महर्षिवाल्मीकिसंस्कृतविश्वविद्यालयः MVSU Kaithal

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महर्षिवाल्मीकिसंस्कृतविश्वविद्यालयः  MVSU Kaithal A State University established under Haryana Act No. 20 of 2018 Recognized under UGC 2(F)

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में संबद्ध महाविद्यालयों की उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक संपन्नमहर्षि वाल्मीकि संस्कृत ...
19/08/2026

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में संबद्ध महाविद्यालयों की उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक संपन्न

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय (MVSU) के टीक परिसर में माननीय कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्राध्यापक प्रतिनिधियों की एक उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय और संबद्ध संस्थानों के बीच प्रशासनिक एवं शैक्षणिक समन्वय को सुदृढ़ करना, आगामी परीक्षाओं में शुचिता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रोडमैप तैयार करना था।

बैठक का शुभारंभ कुलसचिव एवं महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. संजय गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने बैठक के उद्देश्यों एवं कार्यसूची की रूपरेखा प्रस्तुत की।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने कहा, "राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है; यह भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सामंजस्यपूर्ण एकीकरण के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का एक महायज्ञ है। विद्यार्थियों का समग्र विकास तभी संभव है जब हमारे पारंपरिक शास्त्रों के ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान और नवाचार के साथ जोड़ा जाए।" उन्होंने आगे 2047 तक के लिए तीन रणनीतिक चरणों में संरचित विश्वविद्यालय के लिए अपने व्यापक दृष्टिकोण का अनावरण किया, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप है। उन्होंने परीक्षाओं के संचालन, परिणामों की समयबद्ध घोषणा और पारदर्शिता, दक्षता एवं शैक्षणिक सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही विभिन्न छात्र-केंद्रित पहलों में लाई जा रही नवीन प्रणालियों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने प्राचार्यों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता, बल्कि नैतिक मूल्यों, शोध प्रवृत्ति और रोजगारपरक कौशल को भी विकसित करें।

परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला ने आगामी परीक्षाओं के व्यवस्थित, निष्पक्ष और समयबद्ध आयोजन के लिए एक व्यापक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की शुचिता बनाए रखने, गोपनीयता, पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित करने और परिणामों की समय पर घोषणा को सुगम बनाने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

तत्पश्चात, NEP समन्वयक डॉ. कृष्ण चंद्र पांडे ने नवीन पाठ्यचर्या ढांचे, क्रेडिट ट्रांसफर प्रणाली और कौशल विकास पाठ्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि प्राच्य और आधुनिक विषयों का एकीकृत दृष्टिकोण किस प्रकार रोजगार और उच्च अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा।

संवाद सत्र के दौरान प्राचार्यों एवं प्राध्यापकों ने अपने संस्थागत अनुभव और बहुमूल्य सुझाव साझा किए। श्री माता मनसा देवी संस्कृत राजकीय महाविद्यालय, पंचकुला की प्राचार्या डॉ. सीमा सिंह ने सभी संबद्ध संस्थानों की ओर से अपने सामूहिक विचार व्यक्त किए। उन्होंने माननीय कुलगुरु महोदय और विश्वविद्यालय की पूरी टीम की सराहना होते हुए निरंतर दिए जाने वाले सहयोग के लिए धन्यवाद किया।

संपूर्ण सत्र का कुशल संचालन महाविद्यालय उप-अधिष्ठाता डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र द्वारा किया गया। बैठक का समापन शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन एवं कल्याण मंत्र के पाठ के साथ हुआ।

दोपहर के भोजन के उपरांत सभी प्रतिनिधियों ने मुंदड़ी, कैथल स्थित विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन मुख्य परिसर का भ्रमण किया। सदस्यों ने विश्वविद्यालय के तीव्र बुनियादी ढांचागत विकास पर अत्यंत संतोष और विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कुलगुरु को विश्वविद्यालय की स्थापना में अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया और कहा कि MVSU परिवार का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

