14/09/2026
हिंद की हिंदी ,
माथे की बिन्दी ।
अ,आ,आ,ई,आ गई
पन्चमेल खिचड़ी भा गई।।
गीत-संगीत लगे मनभावन,
पन्क्षी भी करें कलरव ।
त ,थ,द,ध,न के स्वर,
बने नृत्य की थिरकन।।
तीज, त्योंहारों का रंग,
बिखरे नगर, शहर-शहर।
बर्फी, रसमलाई की मिठास,
देखो बनी हिंदी की ठाठ् ।।
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं,,,
रचना बहल,
गाजियाबाद।