MPA in jiwaji University

MPA in jiwaji University master in public administration
school of study
jiwaji University, Gwalior

https://chhatrasamvad.blogspot.com/2022/04/cuet-2022.html
04/04/2022

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कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट 2022 (CUET 2022) की रजिस्ट्रेशन तारीख में बदलाव किया गया है। अब CUET 2022 के लिए रजिस्ट्रेशन 06 अप.....

17/09/2021

यह दुर्गा भाभी हैं, वही दुर्गा भाभी जिन्होंने साण्डर्स वध के बाद राजगुरू और भगतसिंह को लाहौर से अंग्रेजो की नाक के नीचे से निकालकर कोलकत्ता ले गयी. इनके पति क्रन्तिकारी भगवती चरण वोहरा थे. ये भी कहा जाता है कि चंद्रशेखर आजाद के पास आखिरी वक्त में जो माउजर था, वो भी दुर्गा भाभी ने ही उनको दिया था.

14अक्टूबर 1999 में वो इस दुनिया से गुमनाम ही विदा हो गयी कुछ एक दो अखबारों ने उनके बारे में छापा बस.

आज आज़ादी के इतने साल के बाद भी न तो उस विरांगना को इतिहास के पन्नों में वो जगह मिली जिसकी वो हकदार थीं और न ही वो किसी को याद रही चाहे वो सरकार हो या जनता.

एक स्मारक का नाम तक उनके नाम पर नही है कहीं कोई मूर्ति नहीं है उनकी. सरकार तो भूली ही जनता भी भूल गयी,

ऐसी वीर वीरांगनाओं को हम शत शत नमन करते है और भविष्य मे ऐसे तमाम वीरों को सम्मान दिलाने के लिये प्रयासरत रहें....!

15/09/2021
08/09/2021

पूरा पढ़े ....
#गिलगित_बाल्टिस्तान
#भारत_का_अभिन्न_अंग

भारत की केंद्र सरकार ने जानकर लद्दाख को जम्मू-काश्मीर से अलग किया - जिस कारण पकिस्तान भी बौखला गया

संभवतः आपको स्मरण होगा कि जैसे ही मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को प्रथक-प्रथक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की, वैसे ही रोते हुए फारुख अब्दुल्ला जी सामने आये और बोले - जिस्म से रूह को अलग किया जा रहा है | ऐसा क्यों कहा फारुख अब्दुल्ला ने ?

दरअसल वे इसका कूटनीतिक महत्व जानते हैं । आईये थोड़े विस्तार से हम आपको इसको समझते है !

वास्तव में जम्मू-कश्मीर का सामरिक महत्व जम्मू के कारण नहीं, कश्मीर के कारण नहीं, लद्दाख के कारण नहीं *"बल्कि गिलगित-बाल्टिस्तान के कारण है"* गिलगित जो अभी POK में है विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जो कि 5 देशों से जुड़ा हुआ है अफगानिस्तान, तजाकिस्तान ( जो कभी Russia का हिस्सा था ), पाकिस्तान, भारत और तिब्बत -चाइना !
भारत पर जितने भी आक्रमण हुए यूनानियों से लेकर आज तक ( शक , हूण, कुषाण , मुग़ल ) वह सारे गिलगित से हुए । किसी समय इस गिलगित में अमेरिका बैठना चाहता था, ब्रिटेन अपना बेस गिलगित में बनाना चाहता था , रूस भी गिलगित में बैठना चाहता था, यहां तक कि पाकिस्तान ने तो 1965 में गिलगित रूस को देने का वादा तक कर लिया था । आज चाइना गिलगित में बैठना चाहता है और वह अपने पैर वहाँ तक पसार भी चुका है ।

भारत को अगर सुरक्षित रहना है तो हमें गिलगित-बाल्टिस्तान किसी भी हालत में चाहिए । क्या आपको पता है गिलगित से सड़क मार्ग द्वारा आप विश्व के अधिकांश कोनों में जा सकते हैं गिलगित से दुबई, रूस, सेन्ट्रल एशिया, लंदन यूरेशिया, यूरोप, अफ्रीका सब जगह जा सकते है ।
आप हैरान हो जाएंगे वहां बड़ी -बड़ी 50-100 यूरेनियम और सोने की खदाने हैं, और सबसे बड़ी बात गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग जबरदस्त पाक विरोधी हैं ।

