30/03/2026
कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (सीईसी) के तत्वावधान में एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर, जोधपुर के सहयोग से “डिजिटल लर्निंग क्रांतिः शिक्षा पर एआई के प्रभाव का अन्वेषण - विकसित भारत 2047” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में देशभर से विभिन्न शैक्षणिक विषयों के लगभग 80 संकाय सदस्य भाग ले रहे हैं।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए निदेशक, कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (सीईसी) प्रो. (डॉ.) परिक्षत सिंह मनहास ने शिक्षण पद्धतियों में एआई के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तकनीकी नवाचार के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के संतुलित दृष्टिकोण की वकालत की। विशिष्ट अतिथि अध्यक्ष, ई-लर्निंग विशेष केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली प्रो. टी. वी. विजय कुमार ने शिक्षा 4.0 के प्रतिमान पर आधारित ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षा में एआई के अवसरों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसकी सीमाओं के प्रति भी सजग रहने और नई तकनीकों के साथ गहन जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया। अतिथि वक्ता निदेशक, के.एन. कॉलेज फॉर विमेन एवं डीन, विज्ञान संकाय, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय प्रोफेसर संगीता लूंकड़ ने तकनीकी प्रगति के बीच मानवीय मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई को मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी उपकरण के रूप में अपनाना चाहिए। उद्घाटन सत्र के प्रारंभ में ईएमएमआरसी निदेशक प्रो. बी. आर. गाड़ी ने स्वागत भाषण में शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन के महत्व और भविष्य के शिक्षण तंत्र को आकार देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। पूर्व निदेशक सीईसी और यूजीसी के पूर्व सचिव प्रो. जी. डी. शर्मा ने एआई के आलोचनात्मक मूल्यांकन और चिंतन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सत्र का समापन डॉ. सीएच. पेडू के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उद्घाटन सत्र में सिंडीकेट सदस्य एवं वाणिज्य संकाय अधिष्ठाता प्रोफेसर सुनील मेहता, डॉ विकल गुप्ता, प्रोफेसर के आर गेनवा, प्रोफेसर कृष्ण अवतार गोयल, डॉ अनिल व्यास, प्रोफेसर प्रवीण गहलोत, प्रोफेसर के एन व्यास, प्रोफेसर कल्पना पुरोहित सहित विश्वविद्यालय और विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र के पश्चात आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. समीर सहस्रबुद्धे (आईआईटी, गांधीनगर) ने शिक्षण को शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर दिया। वहीं द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रो. टी. वी. विजय कुमार (अध्यक्ष, ई-लर्निंग विशेष केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) और तृतीय सत्र में डॉ. रमेश चंद्र शर्मा (डॉ. बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली) ने शिक्षकों के लिए एआई दक्षता के महत्व को रेखांकित किया। प्रथम दिन का समापन पैनल डिस्कशन से हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया। सभी सत्रों का संचालन डॉ राजश्री राणावत ने किया।