19/08/2026
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में संबद्ध महाविद्यालयों की उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक संपन्न
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय (MVSU) के टीक परिसर में माननीय कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्राध्यापक प्रतिनिधियों की एक उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय और संबद्ध संस्थानों के बीच प्रशासनिक एवं शैक्षणिक समन्वय को सुदृढ़ करना, आगामी परीक्षाओं में शुचिता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रोडमैप तैयार करना था।
बैठक का शुभारंभ कुलसचिव एवं महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. संजय गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने बैठक के उद्देश्यों एवं कार्यसूची की रूपरेखा प्रस्तुत की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने कहा, "राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है; यह भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सामंजस्यपूर्ण एकीकरण के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का एक महायज्ञ है। विद्यार्थियों का समग्र विकास तभी संभव है जब हमारे पारंपरिक शास्त्रों के ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान और नवाचार के साथ जोड़ा जाए।" उन्होंने आगे 2047 तक के लिए तीन रणनीतिक चरणों में संरचित विश्वविद्यालय के लिए अपने व्यापक दृष्टिकोण का अनावरण किया, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप है। उन्होंने परीक्षाओं के संचालन, परिणामों की समयबद्ध घोषणा और पारदर्शिता, दक्षता एवं शैक्षणिक सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही विभिन्न छात्र-केंद्रित पहलों में लाई जा रही नवीन प्रणालियों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने प्राचार्यों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता, बल्कि नैतिक मूल्यों, शोध प्रवृत्ति और रोजगारपरक कौशल को भी विकसित करें।
परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला ने आगामी परीक्षाओं के व्यवस्थित, निष्पक्ष और समयबद्ध आयोजन के लिए एक व्यापक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की शुचिता बनाए रखने, गोपनीयता, पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित करने और परिणामों की समय पर घोषणा को सुगम बनाने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
तत्पश्चात, NEP समन्वयक डॉ. कृष्ण चंद्र पांडे ने नवीन पाठ्यचर्या ढांचे, क्रेडिट ट्रांसफर प्रणाली और कौशल विकास पाठ्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि प्राच्य और आधुनिक विषयों का एकीकृत दृष्टिकोण किस प्रकार रोजगार और उच्च अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा।
संवाद सत्र के दौरान प्राचार्यों एवं प्राध्यापकों ने अपने संस्थागत अनुभव और बहुमूल्य सुझाव साझा किए। श्री माता मनसा देवी संस्कृत राजकीय महाविद्यालय, पंचकुला की प्राचार्या डॉ. सीमा सिंह ने सभी संबद्ध संस्थानों की ओर से अपने सामूहिक विचार व्यक्त किए। उन्होंने माननीय कुलगुरु महोदय और विश्वविद्यालय की पूरी टीम की सराहना होते हुए निरंतर दिए जाने वाले सहयोग के लिए धन्यवाद किया।
संपूर्ण सत्र का कुशल संचालन महाविद्यालय उप-अधिष्ठाता डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र द्वारा किया गया। बैठक का समापन शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन एवं कल्याण मंत्र के पाठ के साथ हुआ।
दोपहर के भोजन के उपरांत सभी प्रतिनिधियों ने मुंदड़ी, कैथल स्थित विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन मुख्य परिसर का भ्रमण किया। सदस्यों ने विश्वविद्यालय के तीव्र बुनियादी ढांचागत विकास पर अत्यंत संतोष और विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कुलगुरु को विश्वविद्यालय की स्थापना में अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया और कहा कि MVSU परिवार का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
सभी सदस्यों ने नए परिसर से फिलहाल विदा ली और शीघ्र ही पुनः आकर विश्वविद्यालय के विकास कार्यों को देखने तथा इस महत्वपूर्ण यात्रा का अभिन्न अंग बने रहने का वादा किया।