Uttarakhand Sanskrit University उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय

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*उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया*          *हरिद्वार।* राष्ट्रीय गौरव ...
15/08/2026

*उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया*

*हरिद्वार।* राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति के रंग में सराबोर होकर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। परिसर देशभक्ति गीतों, नारों और तिरंगे की शान से गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति *प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय* द्वारा मुख्य भवन के समक्ष ध्वजारोहण के साथ हुई। ध्वजारोहण के समय सशस्त्र सीमा सुरक्षा बल की टुकड़ी ने मुख्यातिथि को सलामी दी, पूरा परिसर "भारत माता की जय" के नारों से गूंज उठा।
ध्वजारोहण के पश्चात कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय ने समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि "पिछले समय में हमारे विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक, शोध और सांस्कृतिक क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार से लेकर आधुनिक विषयों के समन्वय तक विश्वविद्यालय ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इन उपलब्धियों के पीछे हमारे समर्पित शिक्षकों और कर्मचारियों की मेहनत और निष्ठा का बहुत बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा कि आजादी के इस पुनीत पर्व पर हम सभी को यह संकल्प लेना होगा कि आने वाला पूरा वर्ष हम अपने इस सपनों के विश्वविद्यालय की उन्नति के लिए जी-जान से जुटकर कार्य करेंगे। हमारे छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का बेहतर माहौल कैसे मिले, इस पर प्रत्येक शिक्षक को निरंतर चिंतन और प्रयास करना होगा।
देश की आजादी का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा, हमारे वीर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अथाह कष्ट सहे और प्राणों का उत्सर्ग तक कर दिया। हमें उनके बलिदान के महत्व को समझकर राष्ट्र निर्माण और देश के विकास के लिए सदैव समर्पित भाव से कार्य करने की आवश्यकता है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव *दिनेश राणा* ने विश्वविद्यालय द्वारा पिछले एक वर्ष में अर्जित की गई शैक्षणिक और प्रशासनिक उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति में कर्मचारियों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कर्मचारियों के लंबे समय से रुके हुए पदोन्नति के प्रकरणों को जल्द से जल्द निस्तारित कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन हर संभव प्रयास करेगा।
समारोह के दौरान शिक्षाशास्त्र विभाग के छात्रों द्वारा प्रस्तुत "वंदे मातरम" गीत ने सभी को भावविभोर कर दिया। छात्रों की स्वर लहरियों ने पूरे माहौल को देशभक्ति से भर दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन बीएड विभागाध्यक्ष *डॉ. प्रकाश पन्त* ने किया।
समारोह के अंत में विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे छात्रों को कुलपति प्रो. पाण्डेय ने प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। विजेता छात्रों को बधाई देते हुए कुलपति ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं छात्रों में प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय भावना को बढ़ाती हैं।
इस अवसर पर सशस्त्र सीमा सुरक्षा बल के कमाण्डर *राजेश कुमार* विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त सहायक कुलसचिव सुनील कुमार, कुलपति के निजी सचिव मनोज गहतोड़ी, प्रोफेसर मोहन बलौदी, प्रोफेसर दिनेश चमोला, प्रोफेसर मनोज किशोर पन्त, प्रोफेसर राम रतन खण्डेलवाल, प्रोफेसर विंदुमती द्विवेदी, प्रोफेसर अरविंद नारायण मिश्रा, प्रोफेसर दामोदर परगाई सहित विश्वविद्यालय के सभी सह-आचार्य, सहायक आचार्य, कर्मचारीगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने समारोह में उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्पूर्ण कार्यक्रम राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और शैक्षणिक संकल्प के संदेश के साथ संपन्न हुआ।

15/08/2026
*"संस्कृत मनीषियों का अभिनंदन, भारतीय ज्ञान-परंपरा के गौरव का अभिनंदन है"*  -- प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय       हरिद्वार।...
14/08/2026

*"संस्कृत मनीषियों का अभिनंदन, भारतीय ज्ञान-परंपरा के गौरव का अभिनंदन है"*
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प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय

हरिद्वार।उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति द्वारा संस्कृत, भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं शास्त्रीय विद्याओं के संरक्षण तथा संवर्धन में अविस्मरणीय योगदान देने वाले राष्ट्र के प्रख्यात विद्वानों को विविध सम्मानों से अलंकृत किए जाने पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के माननीय कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय ने हृदय से बधाई ज्ञापित की है।
इस पुनीत अवसर पर उन्होंने कहा कि संस्कृत के मनीषियों का सम्मान भारत की गौरवमयी ज्ञान-परंपरा, शास्त्रीय चिंतन और सांस्कृतिक चेतना का सम्मान है। इन विद्वतजनों ने अपने ज्ञान, तपस्या, साधना, अध्यापन, अनुसंधान और लेखन के माध्यम से न केवल संस्कृत वाङ्मय को समृद्ध किया है, अपितु भारतीय ज्ञान-परंपरा की अजस्र धारा को भी निरंतर प्रवाहमान रखा है।
कुलपति महोदय ने कहा कि ऐसे सम्मान केवल किसी एक व्यक्ति की उपलब्धियों का जयघोष नहीं हैं, वरन ये ज्ञान, साधना और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति समाज की कृतज्ञता के प्रतीक हैं। वरिष्ठ विद्वानों का जीवन और उनका कृतित्व नवांकुर पीढ़ी के लिए दीपस्तंभ के समान है। उनके अनुभव, शोध और मनीषा से संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान-विज्ञान की परंपरा को नूतन दिशा और नवचेतना प्राप्त होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान काल में भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता सर्वाधिक है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, अपितु यह भारत की बहुआयामी ज्ञान-संपदा, सांस्कृतिक चेतना और दार्शनिक दृष्टि की आधारशिला है। इस समृद्ध विरासत की रक्षा एवं संवर्धन में समर्पित विद्वानों का सम्मान, समाज को उसकी बौद्धिक एवं सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
कुलपति ने उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति द्वारा सम्मानित समस्त विद्वतजनों को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार की ओर से बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल, स्वस्थ एवं सृजनशील जीवन की कामना की।
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नासिक में चतुर्वेद सम्मेलन: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने वैदिक विद्वानों का किया सम्मान      नासिक, महाराष्ट्र। महर्षि ग...
11/08/2026

