25/08/2026
अजीत भारती पर एट्रोसिटी एक्ट मे FIR हुई है।
माजरा कुछ यूँ है कि भारती ने "सवर्णों के समर्थन मे "कुछ फायरब्रांड" कहा। जवाब मे, किसी "अवर्ण" ने कह दिया कि अपनी बहन को चंद्रशेखर रावण से ब्याह दो।
यदि यह सत्य है, तो अजीत क्या, किसी का भी पारा चढ़ेगा। उन्होंने तमाम बाउंड्रीज तोड़कर जवाब दिया। तो अगले ने उनपर एट्रोसिटी मे FIR करवा दी।
•••••
पोस्ट अजीत भारती पर नहीं, गाँधी पर है।
गाँधी ने अछूत उद्धार पर 1933 से काम शुरू किया। दरअसल, 1932 मे उन्होंने राजनीति से एक तरह से सन्यास ले लिया था। कांग्रेस की चवन्नी सदस्यता छोड़ दी। हरिजन अख़बार शुरू किया। हरिजन सेवक संघ बनाया।
दलितों को समाज की मुख्यधारा मे स्पेस देने के लिए देश के हर राज्य मे घूमते रहे।अछूतोंदार यात्रा निकाली। उन्हें मंदिरों में प्रवेश दिलाने के लिए प्रयत्न किया।
•••
अस्पृश्यता को उन्होंने मानवता के प्रति जघन्य अपराध कहा। ।
उड़ीसा कर्नाटक और दक्षिण के इलाकों में काफी घूमे।सेलिब्रिटी होने के नाते उन्हें बहुत से विवाह कार्यक्रम में आमंत्रित भी किया जाता।
तब एक बात उन्होंने बहुत स्पष्ट कहीं- मैं केवल ऐसे विवाह में जाऊंगा.. जिसमें एक पक्ष हरिजन हो।
दरअसल गांधी ने यह समझ लिया था की कानून,दबाव या दीगर तरीके से जाति खत्म नहीं होगी। यह तभी जाएगी जब समाज में वैवाहिक संबंध जातिगत बंधनों को तोड़कर बने।
•••
अपने तमाम सवर्ण, लिबरल साथियों को यह कहते देखता हूं कि वह तो जाति नहीं मानते। सबको बराबर समझते हैं, साथ बैठते, खाते पीते हँसते हैँ। पर अगर यह प्रश्न करो - कि क्या किसी अपने भाई, बहन, बेटा, बेटी का किसी दलित लड़के/लड़की से विवाह करेंगे??
वे प्रश्न का बुरा मान जाते हैं।
पर सत्य यह है कि उनके साथ खाने पीने पीने, बैठने, हंसने बोलने लेने से, जातिगत विभाजन खत्म नहीं होगा। यहाँ तो युवाओं मे प्रेम भी, जाति देखकर होता है। ऊंच-नीच की आदत, उसकी विरासत, पीढ़ी दर पीढ़ी कायम रहती है।
•••
वह गाँधी के प्रयास के 90 साल बाद भी समाज मे इतनी मज़बूत है, की कोई अजीत, अपनी बहन के किसी दलित से ब्याह जाने की मांग पर, गालियां दे देता है।
औऱ यह गुस्सा हमें जस्टिफाइड भी लगता है।
पर यह बात समझिये कि,प्रोग्रेसिव होने का दम वहीं तक सीमित है, ज़ब तक उनकी शुद्धता और उच्चता कायम रहे। औऱ जब तक ये शुद्धता/ उच्चता का भाव कायम है,
आरक्षण एक जरूरी उपाय है।
उसे जारी रहना चाहिए।
••••
ताकि दलित औऱ शोषित जब कभी थाने, कचहरी, कोर्ट, सरकारी ऑफिस, अस्पताल, या स्कूल मे जाये। तो उसे सम्मान औऱ बराबरी से - न्याय- इलाज- शिक्षा देने वाले, उसके अपने समाज के लोग का पर्याप्त संख्या में मौजूद हो।
भले ही एंट्रेंस एग्जाम में उन्हें कम नंबर मिले थे।
आरक्षण का परपज अलग है। वह गरीबी उन्मूलन की योजना नहीं है। यह एक कंपनसेशन है। आर्थिक आधार पर आरक्षण अपने आप में बकवास है।
•••
आप या तो गांधी के रास्ते पर चलकर दलितों को बराबरी का स्पेस देंगे, रोटी बेटी का संबंध रखेंगे। आने वाले 100 साल मे समाज होमोजिनस बना देंगे।
या फिर ऐसा न करने का कंपनसेशन, संविधान अंबेडकर के रास्ते चलकर देगा। आरक्षण के रूप में देगा।
•••
लेकिन अजीत भारती,औऱ आरक्षण के खिलाफ लड़ रहे युवा दोनों हाथों में लड्डू चाहते हैं।
सो क्या आश्चर्य कि उनपर एट्रोसिटी एक्ट मे FIR हुई है।