13/05/2014
विकसित राष्ट्र कि तरफ कदम बढ़ाते सदी के इस दूसरे दसक में कैसा हो नया भारत ? इस रास्ते में रोड़ा बनी समस्याएं कैसे दूर हो ? आज हर भारतीय के मन में एक विकसित भारत का सपना तैर रहा है . परन्तु राष्ट्र के सम्मुख अनेकों समस्याएं इस रस्ते की रूकावट बनी खड़ी है. " मैंने कुछ कोशिश की है.
देश के सामने आज बेरोजगारी एक बड़ी समस्या के रूप में खड़ी है. बेरोजगारी के कारण लाखों नवयुवक आज दिशाहीन हो गए है. पेट कि ज्वाला शांत करने के लिये बहुत से चोरी , डकैती जैसे समाज विरोधी काम करने लगे है. पैसों का लालच देकर दुश्मन देश भी उन्हें अपने ही देश के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. बहुत से नवयुवक आत्महत्या कर लेते है. इस बेरोजगारी ने व्यक्तिगत , पारिवारिक और सामाजिक विघटन को बढावा दिया है और इस तरह देश के प्रगति में बहुत नौजवान अपना हाथ नहीं बटा पा रहे.
मेरे ख्याल से इस बेरोजगारी से निज़ात पाने के लिये अगर हमारी सरकारें कुछ ध्यान इन बातों पर दे तो कुछ हद तक स्थिति सुधार सकती है
व्यवसायिक शिक्षा प्रणाली को बढावा देना अतिआवश्यक है - ताकि इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त करके नवयुवक अपने स्वयं के व्यवसाय आरम्भ कर सके तथा उनकी निर्भरता सरकारी कार्यालयों पर कम हो सके. क्योंकि सरकारी दफ्तरों मे भी सीमित संख्या रहती है और इस तरह अनेकों नवयुवकों का बेरोजगार रह जाना स्वाभाविक है.
लार्ड मैकाले की वर्षों पुरानी शिक्षा - प्रणाली में कई खामियां है - खुद उन्होंने ही इसकी रुपरेखा इस आधार पर बनाई थी कि इससे शिक्षा प्राप्त करके युवक उनके अंग्रेजी राज में सिर्फ उनके लिये क्लर्क और बाबू से ज्यादा न बन सके. ये उनकी सोंच थी मगर हम आज भी उसी शिक्षा प्रणाली पर बैल गाड़ी की तरह दुनिया के सामने चल रहे है.
शारीरिक श्रम की तरफ नवयुवकों को प्रोत्साहित करना अति आवश्यक है - हाथ में ऊँची डिग्री लेकर नवयुवक शारीरिक श्रम नहीं करना चाहते तथा इन्हें हीन भावना से देखते है. इस दृष्टीकोण के कारण वे उन सभी कामों की तरफ से मुख मोड़ लेते है जो शारीरिक श्रम से जुड़े होते है. इससे भी बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि होती है, क्योंकि सरकारी नौकरियां सीमित होती है और सबको तो मिलना मुश्किल है. अतः आवश्यकता है कुछ न कुछ वैकल्पिक व्यवसाय करने की
दरअसल ये ऐसी बुनियादी समस्याएँ है, जिनका निराकरण हम केवल सरकार के मोहताज रहकर नहीं कर सकते. बेरोजगारी एवं गरीबी जैसी समस्या से निजात पाने के लिए कोई शार्टकट नहीं हो सकता, इसके लिए स्थायी रूप से ठोस और दीर्घकालीन योजनाओ पर अमल की जरुरत है. हम सबको अपनी सोच व कार्यशैली समय के साथ, समय के अनुकूल लेकर चलनी होगी.
मैं यह नहीं कहना चाहता कि यह सरकार कि समस्या नहीं है, मगर उससे ज्यादा यह हम सबकी अपनी लड़ाई है. हम जिस किसी भी क्षेत्र में काम कर रहे हो या करना चाहते हो, उसमे ईमानदारी व निष्ठां से समर्पण करना ही होगा, अन्यथा परिणाम अनुकूल नहीं मिल सकता. पढ़-लिखकर आज का आम युवा आरामतलब होने कि बजाये कर्मशील होने की ओर प्रेरित हो तो धीरे-धीरे ही सही, वक्त उनका भी दूर नहीं.