सभी सदस्यों ने नए परिसर से फिलहाल विदा ली और शीघ्र ही पुनः आकर विश्वविद्यालय के विकास कार्यों को देखने तथा इस महत्वपूर्ण यात्रा का अभिन्न अंग बने रहने का वादा किया।

*विश्वविद्यालय के टीक परिसर में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व : कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने किया ध्व...
15/08/2026

*विश्वविद्यालय के टीक परिसर में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व : कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने किया ध्वजारोहण*

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के टीक प्रांगण में स्वाधीनता का महापर्व अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और राष्ट्रराग के साथ मनाया गया। स्वतंत्रता की इस बेला में संपूर्ण परिसर भारत माता के जयकारों और राष्ट्रभक्ति की हिलोरों से प्रदीप्त हो उठा।

कार्यक्रम के स्वर्णिम क्षणों का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत के कर-कमलों द्वारा किए गए ध्वजारोहण से हुआ। तिरंगे के गगनचुंबी आरोहण के साथ ही संपूर्ण प्रांगण में उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की स्वरलहरियां बिखेरकर अपनी मातृभूमि के प्रति अगाध निष्ठा व्यक्त की। तत्पश्चात, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संजय गोयल ने अपने स्वागत वक्तव्य से इस उत्सव में सहभागिता कर रहे सभी अतिथियों का अभिनंदन और स्वागत किया।

संस्कृति और माटी से जुड़े देशभक्ति गीतों के गूंजते स्वरों ने वातावरण को ऐसा जीवंत बनाया कि प्रत्येक उपस्थित जन के हृदय में राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना हिलोरे लेने लगी।

समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने उपस्थित जनों को स्वाधीनता दिवस की आत्मीय शुभकामनाएं दीं। अपने प्रेरणास्त्रोत उद्बोधन में उन्होंने भारतीय मनीषा को रेखांकित करते हुए पावन संदेश दिया कि "बौद्धिक रूप से स्वतंत्रता ही वास्तविक स्वतंत्रता है" और हमें अपनी प्राचीन भारतीयता के सुदृढ़ आधार पर ही इस बौद्धिक स्वाधीनता को अर्जित करना है।

अंत में शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक ने इस भव्य आयोजन को सफलता के शिखर तक पहुंचाने के लिए सभी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की और आभार व्यक्त किया।

इस राष्ट्रीय उत्सव की गरिमा को बढ़ाने के लिए परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला, वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार भारती, डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स, हिन्दू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा, व्याकरण विभागाध्यक्षा डॉ. शर्मिला, योग विभाग प्रभारी डॉ. रामानन्द मिश्र, जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ, डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. रमाशंकर, एवं श्री रोहित सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यारसिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।

वंदे मातरम् से गूंजी तपोभूमि मूंदरी : महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय की भव्य तिरंगा यात्रा से बना राष्ट्रभक्ति का...
14/08/2026

वंदे मातरम् से गूंजी तपोभूमि मूंदरी : महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय की भव्य तिरंगा यात्रा से बना राष्ट्रभक्ति का वातावरण

राष्ट्र के प्रति अटूट गर्व और देशभक्ति के जीवंत प्रदर्शन से कैथल की पवित्र भूमि गूंज उठी, जब महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल ने मूंदड़ी गांव में एक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया। 'हर घर तिरंगा' अभियान के अंतर्गत आयोजित यह यात्रा मात्र एक आयोजन से आगे बढ़कर राष्ट्र, संस्कृति और विरासत का एक अनूठा संगम बन गई। जैसे ही तिरंगा ऊंचे आसमान में लहराया, गगनभेदी राष्ट्रगीतों और 'भारत माता की जय' के ओजस्वी नारों से दिशाएं गूंज उठीं, जिसने हर हृदय को स्पंदित कर मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम को प्रज्वलित कर दिया।

यह पवित्र शोभायात्रा 13 अगस्त को प्रातः 10:00 बजे मूंदड़ी में विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन मुख्य परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई। उत्साह से भरे और भावुक ग्रामीणों से अटी पड़ी गांव की गलियों से गुजरते हुए, यह यात्रा श्रद्धा के केंद्र लव-कुश तीर्थ पर संपन्न हुई। मुंदरी के ग्रामीणों ने इसमें अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया।

