महर्षिवाल्मीकिसंस्कृतविश्वविद्यालयः MVSU Kaithal

  • Home
  • India
  • Kaithal
  • महर्षिवाल्मीकिसंस्कृतविश्वविद्यालयः MVSU Kaithal

महर्षिवाल्मीकिसंस्कृतविश्वविद्यालयः  MVSU Kaithal A State University established under Haryana Act No. 20 of 2018 Recognized under UGC 2(F)

18/05/2026
साइकिल से कार्यालय पहुंच रहे महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत16 मई 2026, कैथल...
16/05/2026

साइकिल से कार्यालय पहुंच रहे महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत

16 मई 2026, कैथल। पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ जीवनशैली और सादगीपूर्ण कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत इन दिनों साइकिल से कार्यालय पहुंच रहे हैं। उनके इस प्रयास की विश्वविद्यालय परिसर एवं कैथल में व्यापक सराहना हो रही है।

कुलगुरु प्रो. अनायत ने कहा कि साइकिल चलाना न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह प्रदूषण कम करने और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वदेशी अपनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है, जिससे प्रेरणा लेकर हम सभी को देशहित में आगे आना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से भी दैनिक जीवन में पर्यावरण हितैषी साधनों को अपनाने का आह्वान किया है।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ ने बताया कि कुलगुरु अपने दैनिक कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग करना पसंद करते हैं। वे कैथल नगर में आवश्यक निजी कार्यों के लिए सदैव साइकिल से यात्राएं करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुलगुरु का यह कदम विश्वविद्यालय के कर्मचारियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है। इससे समाज में सादगी, अनुशासन और पर्यावरण जागरूकता का सकारात्मक संदेश जाएगा।

विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भी विश्वविद्यालय परिसर में साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि आज के समय में, जब लोग छोटी दूरी तय करने के लिए भी मोटर वाहनों का उपयोग करते हैं, ऐसे में कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत का यह प्रयास समाज के सामने एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।

A DISCOURSE ON “I AM SHIVA :  The Power of My Consciousness”By(Prof. Dr. Raj Nehru)Prelude : The inquiry into the nature...
16/05/2026

A DISCOURSE ON “I AM SHIVA : The Power of My Consciousness”
By
(Prof. Dr. Raj Nehru)

Prelude : The inquiry into the nature of the Self has been the cornerstone of Bharatiya philosophy. From the Shaiva sages of the Chola age to the seers of Kashmir, one question has echoed across our land: “Who am I?”

The Upanishads describe the four states of the Self:

Jagrat : The waking state, aware of the world

Swapna : The dream state, alive in the mind

Sushupti : Deep sleep, without experience

Turiya : Pure consciousness, where the individual merges with the Universal

Rishis of Bharat urged us to peel away layers of ego and to ask again and again, “Who am I?”, until the limited self gives way to the True Self.

Sages from the far South to the heights of Kashmir asked this one question and arrived at the same conclusion. That is the Unity in Diversity of Bharat, something that can only happen here.

Join us for this profound session with Prof. Dr. Raj Nehru

Come, sit together, and explore the question that shaped our civilization.

All seekers of knowledge and lovers of Bharat’s wisdom are welcome.

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में पारदर्शिता के साथ आयोजित हो रही हैं परीक्षाएं  कुलगुरु प्रो. अनायत ने परीक्षा ...
08/05/2026

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में पारदर्शिता के साथ आयोजित हो रही हैं परीक्षाएं
कुलगुरु प्रो. अनायत ने परीक्षा केंद्र का किया औचक निरीक्षण

कैथल : 08 मई, 2026। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल की सत्रीय परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता और कड़ाई के साथ आयोजित की जा रही हैं। परीक्षाओं के सुचारू संचालन और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने परीक्षा केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुलगुरु ने परीक्षा हॉल में जाकर परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था, प्रश्न-पत्रों के वितरण और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की। उन्होंने केंद्र अधीक्षकों और पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए कि परीक्षा की गरिमा और शुचिता बनाए रखने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन हो।

विश्वविद्यालय की सत्रीय परीक्षाएं 4 मई से शुरू हो चुकी हैं, जो आगामी 27 मई तक चलेंगी। नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने और निगरानी के लिए विश्वविद्यालय द्वारा फ्लाइंग स्क्वॉड का गठन किया गया है। साथ ही, केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी रखी जा रही है।भीषण गर्मी के मद्देनजर प्रशासन द्वारा परीक्षा केंद्रों पर पेयजल और उचित वातावरण भी सुनिश्चित किया गया है।

