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सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी के 649वे गुरुपर्व पर DASFI कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र इकाई की ओर से आप सभी को लख-...
31/01/2026

सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी के 649वे गुरुपर्व पर DASFI कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र इकाई की ओर से आप सभी को लख-लख बधाइयां।।

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31/01/2026
31/01/2026
देश में यूजीसी द्वारा एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने तथा किसी भ...
25/01/2026

देश में यूजीसी द्वारा एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने तथा किसी भी प्रकार के शोषण—विशेषकर जातिवाद—को रोकने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में जो कदम उठाया गया है, वह निःसंदेह ऐतिहासिक और सराहनीय है। इसका मूल उद्देश्य यही है कि कोई भी दलित, पिछड़ा या वंचित विद्यार्थी जातिगत भेदभाव का शिकार न हो।
लेकिन यह एक कड़वा सच है कि वही वर्ग, जो कल तक “जात-पात की करो विदाई, हम सब भाई-भाई” के नारे लगाता था, आज इस क़ानून का खुला विरोध कर रहा है—जबकि उनकी संख्या देश में मुश्किल से 10 प्रतिशत है। सवाल सीधा है:
अगर वे जातिगत भेदभाव नहीं करते, तो इस क़ानून से उन्हें डर क्यों लग रहा है?
उनका विरोध साफ़-साफ़ यह उजागर करता है कि अब तक उनकी मंशा जाति के आधार पर दलितों और वंचितों को प्रताड़ित करने की रही है। यह क़ानून उनके उसी वर्चस्व और दमनकारी सोच पर चोट करता है—इसीलिए वे बौखलाए हुए हैं।
आज जब यूजीसी ने समानता, न्याय और गरिमा की दिशा में एक ठोस क़दम बढ़ाया है, तो यह हमारा संवैधानिक और नैतिक दायित्व बनता है कि हम इसका खुलकर समर्थन करें।

---  *🌸 संत शिरोमणि सतगुरु रविदास जी के 649वें पावन जन्मोत्सव (1 फरवरी ) पर हार्दिक शुभकामनाएं 🌸*संत शिरोमणि सतगुरु रविद...
20/01/2026

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*🌸 संत शिरोमणि सतगुरु रविदास जी के 649वें पावन जन्मोत्सव (1 फरवरी ) पर हार्दिक शुभकामनाएं 🌸*

संत शिरोमणि सतगुरु रविदास जी महाराज का पावन जन्मोत्सव हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी *DASFI (डॉ. अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इकाई* द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

आप सभी सादर आमंत्रित हैं इस पावन अवसर पर सम्मिलित होकर सतगुरु जी के उपदेशों और विचारों से प्रेरणा प्राप्त करने हेतु।

**कार्यक्रम विवरण:**
📅 **दिनांक:** 29 जनवरी 2026 (वीरवार)
🕥 **समय:** प्रातः 10:30 बजे से
📍 **स्थान:** नेहरू पुस्तकालय के साइड गार्डन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर

**निवेदक:**
डॉ. अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI),
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इकाई

📞 संपर्क: 73570 01939, 82954 54352, 70826 72434, +91 93500 75787

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15/01/2026
Dr. Babasaheb Ambedkar had selected the election symbol 'Elephant' for the party 'All India Scheduled Casts Federation' ...
05/01/2026

Dr. Babasaheb Ambedkar had selected the election symbol 'Elephant' for the party 'All India Scheduled Casts Federation' (SCF) during his political career.. 🐘

Important information about this sign is as follows:

▪️ Reason for choice: Dr. According to Ambedkar, the elephant is a symbol of intelligence, patience and strength. He said in his speech in Jalandhar on 27 October 1951, that the symbol of elephant is known to all Indians and our people are as powerful as elephant..

▪️Historical Context: Elephant was not just an election symbol, but also an elephant was accepted as the official instructor of the Constituent Assembly of India..

Earlier in 1937 elections Dr. Human being was the symbol of Ambedkar's Independent Labour Party.

डॉ. अम्बेडकर पीठ को बंद करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला है।राजस्थान विश्...
04/01/2026

डॉ. अम्बेडकर पीठ को बंद करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला है।

राजस्थान विश्वविद्यालय में हाल की घटनाएँ बताती हैं कि यह कोई साधारण शैक्षणिक फैसला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक हमला है। इससे पहले महात्मा ज्योतिराव फुले को राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से हटाया गया था, जिसे छात्रों के संघर्ष के बाद पुनः शामिल करना पड़ा।

अब उसी मानसिकता ने संविधान निर्माता बाबासाहेब के नाम से स्थापित डॉ. अम्बेडकर पीठ को ही समाप्त कर दिया। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक खतरनाक संकेत है। दैनिक नवज्योति की रिपोर्ट के अनुसार यह निर्णय बिना सार्वजनिक सूचना, बिना पारदर्शी प्रक्रिया और बिना जवाबदेही के लिया गया।

यह और गंभीर इसलिए है क्योंकि भाजपा सरकार, शिक्षा विभाग, राजस्थान शिक्षा आयोग और विश्वविद्यालय प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद चुप्पी साधे रखना लापरवाही नहीं, बल्कि सहमति और संरक्षण को दर्शाता है।

अम्बेडकर को मिटाने का अर्थ केवल एक पीठ को खत्म करना नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय, समानता, आरक्षण और वंचित तबकों के अधिकारों पर हमला है। जो ताकतें अम्बेडकर को शैक्षणिक संस्थानों से बाहर करना चाहती हैं, वे संविधान को कमजोर करना चाहती हैं।

विश्वविद्यालय में नियुक्तियों में अनियमितताओं, कथित “गैंग” और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, फिर भी सरकार और शिक्षा आयोग मौन हैं। सवाल यह नहीं कि पीठ क्यों बंद की गई, सवाल यह है कि किसके इशारे पर और किस वैचारिक एजेंडे के तहत यह किया गया।

