26/12/2015
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टाइटैनिक दुनिया का सबसे बड़ा वाष्प आधारित
यात्री जहाज था। वह इंग्लैंड से अपनी पहली
यात्रा पर 10 अप्रैल 1912 को रवाना हुआ।
4 दिन की यात्रा के बाद, 14 अप्रैल 1912
को वह एक बर्फ के टुकड़े से टकरा कर डूब गया
जिसमे 1,517 लोग मारे गए, जो इतिहास की
सबसे बड़ी समुद्री आपदाओं में से एक है।
टाइटैनिक सबसे अनुभवी इंजीनियरों के द्वारा
डिजाइन किया गया था और इसके निर्माण में
उस समय की सबसे उन्नत तकनीकी का
इस्तेमाल किया गया था।
मित्रों यह सिर्फ एक बर्फ का टुकड़ा नहीं था,
यह था Iceberg (हिमशैल), जिसका केवल
10% हिस्सा पानी के ऊपर दिखता है और
90% हिस्सा पानी के नीचे रहता है.
सार :-
हम इंसान भी इस Iceberg (हिमशैल) की तरह
होते हैं जिनका केवल 10% हिस्सा ही
Knowledge, Skill, Discipline और
Decision Making के रूप में दुनिया के सामने
ऊपर से दिखाई देता है पर इस 10% को बनाने
में हमारा 90% हिस्सा किसी को भी दिखाई
नहीं देता हमारे सिवाए। ये 90% है हमारा
Attitude, Approach, Thought, Mind
- Set, Sacrifice, Dedication, Habits
इस्यादि।
मित्रों ध्यान रहे जिस तरह Iceberg (हिमशैल)
ने सिर्फ 10% पानी के बाहर और 90% पानी
के अंदर रह कर, इतने बड़े जहाज को डुबो दिया
तो :-
"क्या हम इंसान अपने Hard Work के साथ
साथ अपने अंदर के 90% हिस्से रूपी
Attitude, Approach, Thought, Mind
- Set, Sacrifice, Dedication, Habits
को Positive रखते हुए, अपने बाहर के 10%
हिस्से रूपी Knowledge, Skill,
Discipline, Decision Making को इतना
नहीं बढ़ा सकते कि जिससे हम दुनिया की
कितनी ही बड़ी से बड़ी परिस्थिति को परास्त
कर अपने जीवन की हर ऊंचाइयों को छु जाएँ. "
सिर्फ मेहनत से ही कोई आगे नहीं बढ़ता ये बात
ध्यान रहे. मेहनत (HARDWORK) तो आप
और हम लोगों से ज्यादा मजदूर कर रहा है.
उसमें जब तक हम अपने अंदर का 90% नहीं
झोंकेंगे, तब तक हमारा 10% हिस्सा नहीं
चमकेगा। इसका मतलब साफ़ है :-
SUCCESS = Hardwork + 90% + 10%
आज की तारीख में होशियारी से ज्यादा आल
राउंडर बनने की जरुरत है.
मित्रों Attitude को थोड़ा ज्यादा समझने की
जरुरत है, पूरा का पूरा game हमारी जिंदगी में
इसी Attitude का है.
Attitude मतलब "नज़रिया"।
इसको कुछ example के साथ समझते हैं :-
(1) मान लीजिये आप को करेला पसंद नहीं है
और घर पहुँचते पहुँचते आपको बहुत तेज भूख
लगी है और जैसे ही आपने खाने की प्लेट में
करेला और रोटी देखी, आपकी भूख ही गायब हो
गयी. अब सोचिये अगर राजमा की दाल होती
तो, आप शायद Double खा लेते।
(2) जो रिस्तेदार हमें पसंद नहीं, उनके घर हम
जाना पसंद नहीं करते और जो पसंद है वहां हम
बार बार जाते हैं, हैं तो दोनों रिस्तेदार ही.
(3) Maths मुझे अच्छी नहीं लगती पर मेरे
दोस्त को बहुत अच्छी लगती है, सिर्फ नजरिये
का फर्क है वर्ना आटा तो हम दोनों एक ही
चक्की का खाते हैं.
(4) हम बरसात में थोड़ा सा भी भीग जाएँ तो
परेशानी वर्ना बच्चे तो उसी बारिश में नाचते हैं.
(5) सर्दियों में ठंड ज्यादा हो जाये तो हाई
तोबा वर्ना जुग्गी झोपड़ी में तो बच्चे बिना
स्वेटर के ही घूमते हैं.
(6) एक ही नेता का टीवी में भाषण सुनने पर
मुझे अच्छा और मेरे दोस्त को बुरा लगने लगता
है, पर न तो वो नेता हमें जानता है न हम उससे
कभी मिले हैं.
(7) किसी एक ही जगह पर दोस्तों के साथ
घूमना अच्छा लगता है और उसी जगह पर घर
वालों के साथ बोरियत आने लगती हैं.
(8) ऑफिस में बॉस द्वारा दिया गया काम
कभी तो बहुत मन लगा कर करते हैं और कभी
कुड़ कुड़ कर.
मित्रों यह सब हमारे छोटे से दिमाग का कमाल
है, ये सब हमारे Negative और Positive
नजरिये का कमाल है. हम लोगों की सबसे बड़ी
परेशानी ये है कि हम काम भी कर रहे होते हैं
और उस काम को करते समय उस काम की बुराई
भी कर रहे होते हैं, बस यही Negative
Attitude है. सोचिये अब जब मेहनत
(Hardwork) करनी ही है तो उसको
Positive Attitude के साथ करने में क्या
बुराई है जिससे कि हमारी Knowledge और
Skill में भी इजाफ़ा हो.
मित्रों जिंदगी में नजरिया बदलो, जिंदगी बदल
जाएगी।
स्वामी विवेकानंद ने सही कहा है :-
"ब्रम्हाण्ड की सारी शक्तियां हमारी हैं. वो हमी
हैं जो अपनी आँखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर
रोते हैं कि कितना अन्धकार हैं."
मित्रों हम अपनी पैदाइशी परिस्थितियों में जस
के तस रहकर और उन परिस्थितियों को कोसने
के लिए पैदा नहीं हुए हैं.
हम अपने और अपने से जुड़े तमाम लोगों को उन
परिस्थितियों में से निकालने के लिए पैदा हुए हैं.
सिर्फ कहने और सोचते रहने का नहीं, कुछ कर
गुजरने का समय है.