02/04/2026
संस्कृत विश्वविद्यालय में हनुमान जयंती पर विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन
कैथल की भूमि से हनुमान जी का विशेष सम्बन्ध रहा है – प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत
कैथल, 2 अप्रैल 2026। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल द्वारा हनुमान जयंती के पावन अवसर पर दिनांक 02 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को प्रातः 11:30 बजे टीक परिसर स्थित सभागार में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिससे सभागार का वातावरण भक्तिमय और ज्ञानमय दोनों बना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात विद्वान आचार्य बृज बिहारी भारद्वाज तथा मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य सतीश आर्य की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन ज्योतिष विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवीन शर्मा द्वारा किया गया तथा कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी का स्वागत व आभार व्यक्त किया। छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक ने अतिथियों का परिचय कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत् मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हनुमान जयंती के धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात योग विभागाध्यक्ष डॉ. रामानन्द मिश्र ने अपने व्याख्यान में हनुमान जी के आदर्श चरित्र, उनकी अद्वितीय भक्ति, बल, बुद्धि और विनम्रता का विस्तार से वर्णन किया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ किया, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक और ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा।
अपने उद्बोधन में विशिष्ट अतिथि आचार्य बृज बिहारी भारद्वाज ने हनुमान जी को सेवा, कर्म, भक्ति और पुरुषार्थ का सर्वोच्च प्रतीक बताते हुए कहा कि वे केवल धार्मिक आस्था के केन्द्र ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन के भी आदर्श मार्गदर्शक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान जी एक उत्कृष्ट वार्ताकार और कुशल परामर्शदाता थे, जिनकी नीतियाँ आज भी प्रासंगिक हैं।
मुख्य वक्ता आचार्य सतीश आर्य ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य में कहा कि विश्व के महान चरित्रों में हनुमान जी अद्भुत, विलक्षण और अद्वितीय हैं। उन्होंने हनुमान जी के व्यक्तित्व को शक्ति, ज्ञान और समर्पण का अनुपम संगम बताते हुए युवाओं को उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने कहा कि कैथल की भूमि का हनुमान जी से विशेष संबंध रहा है। उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि युद्ध के दौरान अर्जुन ने हनुमान जी का आवाहन किया था, जिससे इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे हनुमान जी के आदर्शों, निष्ठा, समर्पण और परिश्रम को अपने जीवन में अपनाएं।
इस अवसर पर श्री श्याम बंसल, डॉ जितेन्द्र ठकराल व श्री उमेश शर्मा सहित कैथल के अनेक गणमान्य जन भी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय से वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार, हिन्दू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स, डॉ. शर्मिला, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. रमाशंकर, डॉ. हरीश कुमार, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ, श्री रोहित कुमार एवं श्रीमती माधवी सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।