कुलगुरु प्रो. अनायत ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर काम कर रहा है। यदि कोई भी परीक्षार्थी अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुलगुरु ने सभी विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि परीक्षा केवल योग्यता का आकलन नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन का भी परीक्षण है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव और शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. संजय कुमार गोयल, परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला, वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार और जनसंपर्क अधिकारी डॉ गोविन्द वल्लभ उपस्थित रहे।

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राखीगढ़ी और अग्रोहा शक्तिपीठ का किया शैक्षणिक भ्रमणमहर्षि वाल्...
13/04/2026

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राखीगढ़ी और अग्रोहा शक्तिपीठ का किया शैक्षणिक भ्रमण

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में ऐतिहासिक शोध दृष्टि और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से एक विशेष शैक्षणिक भ्रमण का सफल आयोजन किया गया। कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत के कुशल मार्गदर्शन से आयोजित इस यात्रा के दौरान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने विश्व के सबसे बड़े हड़प्पाकालीन पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी और प्रसिद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र अग्रोहा शक्तिपीठ का दौरा किया। राखीगढ़ी की पुरातात्विक साइट पर विद्यार्थियों ने सिंधु घाटी सभ्यता के उन्नत नगर नियोजन, प्राचीन वास्तुशिल्प और खुदाई में मिले ऐतिहासिक अवशेषों का बारीकी से अवलोकन किया। इसके उपरांत अग्रोहा शक्तिपीठ में दर्शन किए जहाँ उन्होंने भारतीय शक्ति परंपरा और इस क्षेत्र के गौरवशाली आध्यात्मिक इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे व्यावहारिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण बौद्धिक विकास और अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भ्रमण दल का नेतृत्व कर रहे हिन्दू अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस शैक्षणिक दल में कुल 32 विद्यार्थी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा के किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर धरातल पर भारतीय इतिहास की प्राचीनता और उसकी तकनीकी उन्नति से ज्ञान कराना था। डॉ. पाण्डेय ने जोर देकर कहा कि इस तरह के प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि पैदा करते हैं। इस यात्रा के दौरान विद्यार्थियों के अकादमिक समन्वय के लिए दल में डॉ. हरीश कुमार, डॉ. गोविन्द वल्लभ, सुश्री अनामिका त्रिपाठी और सुश्री इन्दु भी विशेष रूप से उपस्थित रहे तथा विशेष सहयोगी के रूप में श्री मोहन‌ लाल उपस्थित रहे।

संस्कृत विश्वविद्यालय में हनुमान जयंती पर विचार गोष्ठी का भव्य आयोजनकैथल की भूमि से हनुमान जी का विशेष सम्बन्ध रहा है – ...
02/04/2026

संस्कृत विश्वविद्यालय में हनुमान जयंती पर विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन
कैथल की भूमि से हनुमान जी का विशेष सम्बन्ध रहा है – प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत

कैथल, 2 अप्रैल 2026। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल द्वारा हनुमान जयंती के पावन अवसर पर दिनांक 02 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को प्रातः 11:30 बजे टीक परिसर स्थित सभागार में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिससे सभागार का वातावरण भक्तिमय और ज्ञानमय दोनों बना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात विद्वान आचार्य बृज बिहारी भारद्वाज तथा मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य सतीश आर्य की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन ज्योतिष विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवीन शर्मा द्वारा किया गया तथा कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी का स्वागत व आभार व्यक्त किया। छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक ने अतिथियों का परिचय कराया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत् मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हनुमान जयंती के धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात योग विभागाध्यक्ष डॉ. रामानन्द मिश्र ने अपने व्याख्यान में हनुमान जी के आदर्श चरित्र, उनकी अद्वितीय भक्ति, बल, बुद्धि और विनम्रता का विस्तार से वर्णन किया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ किया, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक और ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा।

अपने उद्बोधन में विशिष्ट अतिथि आचार्य बृज बिहारी भारद्वाज ने हनुमान जी को सेवा, कर्म, भक्ति और पुरुषार्थ का सर्वोच्च प्रतीक बताते हुए कहा कि वे केवल धार्मिक आस्था के केन्द्र ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन के भी आदर्श मार्गदर्शक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान जी एक उत्कृष्ट वार्ताकार और कुशल परामर्शदाता थे, जिनकी नीतियाँ आज भी प्रासंगिक हैं।

मुख्य वक्ता आचार्य सतीश आर्य ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य में कहा कि विश्व के महान चरित्रों में हनुमान जी अद्भुत, विलक्षण और अद्वितीय हैं। उन्होंने हनुमान जी के व्यक्तित्व को शक्ति, ज्ञान और समर्पण का अनुपम संगम बताते हुए युवाओं को उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने कहा कि कैथल की भूमि का हनुमान जी से विशेष संबंध रहा है। उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि युद्ध के दौरान अर्जुन ने हनुमान जी का आवाहन किया था, जिससे इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे हनुमान जी के आदर्शों, निष्ठा, समर्पण और परिश्रम को अपने जीवन में अपनाएं।