रोजगार परक शिक्षा देश में बेरोजगारी को दूर करने के लिए और उद्योग की जरूरत के मुताबिक कुशल श्रमिक तैयार करने के लिए बहुत ही जरूरी है. लेकिन रोजगार परक शिक्षा की बुनियाद तभी बेहतर ढंग से तैयार होती है जब स्कूली शिक्षा के सभी स्तर में सुधार हो. चाहे वो प्राथमिक शिक्षा हो, माध्यमिक हो या फिर उच्च शिक्षा. स्कूली शिक्षा के दौरान ही बच्चों के रुझान का पता चलता है. इसलिए स्कूली शिक्षा के दौरान ही कौशल विकास से जुड़े विभिन्न आयामों पर काम किये जाने की जरूरत है तभी हम वर्ष 2022 तक 50 करोड़ लोगों को कुशल श्रमिकों की श्रेणी में लाने तथा पहले से कुशल श्रमिकों की कुशलता में वृद्धि करने का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं.
प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए रोजगार की आवश्यकता होती है. और जब आप रोजगार की तलाश में जाते हैं तो बाजार अप्रशिक्षित कामगार की बजाय प्रशिक्षित कामगार की मांग करता है. बाजार की इसी जरूरत को समझते हुए वर्ष 2008-09 में Punia Group Of Education के गठन की घोषणा की. उसी समय से यह संस्थान देश के विभिन्न इलाकों में व्यवसायिक शिक्षा विकास के लिए काम कर रहा है, ताकि हमारे युवा बाजार की जरूरतों के अनुरूप विविध प्रकार के व्यवसायिक कौशल ग्रहण कर बेहतर रोजगार पा सकें. संस्थान द्वारा कराये गये एक अध्ययन के अनुसार 20 ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनमें 2022 तक कुशल श्रमिकों की मांग तथा उपलब्धि में भारी अंतर होने की संभावना है. संस्था इसी अंतर को पाटने की कोशिश कर रही है. विगत तीन वर्षों से हमारी संस्था लगातार इस काम में लगी हुई है.
कार्यक्रम के तहत विविध क्षेत्रों का चयन करते हैं जैसे वाहन तथा उससे जुड़े पुर्जे का काम, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र उद्योग, चमड़ा तथा चमड़े से बनी सामग्री, रसायन तथा औषधि से जुड़ा काम, जवाहरात तथा कीमती पत्थर, निर्माण उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, हथकरघा तथा हस्तशिल्प उद्योग, गृहनिर्माण तथा गृहसज्जा की वस्तुओं का उद्योग के संबंध में प्रशिक्षण देते हैं. इसके अलावा बीपीओ, कंप्यूटर, पर्यटन तथा होटल उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग, बीमा आदि क्षेत्रों के लिए भी युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है. सबसे बड़ी बात है कि निजी क्षेत्र में हम अपनी संस्था के 75 फीसदी छात्रों को रोजगार दिलाने में कामयाब हुए हैं.
हमने इसके लिए पूरा मैकेनिज्म विकसित किया है. सेक्टर स्किल काउंसिल के द्वारा जिले में उद्योग की जरूरत, उपलब्ध कौशल की कमी (स्किल गैप एनालिसिस), युवाओं की इच्छा, उनकी अपेक्षा को ध्यान में रखकर अलग-अलग इलाकों के मद्देनजर पाठ्यक्रम का निर्धारण किया जाता है. इतना ही नहीं युवाओं को प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में दाखिला देते समय उनकी कैरियर काउंसेलिंग की भी व्यवस्था है. इतना ही नहीं हम कैरियर कांउसेलिंग के समय यह ध्यान रखते हैं कि जो युवा जिस कार्य के लायक हैं, उन्हें उसी तरह का प्रशिक्षण दिया जाये. हमारी कोशिश होती है कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण मिले और अब तक का रिकार्ड रहा है कि जिन युवाओं ने Punia Group Of Education से प्रशिक्षण लिया है, उसमें से लगभग 75 फीसदी लोगों को प्लेसमेंट दी गयी है. इसके लिए हमारे संस्थान ने निजी Company के साथ मिलकर इस काम को बढ़ाया है.