जम्मू कश्मीर का कुल क्षेत्रफल 79000 वर्ग किलोमीटर है, उसमें कश्मीर का हिस्सा तो सिर्फ 6000 वर्ग किलोमीटर है और 9000 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा जम्मू का है, जबकि 64000 वर्ग किलोमीटर हिस्सा लद्दाख का है और उसी का एक हिस्सा है गिलगित-बाल्टिस्तान । यह कभी कश्मीर का हिस्सा नहीं था यह लद्दाख का हिस्सा था, वास्तव में सच्चाई यही है । मोदी जी यह बात जानते हैं और देश को भी जानना चाहिए कि स्वयं ब्रिटिश संसद ने मार्च 2017 में एक प्रस्ताव पारित कर गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे को अवैध बताया है ।

पाकिस्तान ने 1947 से गिलगित-बाल्टिस्तान समेत PoK पर अवैध कब्जा कर रखा है । मजे की बात तो यह है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर तो कवायलियों ने हमला कर कब्जा किया था, किन्तु गिलगित - बाल्टिस्तान तो वैसे ही हमारे हाथ से निकल गया । 1947 में विभाजन के समय यह क्षेत्र जम्मू एवं कश्मीर की तरह न तो भारत का हिस्सा था और न ही पाकिस्तान का. 1935 में ब्रिटेन ने इस हिस्से को गिलगित एजेंसी को 60 साल के लिए लीज पर दिया था, लेकिन इस लीज को एक अगस्त 1947 को रद्द करके क्षेत्र को जम्मू एवं कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को लौटा दिया गया ।
शायद अब आपकी समझ में आ गया होगा कि लद्दाख को जम्मू कश्मीर से प्रथक क्यों किया गया है । पाकिस्तान में भी गिलगित-बाल्टिस्तान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर राज्य का भाग नहीं है, बल्कि वह सीधे तौर पर पाकिस्तान की केंद्र सरकार के ही अधीन है । संभवतः प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यही स्वर गुंजाने वाले हैं कि कश्मीर विवादस्पद हो सकता है, लेकिन गिलगित-बाल्टिस्तान तो निर्विवाद रूप से भारत का ही भाग है और उस पर से पाकिस्तान को कब्ज़ा छोड़ना चाहिए । वहां के लोग भी यही चाहते हैं।

तो अब्दुल्ला जी का रोना समझ में आता है।

गिलगित-बाल्टिस्तान के बारे में कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ

गिलगित -बाल्टिस्तान, लद्दाख के रहने वाले लोगो की औसत आयु विश्व में सर्वाधिक है यहाँ के लोग विश्व अन्य लोगो की तुलना में ज्यादा जीते है ।

भारत में आयोजित एक सेमिनार में गिलगित-बाल्टिस्तान के एक बड़े नेता को बुलाया गया था उसने कहा कि *"we are the forgotten people of forgotten lands of BHARAT"* उसने दुःख जताया कि दुर्भाग्य से हमारा देश हमारी बात ही नहीं जानता । गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान की सेना कितने अत्याचार करती है लेकिन आपके किसी भी राष्ट्रीय अखबार में उसका जिक्र तक नहीं आता है ।

गिलगित- बाल्टिस्तान में अधिकांश जनसंख्या शिया मुसलमानों की है और वह सभी पाक विरोधी है वह आज भी अपनी लड़ाई खुद लड़ रहे हैं, वास्तव में पूरे देश में इसकी चर्चा होनी चाहिए । क्योंकि सबसे बड़ी बात यह कि वे भारत को ही अपना देश मानते हैं ।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कभी POK - गिलगित-बाल्टिस्तान को पुनः भारत में लाने के लिए कोई बयान तक नहीं दिया प्रयास तो बहुत दूर की बात है ।

भारत काफी दिनों से इस क्षेत्र के मौसम का हाल रेडियो पर बताता आ रहा है मोदी जी की कूटनीति के तहत ।