इस अवसर पर श्री श्याम बंसल, डॉ जितेन्द्र ठकराल व श्री उमेश शर्मा सहित कैथल के अनेक गणमान्य जन भी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय से वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार, हिन्दू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स, डॉ. शर्मिला, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. रमाशंकर, डॉ. हरीश कुमार, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ, श्री रोहित कुमार एवं श्रीमती माधवी सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा की आधारशिला : कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायतसंस्कृत भाषा कौशल सं...
30/03/2026

संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा की आधारशिला : कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत
संस्कृत भाषा कौशल संवर्धन प्रशिक्षण शिविर का सफल समापन

कैथल, 30 मार्च 2026। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल द्वारा संस्थापित भारतीय ज्ञान परम्परा शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र तथा भारत संस्कृत परिषद् (संस्कृत आयाम, विश्व हिन्दू परिषद्) के संयुक्त तत्वावधान में 17 मार्च से 30 मार्च 2026 तक आयोजित संस्कृत भाषा कौशल संवर्धन प्रशिक्षण शिविर का समापन 30 मार्च को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह शिविर विशेष रूप से प्रशिक्षुता (इंटर्नशिप) प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा के व्यावहारिक प्रयोग के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयामों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

शिविर का समापन कार्यक्रम 30 मार्च 2026 को प्रातः 11:30 बजे विश्वविद्यालय के टीक परिसर के सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. गणेश दत्त भारद्वाज, शोध प्रमुख, अशोक सिंघल वैदिक शोध संस्थान, गुरुग्राम उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं कुलसचिव प्रो. संजय गोयल का विशेष सान्निध्य रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गोविन्द वल्लभ ने किया तथा शिविर के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्य अतिथि डॉ. गणेश दत्त भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत की समृद्ध परम्परा को पुनर्स्थापित करने में इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने संस्कृत साहित्य के विविध उदाहरणों के माध्यम से इसकी व्यावहारिकता पर प्रकाश डाला।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत ने विस्तार से कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और जीवन-मूल्यों की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक परिवेश में संस्कृत की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, क्योंकि इसमें निहित ज्ञान मानवता के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे संस्कृत को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन, व्यवहार और संवाद का हिस्सा बनाएं। साथ ही उन्होंने प्रशिक्षकों एवं आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सामूहिक प्रयास ही संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होंगे।

पूरे प्रशिक्षण काल में विद्यार्थियों की अनुशासित एवं सक्रिय सहभागिता सराहनीय रही। शिविर के सफल संचालन में छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ. जगत नारायण एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समन्वयक डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जबकि शैक्षणिक एवं प्रशासनिक सहयोग हेतु प्रो. संजय गोयल का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम में साहित्य संस्कृति संकायाध्यक्ष डॉ. जगत नारायण कौशिक, हिन्दू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डे, वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा, योग विभागाध्यक्ष डॉ. रामानन्द मिश्र, जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ, डॉ. चन्द्रकान्त, श्री रोहित सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

भारतीय ज्ञान परम्परा शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र व भारत संस्कृत परिषद् (संस्कृत आयाम,विश्व हिन्दू परिषद्) के संयुक्त तत्वा...
28/03/2026

भारतीय ज्ञान परम्परा शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र व भारत संस्कृत परिषद् (संस्कृत आयाम,विश्व हिन्दू परिषद्) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में आज 28.03.2026 शनिवार को व्याकरण विभाग की सहायक आचार्या डॉ.शर्मिला ने पाणिनि कालीन शिक्षा व्यवस्था विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।

भारतीय ज्ञान परम्परा शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र व भारत संस्कृत परिषद् (संस्कृत आयाम,विश्व हिन्दू परिषद्) के संयुक्त तत्वा...
27/03/2026

भारतीय ज्ञान परम्परा शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र व भारत संस्कृत परिषद् (संस्कृत आयाम,विश्व हिन्दू परिषद्) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में आज योग विभाग के अध्यक्ष एवं सहायक आचार्य, साहित्य विभाग डॉ.रामानन्द मिश्र ने
वर्णोच्चारण की वैज्ञानिक पद्धति विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।

Address

Temporary Campus At Drive Bhim Rao Ambedkar Govt. College, Jagdishpura (Ambala Road)
Kaithal
136027

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm

Telephone

+919350045366

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when महर्षिवाल्मीकिसंस्कृतविश्वविद्यालयः MVSU Kaithal posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The University

Send a message to महर्षिवाल्मीकिसंस्कृतविश्वविद्यालयः MVSU Kaithal:

Share