रदर्शनी को समृद्ध किया गया है। जिसका मूल उद्देश्य फोटोग्राफी के माध्यम से प्रकृति और विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा युवा पीढ़ी को रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करना है।उन्होंने कहा कि कैमरे की नजर से देखी गई प्रकृति हमें उसके संरक्षण का संदेश देती है, जबकि विरासत के छायाचित्र हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। ऐसी प्रदर्शनियां कला, संस्कृति, पर्यावरण और शिक्षा के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित यह पंचम अंतर्राष्ट्रीय छायाचित्र प्रदर्शनी विद्यार्थियों, कला प्रेमियों और फोटोग्राफी के प्रति रुचि रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में शामिल छायाचित्रों ने दर्शकों को प्रकृति और विरासत के विविध रूपों से परिचित कराया। प्रदर्शनी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कला-प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से कुलपति लेफ्टीनेंट जनरल डॉ भूपेश गोयल,लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक मान सिंह, अनिल सिंदूर, थ्रीशकपूर ,धीरज सिंह, गौरव गुप्ता ,आदित्य भूषण, राजेश कुमार, गौरी शंकर चौहान, ऋतु , स्निग्धा सिंह, शिवांशु अग्रहरि,कृतेश् तिवारी,आदेश श्रीवास्तव, शुभम गुप्ता,वरुण मजूमदार, डॉ शशि शेखर, डॉ शिवशरण दास अग्रवाल, कादंबिनी अग्रवाल, सोमु मुखर्जी, अनुपम अग्रवाल, डॉ रत्नेश श्रीवास्तव, डॉ राम निवास यादव, पूजा सिंह,तृप्ति श्रीवास्तव, गोविंद त्रिपाठी, गंगेश्वर् शुक्ला,
नवाज़ अहमद के छायाचित्र आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्राचार्य डॉ शशिकांत सिंह, डॉ वर्षा मोखानी, उपकुलसचिव श्रीकांत,अभिषेक मिश्रा, अभिषेक चौरसिया,अरुण विश्वकर्मा ,गुड़िया कुशवाहा,आकांक्षा यादव,शिखर पाण्डेय ,अनुभव पाण्डेय, उत्कर्ष ओझा,आलोक सिंह, उजाला सिंह, अर्पिता राय, सनी जायसवाल, प्रवेंद्र कृष्ण, अश्विता चौरसिया, अंजलि चौरसिया,सिद्धार्थ दुबे, आस्था यादव, आकांक्षी राय उपस्थित रहे ।