इस आयोजन का ऐतिहासिक महत्व भी अत्यंत गहरा था। यह कैथल की वही प्राचीन और पौराणिक भूमि 'कपिष्ठल' है, जिसकी स्थापना धर्मराज युधिष्ठिर ने की थी और जिसे संकटमोचन हनुमान का वरदान प्राप्त है—एक ऐसी धरा जहां आदिकाल से वैदिक मंत्र गूंजते रहे हैं।

यही मूंदड़ी महर्षि वाल्मीकि की पावन तपोभूमि भी है, जहां माता सीता को आश्रय मिला और जहां भगवान श्रीराम के अमर पुत्रों—लव और कुश ने ज्ञान, पराक्रम और संस्कारों की दीक्षा ली। यह अत्यंत प्रतीकात्मक था कि भारत के पहले महाकाव्य रामायण के इसी उद्गम स्थल से तिरंगे की छत्रछाया में एकता, अखंडता और राष्ट्रीय गौरव का शाश्वत संदेश प्रसारित हुआ।

यात्रा की अध्यक्षता करते हुए, कुलगुरू आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने लव-कुश तीर्थ पर एक ओजस्वी और बोधगम्य उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा "तिरंगा केवल तीन रंगों का संयोजन नहीं है, यह भारत की जीवंत आत्मा है। केसरिया रंग हमारे ऋषियों के त्याग और शहीदों के बलिदान का प्रतीक है, श्वेत रंग हमारी संस्कृति के शाश्वत सत्य और पवित्रता को दर्शाता है, तथा हरा रंग हमारी मातृभूमि की समृद्धि और हमारे युवाओं की असीम आकांक्षाओं का द्योतक है।"

'वंदे मातरम्' के ऐतिहासिक 150वें वर्ष का स्मरण करते हुए, आचार्य अनायथ ने छात्रों और ग्रामीणों को इसके गौरवशाली इतिहास से अवगत कराया। उन्होंने स्मरण किया कि कैसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 1875 में रची गई यह अमर कृति स्वाधीनता का मंत्र, क्रांतिकारियों का उद्घोष और वह प्राण-शक्ति बनी, जिसने बंगाल से लेकर पंजाब तक और कन्याकुमारी से लेकर कैथल तक संपूर्ण राष्ट्र को भारत माता की आराधना के एक अटूट सूत्र में पिरो दिया था। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि 'वंदे मातरम्' मात्र एक गीत नहीं, अपितु पराधीन राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना का प्रस्फुटन था।

कार्यक्रम उस क्षण अपने भावनात्मक चरम पर पहुंच गया जब छात्र, शिक्षक और ग्रामीण—संपूर्ण जनसमूह एकस्वर में संपूर्ण 'वंदे मातरम' के गान में लीन हो गया, जिसके पश्चात राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' का भावपूर्ण गान हुआ। महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि पर गूंजते इन पवित्र स्वरों ने एक अविस्मरणीय और रोमांचकारी वातावरण का सृजन किया। तत्पश्चात, विश्वविद्यालय के युवाओं ने 'विकसित भारत @2047' के संकल्प को दोहराते हुए एक दृढ़ प्रतिज्ञा ली। उन्होंने अपने ज्ञान, आचरण और सेवाभाव को एक आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से सशक्त और विकसित भारत के निर्माण के लिए समर्पित करने का प्रण लिया।

इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. संजय गोयल और अधिष्ठाता शैक्षणिक डॉ. जगत नारायण कौशिक की गरिमामय उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संयोजन योग विभाग के प्रभारी डॉ. रामानंद मिश्र द्वारा किया गया।