आशा है कि मेरे द्वारा व्यक्त प्रमाणों पर आधारित अनुमान सत्य सिद्ध होगा और जल्द ही हम गिलगित - बाल्टिस्तान को चर्चा का केंद्र बिंदु बनते देखेंगे।।

संभवामि युगे युगे

15/08/2021
14/08/2021

15 अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है।

सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ न पूरी है।।

उपरोक्त पंक्तियां अटल जी की पुस्तक ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ से उद्धृत है। हम इस वर्ष 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। अटल जी ऐसा क्यों कहा कि आजादी अभी अधूरी है और क्या है रावी की शपथ। इन दोनों बिंदुओं पर जरा विचार करते है।

15 अगस्त 1947 को भारत देश को स्वतंत्रता मिली। परंतु यह स्वतंत्रता अधूरी थी। भारत माता की स्वतंत्रता के लिए इस देश के सपूतों, वीरांगनाओं ने अपना जीवन व प्राण न्योछावर कर दिया। कितने ही परिवार बलिदान हो गए। परंतु स्वतंत्रता मिली तो भी अधूरी, स्वतंत्रता के साथ मिला देश का विभाजन। आज की पीढ़ी को ये बातें शायद स्मरण न हो लेकिन जिन परिवारों ने विभाजन का दंभ झेला हो, जिन्होंने अपना सब कुछ छोड़ कर वर्षों गरीबी में बिताए हो, वे इस बात को कैसे भूल सकते है। उस समय का पश्चिम पंजाब और आधा बंगाल जो आज का पाकिस्तान (पूर्वी पाकिस्तान) व बंगला देश (पश्चिम पाकिस्तान) है, वह भारत से अलग हो गया। विभाजन के कारण वहां से हिन्दू समाज को पलायन करना पड़ा। इस पलायन में गांव, शहर, घर, खेत, संपत्ति आदि सब छुटा और कितने ही लोगों की लाशें वहां छूट गई और कितने ही लोगों की लाशें ट्रेनों में भरकर भारत आई। यह वो अविस्मरणीय व कष्टदायक पल है, जिनके बारे में सोचकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते है।

क्या थी रावी की शपथ?

1930 में रावी नदी के तट पर तत्कालीन कांग्रेस ने अखण्ड भारत व पूर्ण स्वराज्य का संकल्प लिया, कांग्रेस ने 17 वर्षों में ही इस शपथ को भुला दिया और देश की जनता से द्रोह कर विभाजन को स्वीकार किया। इस विभाजन में तीन करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए, इस दौरान 10 लाख से अधिक हत्याएं हुई।

यह विभाजन पहला था क्या?

गत 2500 वर्षों में भारत के हुए विभाजनों में से यह 24वां विभाजन था। 1874 से आज तक हुए विभाजनों में से एक। आज का युवा सोचेगा कि 1874 से आज तक विभाजनों में से एक! अकल्पनीय।

भारत का कौनसा हिस्सा कब अलग हुआ – अफगानिस्तान (1874), नेपाल (1904), भूटान (1906), तिब्बत (1914), श्रीलंका (1935), बर्मा (1937), पाकिस्तान (1947), बंगला देश (1947), पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर POJK (1948), अक्साई चीन (1962) ।

भारत वर्ष इतना विभाजित हुआ तो पहले क्या था? इसका उत्तर निम्न श्लोक से मिलता है –

उत्तरं यत्त समुदस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।

वर्षं तद भारतं नाम भारती यत्र संतति।।

अर्थात समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में जो भूभाग है, इसका नाम भारत वर्ष है और इस पर रहने वाला समाज इसकी संतति भारतीय कहलाती है।

पश्चिम में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में अरुणाचल तक, उत्तर में माउंट एवरेस्ट से लेकर श्रीलंका से आगे सुदर दक्षिणपूर्व तक भारत वर्ष था। इतना विशाल भूभाग विभाजित होते होते आज की स्थिति तक पहुंच गया। 1857 से पूर्व भारत की भूमि 83 लाख वर्ग किलोमीटर थी और आज 33 लाख वर्ग कि०मी० है। बात केवल यही तक नहीं रुकी। अरुणाचल प्रदेश पर चीन अपना कब्जा जमाना चाहता है। बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल और असम में घुसपैठ निरंतर हो रही है। पश्चिम बंगाल के तीन जिले जिनको ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, उस चिकन नेक में योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम आबादी बढ़ाई जा रही है ताकि उस क्षेत्र को अलग कर दिया जाए और भारत का संबंध पूर्वोत्तर के सात राज्यों से टूट जाए। पंजाब में आज भी खालिस्तान की मांग कभी कभी उठती हुई दिखाई देती हैं।

क्या भारत का विभाजन स्थाई है?