हम स्पष्ट माँग करते हैं—

1. अम्बेडकर पीठ की तत्काल बहाली हो।
2. जिम्मेदार कुलपति व अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
3. शिक्षा आयोग व विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका की स्वतंत्र न्यायिक जाँच कराई जाए।

डॉ. अम्बेडकर किसी इमारत का नाम नहीं, बल्कि बराबरी, अधिकार और संविधान की जीवंत आवाज़ हैं। जो लोग उन्हें मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, वे भ्रम में न रहें—इतिहास उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा।

आशीष भारतीय Ashish Bhartiya
छात्र नेता, डॉ. अम्बेडकर स्टूडेंट्स फ्रंट ऑफ़ इंडिया (DASFI)
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)







सावित्रीबाई फुले के जीवन की 10 मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं - उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर 1848 में पुणे में लड़कियो...
03/01/2026

सावित्रीबाई फुले के जीवन की 10 मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं -

उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर 1848 में पुणे में लड़कियों का स्कूल खोला. इसे देश में लड़कियों का पहला स्कूल माना जाता है. उस समय तक लड़कियों के स्कूल नहीं होते थे. मिशनिरियों के स्कूल में लड़कियां भी कहीं-कहीं जाती थीं. लेकिन लड़कियों के अलग स्कूल नहीं होते थे.

अपने जीवन काल में फुले दंपति ने 18 स्कूल खोले. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शिक्षा के क्षेत्र में फुले दंपति के योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें सम्मानित भी किया.

इस स्कूल में सावित्रीबाई फुले प्रधानाध्यापिका थीं. फातिमा शेख भी इस स्कूल में पढ़ाती थीं. ये स्कूल सभी जातियों की लड़कियों के लिए खुला था. दलित लड़कियों के लिए स्कूल जाने का ये पहला अवसर था.

जब सावित्रीबाई फुले स्कूल पढ़ाने जाती थीं तो पुणे की महिलाएं उन पर गोबर और पत्थर फेंकती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि लड़कियों को पढ़ाकर सावित्रीबाई धर्मविरुद्ध काम कर रही हैं. सावित्रीबाई अपने साथ एक जोड़ी कपड़ा साथ लेकर जाती थीं और स्कूल पहुंचकर पुराने कपड़े बदल लेती थीं.

सावित्रीबाई ने अपने घर का कुआं दलितों के लिए भी खोल दिया. उस दौर में यह बहुत बड़ी बात थी.

सावित्रीबाई ने गर्भवती विधवाओं के लिए एक आश्रयगृह खोला, जहां वे अपना बच्चा पैदा कर सकती थीं. ये उन पर था कि वे उन बच्चों को पाले या न पालें. उस समय तक खासकर ऊंची जातियों की विधवाओं का गर्भवती हो जाना बहुत बड़ा कलंक था और इसलिए वे अपना बच्चा अक्सर फेंक देती थीं. सावित्रीबाई फुले ने उन बच्चों के लालन-पालन की व्यवस्था की. ऐसा ही एक बच्चा यशवंत फुले परिवार का वारिस बना.

उस समय तक विधवा महिलाओं के सिर के बाल मुंड़ने की व्यवस्था थी. सावित्रीबाई ने इस अमानवीय प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और नाई बिरादरी के लोगों को संगठित करके पुणे में इस मुद्दे पर उनकी हड़ताल कराई कि वे विधवाओं का मुंडन नहीं करेंगे.

अपने पति ज्योतिबा फुले, जो तब तक महात्मा फुले कहलाने लगे थे, की मृत्यु के बाद उनके संगठन सत्यशोधक समाज का काम सावित्रीफुले ने संभाल लिया और सामाजिक चेतना का काम करती रहीं.

जाति और पितृसत्ता से संघर्ष करते उनके कविता संग्रह छपे. उनकी कुल चार किताबें हैं.

पुणे में प्लेग फैला तो सावित्रीबाई फुले मरीजों की सेवा में जुट गईं. इसी दौरान उन्हें प्लेग हो गया और 1897 में उनकी मृत्य हो गई.
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भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारक व मार्गदर्शिका राष्ट्रमाता सावित्री बाई फूले के जन्मदिवस पर उन्हें शत शत नमन।


03/01/2026

जय भीम जय भारत

भारत की पहली महिला शिक्षिका व महिलाओं, शोषित वंचित समाज के लिए अपना जीवन त्याग करने वाली ज्ञानज्योति माता सावित्री बाई फुले जी की जयंती (3 जनवरी) पर DASFI कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इकाई की ओर से ऑनलाइन मीटिंग का प्रोग्राम रखा गया है जिसमे आप सभी ज्यादा से ज्यादा शामिल होकर उनके जीवन संघर्ष को जाने व उनके विचारों पर आधारित समाज
का निर्माण करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।

मुख्य वक्ता - माननीय संजय बौद्ध जी
(पूर्व राष्ट्रीय अध्य्क्ष ,DASFI )

दिनांक - 3 जनवरी 2026
समय - 7 बजे शाम
Google meet link-

meet.google.com/awm-evuo-whd

निवेदक - DASFI K*K UNIT

नए साल की यह तस्वीर शौर्य से भर देती है जब हम याद करते हैं उन 500 योद्धाओं को जिन्होंने पेशवा की 28000 सेना को कुचल दिया...
01/01/2026

नए साल की यह तस्वीर शौर्य से भर देती है जब हम याद करते हैं उन 500 योद्धाओं को जिन्होंने पेशवा की 28000 सेना को कुचल दिया था, यह आत्मसम्मान की जंग थी, भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं, जय भीम ✊🏾

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