नए भारत की संकल्पना तब साकार होती दिखी जब पूरा विश्वविद्यालय परिवार कंधे से कंधा मिलाकर तिरंगा थामे, वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ कैथल की गौरवशाली विरासत को संजोते हुए और विकसित भारत का संकल्प लेते हुए आगे बढ़ा। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक प्रो. भग सिंह बोडला, डॉ. सुरेंद्र पाल वत्स, डॉ. कृष्ण चंद्र पांडेय, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा, डॉ. नरेश शर्मा, डॉ. शर्मिला, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविंद वल्लभ सहित समस्त संकाय सदस्य, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Tricolour and Vande Mataram Resonate in Tapobhoomi Mundri: Maharishi Valmiki Sanskrit University's Grand Tiranga Yatra I...
14/08/2026

Tricolour and Vande Mataram Resonate in Tapobhoomi Mundri: Maharishi Valmiki Sanskrit University's Grand Tiranga Yatra Ignites Patriotic Fervour

In a resounding spectacle of national pride that made the sacred soil of Kaithal vibrate with patriotism, Maharishi Valmiki Sanskrit University, Kaithal organized a grand, spirited and soul-stirring Tiranga Yatra at Mundri village today, 13th August 2026.

Organized under the clarion call of the 'Har Ghar Tiranga' campaign, the Yatra transcended a mere march to a Sangam of Rashtra, Sanskriti and Virasat. As the Tiranga soared high, the skies echoed with soulful patriotic melodies and thunderous, spirited chants of 'Bharat Mata Ki Jai', stirring every soul and igniting unwavering love for the Motherland.

The sacred procession was flagged off at 10:00 AM from the University's upcoming main campus at Mundri. Winding through the village lanes lined with cheering, emotionally charged villagers, it culminated in a devout conclusion at the revered Lav-Kush Tirtha. The villagers of Mundri participated with overwhelming zeal and fervent enthusiasm.

The moment carried profound historical resonance. This is Kaithal, the ancient and legendary Kapisthal, founded by Dharmaraja Yudhishthira and sanctified by the blessings of Sankatmochan Hanuman, a land where Vedic mantras have resonated since antiquity. And this is Mundri , the sacred Tapobhoomi of Maharishi Valmiki, where Maa Sita found sanctuary and where the immortal sons of Lord Shri Ram, Lav and Kush, imbibed knowledge, valour and sanskar. It was deeply symbolic that from this very cradle of India's first epic, the Ramayana, the eternal message of unity, integrity and national pride was carried forth under the Tiranga.

Presiding over the Yatra, Vice-Chancellor Acharya Rajendrakumar Anayat delivered a stirring and enlightening address at Lav-Kush Tirtha.

He said, "The Tiranga is not merely three colours; it is the living soul of Bharat. Saffron embodies the sacrifice of our Rishis and martyrs, White embodies the eternal Truth and purity of our Sanskriti, and Green embodies the prosperity of our motherland and the boundless aspirations of our youth."

Marking the historic 150th year of 'Vande Mataram', Acharya Anayat took the students and villagers on a journey through its glorious history. He recalled how Bankim Chandra Chattopadhyay's immortal composition, born in 1875, became the mantra of freedom, the war-cry of revolutionaries, and the soul-force that united the entire nation from Bengal to Punjab, from Kanyakumari to Kaithal, in one unbreakable thread of devotion to Bharat Mata. He emphasized that Vande Mataram was not just a song, but the spiritual awakening of a enslaved nation.

The programme reached an emotionally charged crescendo when the entire gathering , students, faculty and villagers , stood together and sang the full Vande Mataram in unison, followed by the soulful rendition of the National Anthem, Jana-Gana-Mana. The sacred chants echoing from the Tapobhoomi of Valmiki created an unforgettable, spine-tingling moment.

Thereafter, the youth of the University took a solemn oath, pledging their complete and unwavering commitment to the journey of Viksit Bharat @2047, dedicating their knowledge, character and service to building a self-reliant, culturally rooted and developed India.

The occasion was graced by the dignified presence of Registrar Prof. Sanjay Goyal and Dean Academic Dr. Jagat Narayan Kaushik. The entire event was orchestrated with exemplary dedication by Dr. Ramanand Mishra, In-charge, Department of Yoga.

