23/12/2025
प्रेस विज्ञप्ति
केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा एवं प्रज्ञान प्रवाह (अंतरराष्ट्रीय संबंध आयाम), दिल्ली प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन केशव कुंज, झंडेवालान, नई दिल्ली में किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने सहभागिता की तथा समकालीन विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा के माननीय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के बीच अंतर्विषयी (Interdisciplinary) अध्ययन को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की जटिल वैश्विक, सामाजिक एवं बौद्धिक चुनौतियों का समाधान बहुविषयी दृष्टिकोण अपनाकर ही संभव है।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. शांतेश कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसके पश्चात प्रो. राजीव कुमार सिंह ने कार्यक्रम की आगे की कार्यवाही का कुशल संचालन किया। इसके उपरांत राष्ट्र के विभिन्न प्रांतों से आए शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर अकादमिक विमर्श को समृद्ध किया।
संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रो. रवि रमेश शुक्ला, प्रो. रणविजय, डॉ. मुकेश कुमार मिश्र तथा प्रो. वंदना मिश्रा ने की। इन सत्रों में सामाजिक विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं समकालीन विमर्श से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई।
समापन सत्र में श्री चंद्रकांत जी ने भारतीय दार्शनिक विमर्श पर अपने विचार रखते हुए उसकी समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन सामाजिक, नैतिक और बौद्धिक चेतना को दिशा देने में आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर प्रो. शांतेश कुमार सिंह, प्रो. राजीव कुमार सिंह, प्रो. वंदना मिश्रा, डॉ. मुकेश कुमार मिश्र, प्रो. रणविजय, प्रो. रवि रमेश शुक्ला, प्रो. संदीप सिंह, सहित अनेक गणमान्य शिक्षाविद, शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। यह संगोष्ठी अकादमिक संवाद एवं शोध सहयोग के लिए एक सार्थक मंच सिद्ध हुई।