Aisect university Jharkhand, Hazaribag

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Aisect university Jharkhand, Hazaribag Official page of AISECT University of Jharkhand, Hazaribag came into being under this act on 16th may 2016.

The UGC New Delhi recognized the University and registered it under section (2F) of the UGC Act.

आईसेक्ट विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने दार्जिलिंग शैक्षणिक भ्रमण से समझे हिमालयी भू-दृश्य और संस्कृतिहजारीबाग। आईसेक्...
29/09/2026

आईसेक्ट विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने दार्जिलिंग शैक्षणिक भ्रमण से समझे हिमालयी भू-दृश्य और संस्कृति

हजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के भूगोल एवं कला विभाग की ओर से दार्जिलिंग का बीते 23 से 27 सितंबर तक पांच दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को हिमालयी भू-दृश्य, पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति एवं क्षेत्रीय विकास का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था। भ्रमण दल में भूगोल विभाग की शिक्षिका पंकज प्रज्ञा, गौतम कुमार तथा कला विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति कुमारी विद्यार्थियों के साथ शामिल रहीं। 24 सितंबर को विद्यार्थियों ने टाइगर हिल, घूम मठ और बतासिया लूप का भ्रमण कर पर्वतीय भू-आकृतियों, प्राकृतिक परिवेश एवं बौद्ध संस्कृति का अध्ययन किया। 25 सितंबर को दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट तथा पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क का अवलोकन किया। 26 सितंबर को विद्यार्थियों ने चाय बागानों, जापानी मंदिर एवं पीस पगोडा का भ्रमण कर चाय उत्पादन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन गतिविधियों एवं सांस्कृतिक विविधता को समझा। विद्यार्थियों ने फील्ड अवलोकन, नोट्स संकलन और फोटोग्राफी के माध्यम से विभिन्न भौगोलिक तथ्यों का अध्ययन किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर देता है।
कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि इस तरह के भ्रमण से विद्यार्थियों में क्षेत्रीय अध्ययन और व्यावहारिक समझ विकसित होती है।
समकुलपति डॉ एसआर रथ ने कहा कि फील्डवर्क विद्यार्थियों के अध्ययन एवं शोध कौशल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बीते 27 सितंबर को दल सकुशल हजारीबाग लौट आया।

विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभाहजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग के फार्मेसी संकाय एवं आ...
25/09/2026

विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

हजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग के फार्मेसी संकाय एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष की थीम स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना था।
इसे लेकर कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यवहारिक अनुभव से जोड़ते हैं। फार्मेसी के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और सेवा भावना विकसित करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि फार्मेसी शिक्षा केवल औषधियों के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मरीजों और समाज के प्रति जिम्मेदारी की समझ भी जरूरी है।
कार्यक्रम में समकुलपति डॉ एस आर रथ ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में फार्मासिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए।
कार्यक्रम में डी.फार्म एवं बी.फार्म के विद्यार्थियों ने प्रस्तुतीकरण, फार्म प्रश्नोत्तरी, रील निर्माण, वाद-विवाद, भाषण, पोस्टर प्रतियोगिता, विज्ञान आधारित चित्रकला और औषधीय पौधों के रोपण में भाग लिया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रशस्ति प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। फार्मेसी संकाय के प्राचार्य डॉ सच्चिदानंद बेहरा और कार्यक्रम समन्वयक रोहित लाल ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का समापन फार्मासिस्ट शपथ के साथ हुआ। इसके बाद केक काटकर विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया गया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ आलोक राय, डॉ पारूल गुप्ता, शिवम कुमार, गुलफशा नाज, खुस्तर अली, प्रशांत राणा, शुवाजी भारद्वाज, शशिप्रभा सिंह और सरिता टुडू सहित अन्य सदस्यों का अहम योगदान रहा।

एनएसएस स्थापना दिवस पर स्वच्छता अभियान, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का लिया संकल्पहजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीब...
24/09/2026

एनएसएस स्थापना दिवस पर स्वच्छता अभियान, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का लिया संकल्प

हजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग में गुरुवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्थापना दिवस के अवसर पर स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षक, एनएसएस अधिकारी, स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सामुदायिक सहभागिता की भावना को बढ़ावा देना रहा।
कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि एनएसएस विद्यार्थियों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।
कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता जैसे अभियानों में युवाओं की भागीदारी समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों को नियमित रूप से सेवा गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
समकुलपति डॉ एसआर रथ ने कहा कि एनएसएस की गतिविधियां विद्यार्थियों को समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्गों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सामाजिक सेवा एवं जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ राज कुमार ने राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्यों और विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने स्वयंसेवकों को सेवा कार्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने स्वच्छता अभियान में भाग लिया और स्वच्छ परिसर–स्वस्थ समाज–जिम्मेदार नागरिक” का संदेश दिया। समापन पर स्वयंसेवकों ने नॉट मी बट यू‌ (मैं नहीं, आप) की भावना के साथ सामाजिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।

आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे सर, प्रति कुलाधिपति श्री अरविंद चतुर्वेदी, स्कोप ग्लोबल विश्वविद्यालय...
21/09/2026

आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे सर, प्रति कुलाधिपति श्री अरविंद चतुर्वेदी, स्कोप ग्लोबल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ विजय सिंह, डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय, वैशाली के कुलसचिव डॉ ब्रजेश सिंह, व डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय, वैशाली के नामांकन निदेशक अम्रितेश सिंह का हजारीबाग आगमन पर भव्य स्वागत

राज्यपाल के हाथों आईसेक्ट ग्रूप के चेयरमैन संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधिशिक्षा, साहित्य, विज्ञान संचार और सामाजिक...
21/09/2026

राज्यपाल के हाथों आईसेक्ट ग्रूप के चेयरमैन संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि

शिक्षा, साहित्य, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय ने किया सम्मानित

हजारीबाग। शिक्षा, साहित्य, विज्ञान संचार, सामाजिक उद्यमिता और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल संतोष गंगवार के हाथों आईसेक्ट ग्रूप के चेयरमैन संतोष चौबे को बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा की ओर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में सोमवार को गुरुपद संभवन रामजी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान मिला। बता दें कि विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी ने शिक्षा, साहित्य, विज्ञान संचार, सामाजिक उद्यमिता और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देते हुए मानद उपाधि के लिए चयन किया था। प्रशस्ति-पत्र में भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उनके प्रयासों को भी रेखांकित किया गया।
संतोष चौबे ने वर्ष 1985 में ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना की। उनके नेतृत्व में आईसेक्ट ने ग्रामीण, आदिवासी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में कार्य किया। उनके मार्गदर्शन में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, विभिन्न डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के विकास को भी गति मिली।
संतोष चौबे की पहचान विज्ञान लेखक और विज्ञान संचारक के साथ कवि, कथाकार और उपन्यासकार के रूप में भी है। वर्ष 1986 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘कंप्यूटर: एक परिचय’ हिंदी में विज्ञान और तकनीक को आम पाठकों तक पहुंचाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण रही। उनके छह कथा-संग्रह, चार उपन्यास और कई कविता-संग्रह प्रकाशित हैं।
शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक उद्यमिता और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय नवाचार पुरस्कार, श्वाब फाउंडेशन सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।

कैमरे की नज़र में आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग में भारत में जनजातीय विकास नीतियां : कमियां, चुनौतियां और नई दिशाएं विष...
19/09/2026

कैमरे की नज़र में आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग में भारत में जनजातीय विकास नीतियां : कमियां, चुनौतियां और नई दिशाएं विषय पर 18 और 19 सितंबर को आयोजित नेशनल सेमिनार का दूसरा दिन

आईसेक्ट विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्नजनजातीय अधिकार, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और डिज...
19/09/2026

आईसेक्ट विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

जनजातीय अधिकार, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और डिजिटल समावेशन पर देशभर के विशेषज्ञों ने रखे विचार

जनजातीय विकास में समुदाय की भागीदारी : डॉ सोनाझरिया मिंज

नीति और जमीनी जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी : अजय राज खलखो


हजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के समाजशास्त्र विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद-ईआरसी, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शनिवार को संपन्न हुई। भारत में जनजातीय विकास नीतियां : कमियां, चुनौतियां और नई दिशाएं विषय पर 18 और 19 सितंबर को आयोजित संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने जनजातीय विकास से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। उद्घाटन सत्र के पहले दिन मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता यूनेस्को की सह अध्यक्ष व जेएनयू की प्रोफेसर डॉ सोनाझरिया मिंज रहीं। उन्होंने जनजातीय विकास को केवल योजनाओं और आंकड़ों तक सीमित न रखते हुए समुदाय की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखने पर जोर दिया। उन्होंने जनजातीय समुदायों की भागीदारी, अधिकारों और स्थानीय परिस्थितियों को विकास नीतियों में पर्याप्त महत्व देने की आवश्यकता बताई।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ राज कुमार ने स्वागत भाषण में कहा कि आयोजन का उद्देश्य जनजातीय विकास नीतियों में मौजूद कमियों और चुनौतियों को अकादमिक विमर्श के केंद्र में लाना तथा इनके समाधान के लिए नई दिशाओं पर विचार करना है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कुलसचिव डॉ. मुनीष गोविंद ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी ज्ञान के प्रसार के साथ सामाजिक चुनौतियों पर शोध और सार्थक संवाद का वातावरण तैयार करना भी है। समकुलपति डॉ एसआर रथ ने जनजातीय समाज से जुड़े विषयों पर निरंतर शोध और संवाद की आवश्यकता बताई। उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
पहले दिन पैनल प्रस्तुति में आन्नदा कॉलेज, हजारीबाग के समाजशास्त्र की प्राध्यापिका डॉ ललिता राणा, सिद्धो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ यदुवंश यादव और ऑनलाइन माध्यम से प्रोफेसर डॉ मिनाकेतन बेहरा ने जनजातीय विकास नीतियों के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। पैनल की अध्यक्षता डॉ बिनोद कुमार ने की।
तकनीकी सत्रों में पांचवीं अनुसूची, संवैधानिक संरक्षण, जनजातीय उपयोजना, पेसा अधिनियम-1996, भूमि अधिकार, विस्थापन तथा विकास परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
दूसरे दिन पैनल प्रस्तुति में सीवी रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अनुपम कुमार तिवारी, एनसीडीएस, भूवनेश्वर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राज कुमार खोसला और ऑनलाइन माध्यम से प्रवासी अध्ययन, केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ नरेश कुमार ने विचार रखे। इनके वक्तव्यों में जनजातीय विकास को स्थानीय जरूरतों, सामाजिक परिस्थितियों और प्रभावी नीति क्रियान्वयन से जोड़ने पर जोर रहा।
इसके बाद वन अधिकार अधिनियम-2006, सामुदायिक वन अधिकार, जनजातीय आजीविका, स्थानीय अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए। आगे के सत्रों में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय संकट, डिजिटल शासन, तकनीकी समावेशन, जनजातीय पहचान, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली पर भी शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के उप निदेशक अजय राज खलखो ने जनजातीय विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, अधिकार और स्थानीय आवश्यकताओं को नीति निर्माण के केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोध संस्थानों, सरकार और समाज के बीच बेहतर समन्वय से जनजातीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
समापन अवसर पर डॉ राज कुमार ने दो दिनों की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
समापन सत्र में विशेष अतिथि संतोष सरकार और नरेंद्रनाथ टिकादार (आईसीएसएसआर-ईआरसी) ने भी विचार रखे। प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। मंच संचालन डॉ प्रीति व्यास व कोमल पल्लवी भेंगरा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ राजकुमार ने किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में एंकर समिति की
डॉ प्रीति कुमारी, फरहीन सिद्दीकी, कोमल पल्लवी भेंगरा, मंच समितिसे पंकज प्रज्ञा, डॉ नागेश्वरी कुमारी,
डॉ रुचि कुजूर, प्रियंका कुमारी, मानसी प्रधान
दीप प्रज्वलन समिति से पंकज प्रज्ञा, डॉ. नागेश्वरी कुमारी, स्वागत समिति से
प्रति-कुलपति
निदेशक, व्यावसायिक शिक्षा संयोजक
सह-संयोजक
सभी अधिष्ठाता (डीन)
अनुशासन समिति से
हिमांशु चौधरी, उदय रंजन, डॉ. रितेश कुमार, संजय कुमार, आदित्य कुमार, मुकेश कुमार, विपणन अधिकारी, डॉ नागेश्वरी, बिशाखा बाला, पंजीकरण समिति से रवि कांत गौतम कुमार, सत्यार्थी ज्ञान प्रकाश, सबिता कुमारी, सृष्टि, रिपोर्ट लेखन समिति से डॉ रितेश कुमार, डॉ सुजीत कुमार, कोमल पल्लवी भेंगरा, फरहीन सिद्दीकी, तकनीकी समिति से एफओ सौरभ सरकार,
राजेश कुमार, संजय सिंह
प्रमोद कुमार, मीडिया समिति से मो शमीम अहमद, रोहित राणा, आयोजन स्थल एवं आवास व्यवस्था समिति से राकेश कुमार (डीआर), अमित कुमार (एआर), भोजन समिति से उदय रंजन श, डॉ. सत्य प्रकाश, रोहित लाल, मुकेश कुमार, मुन्ना कुमार, राहुल राजवार
शिवम कुमार, आयुष, ऑनलाइन सत्र समिति
अजय कुमार, विजय लाल, परिवहन समिति से राकेश मिश्रा उप-पंजीयक
हिमांशु चौधरी
सूरज कुमार कुशवाहा सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा

Some people build institutions.Some build ideas.And some build a movement that outlives both. From Bhopal to the grassro...
16/09/2026

Some people build institutions.
Some build ideas.
And some build a movement that outlives both.

From Bhopal to the grassroots of India.

Shri Santosh Choubey has spent his journey turning an engineer’s vision into a larger purpose advancing education, literature, science and social change.

Today, that journey receives a distinguished honour an Honorary Doctorate from Babu Dinesh Singh University, Garhwa, Jharkhand 🎓

A proud moment for all of us.

And a reminder that when knowledge meets purpose, the impact can last for generations.