The spirit of a new India came alive as the entire University Parivar , Controller of Examinations Prof. Bhag Singh Bodla, Dr. Surendra Pal Vats, Dr. Krishna Chandra Pandey, Dr. Akhilesh Kumar Mishra, Dr. Naresh Sharma, Dr. Sharmila, PRO Dr. Govind Vallabh, along with faculty members, staff, research scholars and a large contingent of students walked shoulder-to-shoulder, carrying the Tiranga, chanting Vande Mataram, upholding the glorious legacy of Kaithal, and taking a resolute pledge for Viksit Bharat.

12/08/2026
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ व्यास पूजा कार्यक्रममहर्षि वाल्मीकि संस्कृ...
10/08/2026

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ व्यास पूजा कार्यक्रम

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय एवं भारतीय शिक्षण मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के टीक परिसर में आज प्रातः 10:00 बजे गरिमामयी व्यास पूजा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने की तथा भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय मण्डल कार्य विभाग प्रमुख डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. संजय गोयल तथा अधिष्ठाता शैक्षणिक डॉ. जगत नारायण कौशिक की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यथार्थ ज्ञान से मनुष्य की बुद्धि और विवेक का स्तर बढ़ता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विद्या को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मुक्ति की साधिका माना गया है।

मुख्य वक्ता डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक की गुरु-शिष्य परंपरा के अनेक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक संदर्भों को प्रस्तुत करते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के संयोजन का दायित्व व्याकरण विभाग के सह आचार्य डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स ने निभाया तथा कार्यक्रम का सफल संचालन व्याकरण विभाग की अध्यक्षा डॉ. शर्मिला ने किया। इस अवसर पर शिक्षण मण्डल के कैथल जिला संयोजक डॉ महेश कुमार एवं डॉ अजय उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय से वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार भारती, हिन्दू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा, योग विभाग प्रभारी डॉ. रामानन्द मिश्र, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ, डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. सविता, डॉ. रमाशंकर, डॉ. कुलदीप और श्री रोहित सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

पौधारोपण की विशिष्ट उपलब्धि पर महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय से अधिष्ठाता छात्र कल्याण – डॉ. जगत नारायण तथा युवा...
05/08/2026

पौधारोपण की विशिष्ट उपलब्धि पर महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय से अधिष्ठाता छात्र कल्याण – डॉ. जगत नारायण तथा युवा कल्याण समिति के छात्र नेता - आकाश को किया गया सम्मानित

दिनांक 04-08-2026 को हरियाणा निवास, चण्डीगढ़ में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की युवा कल्याण समिति तथा अधिष्ठाता छात्र कल्याण की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें श्री राकेश संधू (ओ.एस.डी, माननीय मुख्यमन्त्री, हरियाणा) की गरिमामयी उपस्थिति रही तथा श्री कुलदीप अग्निहोत्री (उपाध्यक्ष, हरियाणा साहित्य अकादमी) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । युवा कल्याण समिति, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल की इकाई ने माह जुलाई 2026 में माननीय कुलगुरु महोदय – प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत जी के संरक्षण एवं दिशानिर्देश, कुलसचिव – प्रो. संजय गोयल के परामर्श तथा डॉ. जगत नारायण (अधिष्ठाता, छात्र कल्याण) के नेतृत्व में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें विश्वविद्यालयीय छात्रों के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधो का रोपण किया गया । दिनांक 04-08-2026 को हरियाणा निवास, चण्डीगढ़ में युवा कल्याण समिति के कार्यों पर चर्चा हेतु बैठक का आयोजन किया गया । जिसमें विश्वविद्यालय की ओर से अधिष्ठाता छात्र कल्याण – डॉ. जगत नारायण तथा छात्र नेता – युवा कल्याण समिति (आकाश) को आमन्त्रित किया गया तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम की उपलब्धि पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण – डॉ. जगत नारायण तथा छात्र नेता – युवा कल्याण समिति (आकाश) को सम्मानित किया गया ।

*विकसित भारत के लिए 'नशा मुक्त युवा' विषय पर आज सुबह युवाओं को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन की 10 मुख्य बात...
02/08/2026

