Uttarakhand Sanskrit University उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय

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संस्कृत को कर्मकांड से जोड़ना अधूरा सच : कुलपति         हरिद्वार।  "भारतीय ज्ञान परम्परा एवं विकसित भारत मे संस्कृत का यो...
17/05/2026

संस्कृत को कर्मकांड से जोड़ना अधूरा सच : कुलपति


हरिद्वार। "भारतीय ज्ञान परम्परा एवं विकसित भारत मे संस्कृत का योगदान" विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं है बल्कि भारत की आत्मा से संवाद का प्रयास है। जब हम "भारतीय ज्ञान परम्परा एवं विकसित भारत में संस्कृत का योगदान" कहते हैं तो 5000 वर्ष की अखंड बौद्धिक यात्रा की बात करते हैं जिससे विश्व की वह सभ्यता चर्चा में आती है जिसकी ज्ञान धारा बिना टूटे आज तक बह रही है और हमारी इस धारा का जल संस्कृत के पात्र में भरा हुआ है।
माननीय कुलपति ने कहा कि हम अक्सर संस्कृत को धर्म और कर्मकांड से जोड़ देते हैं यह अधूरा सच है। आर्यभट्ट का शून्य, भास्कराचार्य का कलन, वराहमिहिर की बृहत्संहिता को कैसे भूल सकते हैं,आज भी IIT में पाणिनि का व्याकरण कम्प्यूटर साइंस में पढ़ाया जाता है, चिकित्सा विज्ञान में चरक संहिता, सुश्रुत संहिता ऐसे ग्रंथ हैं जिनका लोहा मानने के लिए दुनियां को लोग विवश हैं। प्लास्टिक सर्जरी का जनक सुश्रुत को सम्पूर्ण विश्व मानता है,चरक ने 2000 वर्ष पहले कहा: "रोग पहले मन में आता है, फिर शरीर में।
उन्होंने कहा कि भरत मुनि का नाट्यशास्त्र विश्व का पहला नाट्य ग्रंथ है, सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग नालंदा आया उसने लिखा "कश्मीर से समुद्र तक सभी विद्वान संस्कृत में बात करते हैं " सोचिए, बिना इंटरनेट, बिना रेल के, संस्कृत भाषा ने भारत को कैसे जोड़ा था, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और कच्छ से लेकर असम तक संस्कृत के ज्ञान ने पूरे राष्ट्र को भाषा के माध्यम से एक सूत्र में पिरोने का काम किया।
माननीय कुलपति ने कहा कि शंकराचार्य ने केरल में जन्म लिया, संस्कृत में ग्रंथ लिखे, और चार धाम स्थापित किए यदि संस्कृत न होती तो भारत सांस्कृतिक रूप से कभी एक न रह पाता। लेखक गाँव थानों में आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने की। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार में संस्कृत शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत,केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास बरखेड़ी,सुश्री विदुषी निशंक,महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे। इस अवसर पर लेखक गाँव थानो में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के बीच एक एमओयू भी हस्ताक्षरित किया गया।

सत्र 2025-26 सेमेस्टर परीक्षा समय सारिणी।
16/05/2026

सत्र 2025-26 सेमेस्टर परीक्षा समय सारिणी।

14/05/2026
*मानवीय संवेदना पर आधारित है भारतीय संस्कृति : प्रो. मूर्ति*  हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में “वर्तमान समय...
28/04/2026

*मानवीय संवेदना पर आधारित है भारतीय संस्कृति : प्रो. मूर्ति*
हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में “वर्तमान समय में भारत की सांस्कृतिक सुरक्षा” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, मुख्य वक्ता प्रो. जी एस मूर्ति एवं प्रो. बलवीर तलवार ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति की प्राचीनता, उसकी विविधता और वर्तमान समय में उसके संरक्षण की आवश्यकता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा वैश्वीकरण के इस दौर में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्य वक्ता प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक प्रोफेसर जी. एस. मूर्ति ने अपने व्याख्यान में भारत की सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का समूह नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो मानवता, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता पर आधारित है। उन्होंने वर्तमान समय में सांस्कृतिक चुनौतियों जैसे पाश्चात्य प्रभाव, तकनीकी बदलाव और सामाजिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए इनसे निपटने के उपाय भी सुझाए।

भेल हरिद्वार के पूर्व कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर बलबीर तलवार ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण संभव है। उन्होंने छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम की संयोजिका प्रोफेसर बिंदुमती द्विवेदी ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर दिनेश चंद्र चमोला, प्रोफेसर अरविंद नारायण मिश्रा, प्रोफेसर लक्ष्मी नारायण जोशी, डॉ. उमेश शुक्ला, प्रोफेसर दामोदर परगांई, डॉ. अर्पिता जोशी, डॉ. अनूप बहुखंडी, डॉ. राजेश सती, मनोज गहतोड़ी,डॉ पवन, सहित शिक्षा शास्त्र विभाग एवं योग विभाग विभाग के छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

22/04/2026

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