आईसेक्ट विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति आधारित बीफार्म पाठ्यक्रम पर राष्ट्र स्तरीय एफडीपी आयोजितहजारीबाग। आईसेक्ट विश्व...
12/09/2026

आईसेक्ट विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति आधारित बीफार्म पाठ्यक्रम पर राष्ट्र स्तरीय एफडीपी आयोजित

हजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के फार्मेसी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के सहयोग से शनिवार को राष्ट्रीय स्तर के एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आधारित बीफार्म पाठ्यक्रम-2026 के प्रति अभिमुखीकरण एवं संवेदनशीलता था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने फार्मेसी शिक्षा में बदलते स्वरूप और नई शैक्षणिक आवश्यकताओं पर विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग के प्राचार्य डॉ प्रो. सुनील कुमार वर्मा, मलिबा फार्मेसी कॉलेज महुआ, गुजरात के प्रो. डॉ श्रीकांत विजय राव जोशी, एलएम कॉलेज ऑफ फार्मेसी के एसो. प्रो. डॉ केतन रंच, जी पुल्ला रेड्डी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, अहमदाबाद के प्रो. डॉ बी. महादेव रेड्डी, आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद, समकुलपति डॉ एसआर रथ सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इसके बाद आईसेक्ट विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के प्राचार्य सच्चिदानंद बेहरा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ प्रो. सुनील कुमार वर्मा ने कहा कि फार्मेसी शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध समाज के स्वास्थ्य और सुरक्षित औषधि व्यवस्था से है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ कौशल, व्यावहारिक समझ और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
पहले तकनीकी सत्र में डॉ श्रीकांत विजय राव जोशी ने बीफार्म पाठ्यक्रम-2026 की रूपरेखा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप हुए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नया पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान देने के बजाय उन्हें व्यावहारिक और परिणाम आधारित सीखने की दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर देता है। शिक्षकों को भी बदलते पाठ्यक्रम के साथ अपनी शिक्षण पद्धति को निरंतर विकसित करना होगा। दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ केतन रंच ने फार्मेसी पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेशन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले समय में फार्मेसी शिक्षा और शोध को नई दिशा देने वाली तकनीक है। इसका उद्देश्य शिक्षक की भूमिका को कम करना नहीं, बल्कि शिक्षण, शोध और विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। तीसरे सत्र में डॉ बी. महादेव रेड्डी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, परिणाम आधारित शिक्षा एवं उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि विद्यार्थी कक्षा में सीखी बातों को व्यवहार और कार्यक्षेत्र में कितना प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है। परिणाम आधारित शिक्षा इसी सोच को मजबूत करती है और विद्यार्थियों को रोजगार एवं पेशेवर जिम्मेदारियों के लिए तैयार करती है।
कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को पाठ्यक्रम में हो रहे बदलावों की जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए उपयोगी बताया। कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि फार्मेसी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण बदलाव के लिए शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण जरूरी है। यह कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समकुलपति डॉ एसआर रथ ने कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका अहम है।
कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। इसके बाद सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। मंच संचालन डॉ प्रीति व्यास व धन्यवाद ज्ञापन डॉ आलोक राय ने किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

आईसेक्ट विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति आधारित बीफार्म पाठ्यक्रम पर राष्ट्र स्तरीय एफडीपी 12 सितंबर कोहजारीबाग। आईसेक्ट...
10/09/2026

आईसेक्ट विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति आधारित बीफार्म पाठ्यक्रम पर राष्ट्र स्तरीय एफडीपी 12 सितंबर को

हजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के फार्मेसी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्र स्तरीय एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन शनिवार, 12 सितंबर को विश्वविद्यालय परिसर में किया जाएगा। कार्यक्रम का विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आधारित बी फार्म पाठ्यक्रम-2026 के प्रति अभिमुखीकरण एवं संवेदनशीलता रखा गया है।
कार्यक्रम में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यकारी सदस्य धर्मेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। साथ ही देश नामचीन विशेषज्ञों की भी कार्यक्रम में मौजूदगी रहेगी। बता दें कि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे मुख्य संरक्षक, कुलपति डॉ गौरव शुक्ला संरक्षक, समकुलपति डॉ एसआर रथ सह-संरक्षक तथा कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे। फार्मेसी विभाग के प्राचार्य सचिदानंद बेहेरा संयोजक एवं सहायक प्राध्यापक रोहित लाल सह-संयोजक हैं।
कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम में हो रहे बदलावों की जानकारी शिक्षकों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नई शैक्षणिक व्यवस्था के अनुरूप बेहतर शिक्षण के लिए तैयार करेंगे।
कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने बताया कि फार्मेसी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण बदलाव के लिए शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण जरूरी है। यह कार्यक्रम ज्ञान, शिक्षण पद्धति और पाठ्यक्रम की समझ को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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