21/08/2026
के.एच. चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से जेएनवीयू के नवीन परिसर में 500 पौधों का रोपण
कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने दिया ‘हरित परिसर–स्वच्छ परिसर’ का संदेश
जोधपुर। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के नवीन परिसर को हरित, स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्त्वपूर्ण पहल करते हुए व्यापक पौधारोपण अभियान आयोजित किया गया। के.एच. चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस अभियान के अंतर्गत परिसर में लगभग 500 पौधे लगाए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने की।
कार्यक्रम में के.एच. चैरिटेबल फाउंडेशन की मुख्य ट्रस्टी श्रीमती अरुणा ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। भामाशाह श्री खेमचंद खत्री तथा लघु उद्योग भारती के श्री सुरेश बिश्नोई एवं श्री महावीर चोपड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्यों, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अभियान के अंतर्गत परिसर में 10 से 15 फीट ऊँचाई वाले चीकू, इमली, अमरूद, जामुन और खारी बादाम सहित विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए। इसके साथ ही राजस्थान की स्थानीय एवं पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी प्रजातियों—खेजड़ी, रोहिड़ा, शीशम तथा गुलमोहर—को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। यह पहल विश्वविद्यालय के नवीन परिसर को भविष्य में एक सघन एवं जैव-विविधतापूर्ण ‘ग्रीन कैंपस’ के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा, “विश्वविद्यालय का नवीन परिसर केवल शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का भी आदर्श केंद्र बने—यही हमारा प्रयास है। आज लगाए गए पौधे भविष्य में विद्यार्थियों तथा समाज के लिए एक समृद्ध हरित विरासत का निर्माण करेंगे। हमारा उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनका समुचित संरक्षण करते हुए उन्हें पूर्ण विकसित वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना है।”
के.एच. चैरिटेबल फाउंडेशन की मुख्य ट्रस्टी श्रीमती अरुणा ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के हरित विकास में योगदान देना फाउंडेशन के लिए प्रसन्नता एवं गौरव का विषय है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक उत्तरदायित्व बताते हुए प्रत्येक पौधे की सुरक्षा और नियमित देखभाल सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
भामाशाह श्री खेमचंद खत्री ने कहा कि पौधारोपण भावी पीढ़ियों के लिए किया जाने वाला सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण निवेश है। विश्वविद्यालय परिसर में इतने व्यापक स्तर पर आयोजित यह अभियान विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने तथा समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है।
श्री सुरेश बिश्नोई ने कहा कि राजस्थान की पारिस्थितिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी खेजड़ी और रोहिड़ा जैसी स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय वनस्पतियों को प्राथमिकता दिया जाना सराहनीय है तथा ऐसे प्रयासों को समाज का व्यापक सहयोग मिलना चाहिए।
श्री महावीर चोपड़ा ने कहा कि पौधा लगाना पर्यावरण संरक्षण की प्रक्रिया का प्रारंभ है, जबकि उसका नियमित पोषण एवं संरक्षण वास्तविक पर्यावरण सेवा है। विश्वविद्यालय द्वारा पौधों की सुरक्षा और देखभाल के लिए की गई व्यवस्थाएँ इस अभियान को प्रभावी एवं स्थायी बनाने में सहायक सिद्ध होंगी।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ओमप्रकाश बिश्नोई ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसा हरित परिसर विकसित करना है, जहाँ पर्यावरण संरक्षण शिक्षा एवं संस्कार का अभिन्न अंग बने। के.एच. चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा पौधों के साथ ट्री-गार्ड, जालीदार तारबंदी तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। इससे रोपित पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्त्वपूर्ण सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिवार द्वारा पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाएगी तथा भविष्य में भी चरणबद्ध रूप से व्यापक पौधारोपण अभियान संचालित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. संगीता लुकड़; सामाजिक विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता एवं सिंडिकेट सदस्य प्रो. कांता कटारिया; सिंडिकेट सदस्य प्रो. विकल गुप्ता; सायंकालीन अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. कृष्ण अवतार गोयल; पूर्व अधिष्ठाता प्रो. मंगलाराम बिश्नोई; अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. राम सिंह; प्रो. एस.के. हरित; निजी महाविद्यालय संगठन के अध्यक्ष श्री शैतान सिंह चौधरी; श्री प्रदीप राठी; डॉ. अर्जुन सिंह सांखला; डॉ. महिपाल सिंह; पर्यावरणप्रेमी श्री खंभूराम बिश्नोई एवं श्री प्रदीप बिश्नोई; विश्वविद्यालय के संपदा अधिकारी डॉ. के.आर. मेघवाल; डॉ. देवकरण तथा डॉ. नायक के. मेघवाल सहित शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हितेन्द्र गोयल ने किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों ने रोपित पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया तथा “हरित परिसर–स्वच्छ परिसर” के लक्ष्य को साकार करने के लिए सामूहिक सहभागिता का आह्वान किया।