*विकसित भारत के लिए 'नशा मुक्त युवा' विषय पर आज सुबह युवाओं को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन की 10 मुख्य बातें:*

1. आज सुबह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत के लिए नशा-मुक्त पीढ़ी बनाने के विषय पर युवाओं को संबोधित किया।

2. उन्होंने कहा कि विकसित भारत बनाने का सपना एक 'जन आंदोलन' बनना चाहिए और युवा इसकी नींव होने चाहिए।

3. उन्होंने युवाओं में नशे को एक गंभीर मुद्दा बताया जिस पर खास ध्यान देने की ज़रूरत है।

4. उन्होंने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार के सभी विभागों के मिलकर काम करने और आपसी रुकावटों को समाप्त करने पर जोर दिया।

5. उन्होंने विभागों के बीच की रुकावटों को खत्म करने और युवाओं से जुड़ी पहलों में तालमेल बढ़ाने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया।

6. उन्होंने कहा कि जब युवा बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक कार्यक्रमों से जुड़ेंगे, तो वे गलत कामों से दूर रहेंगे।

7. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि युवा शक्ति नए विचारों, ऊर्जा और उद्देश्य के साथ राष्ट्र-निर्माण में सबसे आगे है।

8. उन्होंने युवाओं से नशे को ना कहने की हिम्मत दिखाने का आग्रह किया और इसे एक ऐसी मनोवैज्ञानिक-सामाजिक-चिकित्सकीय समस्या बताया जो परिवार और समाज पर असर डालती है।

9. उन्होंने बताया कि 2047 तक का समय बहुत अहम है और युवाओं की क्षमता ही भारत की ताकत तय करेगी।

10. उन्होंने युवाओं से देश को एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने का संकल्प लेने को कहा।

*निष्कर्ष:* माननीय प्रधानमंत्री ने उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों से यह भी कहा कि वे इसे सही मायनों में लागू करने के लिए अगले 100 हफ़्तों तक हर रविवार को अलग-अलग संगठनों के माध्यम से एक कार्यक्रम आयोजित करें।

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में 'MY Bharat – विकसित भारत' अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का...
02/08/2026

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में 'MY Bharat – विकसित भारत' अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का हुआ सामूहिक श्रवण एवं नशा मुक्ति संकल्प कार्यक्रम

आज महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल के डॉ. भीमराव अम्बेडकर महाविद्यालय परिसर में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लॉन्च किए गए ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के अंतर्गत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन माननीय कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय गोयल भी उपस्थित रहे तथा ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा, वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. जगदीश कुमार, सुश्री वर्षा व सुश्री कुसुम सहित विश्वविद्यालय के कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के उद्बोधन को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से श्रवण किया और नशामुक्ति अभियान हेतु संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने कहा कि यह राष्ट्रीय पहल हमारी प्राचीन संस्कृत परंपरा के मूल मूल्यों के साथ पूरी तरह मेल खाती है, जो स्वस्थ शरीर और शुद्ध मन के लिए प्रेरित करती है — 'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्'।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस विजन को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 'माई भारत' (MY Bharat) पोर्टल पर सभी कर्मचारियों और छात्रों को प्रतिनिधियों के रूप में पंजीकृत किया है। विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों को मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ इस राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन के प्रतिनिधि बनने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया। यह अभियान युवाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है

विश्वविद्यालय समाज के हर वर्ग तक नशामुक्त जीवन का संदेश पहुँचाने के लिए निरंतर जागरूकता गतिविधियों, कार्यशालाओं और व्यापक कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

*जय हिंद!*

PM Modi Live: Prime Minister Narendra Modi launches ‘Nasha Mukt Yuva for Viksit Bharat Sankalp Abhiyan’ via video confer...
02/08/2026

PM Modi Live: Prime Minister Narendra Modi launches ‘Nasha Mukt Yuva for Viksit Bharat Sankalp Abhiyan’ via video conferencing. The initiative aims to inspire youth to stay away from substance abuse and encourage them to become ambassadors of positive social change in their communities.

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