नासिक में चतुर्वेद सम्मेलन: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने वैदिक विद्वानों का किया सम्मान

नासिक, महाराष्ट्र। महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान, नासिक में रविवार को आयोजित चतुर्वेद सम्मेलन में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा की उपस्थिति में देश भर के वैदिक विद्वानों का भव्य सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ।
राज्यपाल ने विभिन्न प्रांतों से आए वैदिक आचार्यों को शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मानित 19 वर्षीय युवा वैदिक विद्वान श्री देवव्रत रेखे को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। श्री रेखे ने कुछ दिन पूर्व काशी में दण्डक्रम पाठ कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था, जिसकी पूरे देश में सराहना हो रही है।
समारोह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि *महाराष्ट्र शास्त्रों के संरक्षण में सदैव अग्रणी रहा है, यह सम्मान भारतीय परम्परा का सम्मान है।* उन्होंने कहा कि वेद केवल पाठ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं, इन्हें कंठस्थ रखने वाले विद्यार्थी और आचार्य राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर के सच्चे संवाहक हैं। कुलपति ने कहा कि महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान पिछले कई वर्षों से वैदिक शिक्षा, स्वर-व्यंजन शुद्धि और पारम्परिक पाठ पद्धतियों को जीवित रखने का कार्य कर रहा है। राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सरकार और समाज को मिलकर ऐसी संस्थाओं को और अधिक सहयोग देना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी वेद-वेदांग की ओर आकर्षित हो। उन्होंने देवव्रत रेखे जैसे युवाओं को "राष्ट्र की सांस्कृतिक पूंजी" बताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सम्मेलन में सामूहिक वेदपाठ, प्रवचन और शास्त्रार्थ भी हुए,गोदावरी तट पर सामूहिक आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर श्रद्धालु, अध्यापक एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। रिपोर्ट -- मनोज गहतोड़ी

22/07/2026
21/07/2026
प्रवेश प्रारम्भ 2026-27
21/07/2026

प्रवेश प्रारम्भ 2026-27

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला   हरिद्वार।  उत्तराखंड संस्कृ...
16/07/2026

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला

हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में हरेला पर्व पूरे उत्साह और पर्यावरण चेतना के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर हरेला पर्व का शुभारंभ किया। कुलपति के साथ विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक और छात्र भी वृक्षारोपण अभियान का हिस्सा बने। वृक्षारोपण के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए प्रो. रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। उत्तराखंड की संस्कृति में वृक्षों को देवता माना गया है, संस्कृत विश्वविद्यालय का दायित्व है कि वह केवल ज्ञान का ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी केंद्र बने। यदि हम आज एक-एक पौधा लगाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा, पानी और हरियाली मिलेगी।
उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों से आह्वान किया कि वे परिसर में लगाए गए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी लें और इसे नियमित अभियान का हिस्सा बनाएं। कुलपति ने कहा कि संस्कृत साहित्य में भी वृक्षों और प्रकृति का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए विश्वविद्यालय में हर वर्ष हरेला पर्व को इसी धूमधाम से मनाया जाएगा। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने भी विश्वविद्यालय में पौंधारोपण किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश कुमार, वरिष्ठ आचार्य प्रोफेसर मोहन बलोदी, प्रोफेसर दिनेश चमोला,वित्त नियंत्रक लखेन्द्र गौथियाल, उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के सचिव प्रोफेसर विनय विद्यालंकार , विभागाध्यक्ष योग प्रोफेसर लक्ष्मीनारायण जोशी,बीएड विभागाध्यक्ष डॉ प्रकाश पन्त, डॉ कामाख्या कुमार ,सहायक कुलसचिव सुनील कुमार, शोध अधिकारी डॉ महेश ध्यानी,निजी सचिव मनोज गहतोड़ी सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे, सभी ने मिलकर परिसर में पौधे लगाए।
कार्यक्रम के अंत में कुलपति ने सभी को हरेला की शुभकामनाएं दीं और कहा कि हरियाली ही जीवन है, विश्वविद्यालय परिवार ने भी शपथ ली कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे।विश्वविद्यालय परिसर में हरेला गीतों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माहौल भक्तिमय और उत्सवपूर्ण रहा।

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