नहीं। महर्षि अरविंद ने कहा है कि यह विभाजन अप्राकृतिक है इसलिए यह लंबे समय तक नहीं रहेगा। क्या विभाजन समाप्त हो सकता है? हां, हो सकता है। अपने ही देश में 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया था। बंगाल का ही क्यों? क्योंकि बंगाल स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों का बड़ा केंद्र था इसलिए उसकी शक्ति कम करने के लिए ऐसा अंग्रेजों ने किया था परंतु वहां के लोगों के प्रयास के कारण अंग्रेजी सरकार ने 1911 में बंग-भंग को समाप्त कर दिया था तो जब बंग-भंग हो सकता है तो देश का बाकी विभाजन भी समाप्त हो सकता है।

कैसे मिलेगी पूर्ण आजादी?

पूर्ण स्वतंत्रता के तीन बिंदु है – एक, भारत का जो हिस्सा भारत से अलग हुआ वो भारत में मिले यानि खंडित भारत पुनः अखण्ड बने। इसके लिए वर्तमान व नई पीढ़ी के मन में अखण्ड भारत का स्वप्न संजोने की आवश्यकता है। स्वप्न बना रहेगा तो उस पर कार्य भी होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंचम सरसंघचालक कहा करते थे कि 2011 के बाद का समय विश्व में हिंदुत्व यानि भारत के उदय का है। गत कुछ वर्षों से यह प्रतीत भी हो रहा है। धारा 370 का समाप्त होना, सीमा से चीनी सेना का पीछे हटना, सोशल मीडिया में POJK की चर्चा चलना आदि अखण्ड भारत के संकल्प को पूर्ण करने की दिशा के संकेत है। आज अनेक विषयों के लिए विश्व भारत, भारतीय जीवन दृष्टि व भारतीय चिन्तन की ओर आशा भरी आँखों से देखता है।

दुसरा बिंदु है, मानसिक गुलामी से आजादी। 2014 में गार्जियन पत्रिका में लेख छपा, जिसका शीर्षक था Finally they left India. यानि अंग्रेज भारत से 1947 में चले गए लेकिन अब तक भारतीय समाज मानसिक गुलामी में जी रहा है। डॉ० डी.एस. कोठारी ने 1962 में उदयपुर में एक भाषण में कहा था कि भारत के सब प्रकार के बुद्धिजीवियों का गुरुत्वाकर्षण केंद्र यूरोप की बजाय भारत होना चाहिए। 2020 में शिक्षा नीति आई है, जिसका केंद्र बिंदु है भारत। भारतीय ज्ञान-विज्ञान, भारतीय भाषाओँ में शिक्षा, भारतीय कला, संगीत, साहित्य अब भारत की शिक्षा का अंग बनेगा। यानि भारत का बुद्धिजीवी व नीति-निर्धारक वर्ग अब भारत केन्द्रित सोचने लगा है।

और तीसरा है आत्मनिर्भर भारत। भारत की अर्थव्यवस्था ग्राम केन्द्रित, कृषि आधारित व आत्म निर्भर व्यवस्था रही है। अपनी आवश्यकताएं यहाँ का समाज स्वयं पूर्ति करता रहा है। स्वतंत्रता का सही अर्थ भारत की अर्थ व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना भी है और यह स्वदेशी आचार-विचार से पुष्ट हो सकता है।

अखण्ड भारत का संकल्प, मानसिक गुलामी से मुक्ति व आत्मनिर्भर भारत से हम स्वतंत्रता के सही अर्थ को समझ सकते है।


#छत्रसाल_स्टडी_सर्कल


12/08/2021

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12/08/2021

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